लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
संसार अनित्य है, आत्मकल्याण ही जीवन का परम लक्ष्य
उनियारा (दुर्योधन मयंक)। क्षेत्र के श्री दिगम्बर जैन सुखोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र सुथड़ा में श्री अष्टान्हिका महापर्व का षष्ठम दिवस श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच मनाया गया।
प्रबंध समिति के महावीर प्रसाद पराणा एवं मनोज जैन ने बताया कि जैन धर्मावलंबियों का यह परम पावन अष्टान्हिका महापर्व इन दिनों साधना और आराधना के विशेष उत्साह के साथ संपन्न हो रहा है। वर्ष में तीन बार—कार्तिक, फाल्गुन और आषाढ़ शुक्ल पक्ष में आने वाला यह आठ दिवसीय पर्व आत्मशुद्धि, तप और आराधना का अद्वितीय संगम माना जाता है।
नन्दीश्वर द्वीप की आराधना का विशेष महत्व
जैन आगमों में वर्णित इस महापर्व का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि इन दिनों देवगण दिव्य धाम नन्दीश्वर द्वीप में स्थित तीर्थंकर प्रतिमाओं की भव्य पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नन्दीश्वर द्वीप जैन ब्रह्मांड विज्ञान में अत्यंत पवित्र और अलौकिक क्षेत्र है, जहां मानव शरीर से पहुँचना संभव नहीं है, किंतु श्रद्धा और विधान के माध्यम से उसकी वंदना की जाती है।
इसी भावना के साथ देशभर के जिनालयों में नन्दीश्वर मंडल विधान, अष्टद्रव्य पूजन और विशेष आराधनाएँ आयोजित की जा रही हैं। अष्टान्हिका महापर्व मूलतः सिद्ध परमात्माओं की आराधना का विशेष काल है, जिसमें श्रद्धालु राग-द्वेष का त्याग कर आत्मा की शुद्धि का प्रयास करते हैं।
विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न
इस अवसर पर शास्त्री प्रिंस जैन देवांश के निर्देशन में मंगलाष्टक के साथ नित्य अभिषेक और शांतिधारा की गई। वार्षिक शांतिधारा रमेशचंद, रौनक सर्राफ (जयपुर) तथा पांडुशिला पर सुखोदय रविवार अभिषेक मंडल अलीगढ़ के सदस्यों—अरविंद कुमार, चेतन कुमार, विमल कुमार, प्रवीण कुमार एवं हेमंत कुमार द्वारा की गई।
इसके पश्चात देव-शास्त्र-गुरु पूजा, चौबीस तीर्थंकर भगवान की पूजा, मूलनायक भगवान की पूजा एवं नन्दीश्वर द्वीप की पूजा कर सिद्धों की आराधना के साथ अष्टान्हिका महापर्व का छठा दिवस मनाया गया।
भक्तामर संयोजक हुक्मचंद जैन एवं नरेंद्र जैन बनेठा ने बताया कि सायं 7 बजे श्रेष्ठी परिवार एवं रविवार भक्तामर मंडल अलीगढ़ द्वारा भक्तामर दीपार्चना का आयोजन भी सानंद संपन्न हुआ।













































