लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
सियासी सरगर्मियां तेज
रिपोर्ट: दुर्योधन मयंक
उनियारा। राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव 2026 को लेकर आरक्षण की तस्वीर साफ होते ही उनियारा नगरपालिका की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। जयपुर स्थित स्वायत्त शासन निदेशालय में निकाय प्रमुखों के पदों के लिए निकाली गई आरक्षण लॉटरी में उनियारा नगरपालिका चेयरमैन का पद इस बार अनारक्षित (जनरल) घोषित हुआ है। सीट के ओपन होते ही कस्बे में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और दावेदारों की संख्या अचानक बढ़ गई है।
महिला आरक्षण से मुक्त हुई सीट
गौरतलब है कि पिछले नगरपालिका चुनाव में चेयरमैन का पद सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित था। उस चुनाव में मोनिका गुर्जर नगरपालिका अध्यक्ष निर्वाचित हुई थीं। इस बार रोटेशन प्रणाली के तहत सीट अनारक्षित हो गई है, जिससे अब किसी भी वर्ग का पुरुष या महिला प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतर सकता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सीट के ओपन होने से कई ऐसे स्थानीय नेता सक्रिय हो गए हैं, जो पिछली बार आरक्षण के कारण चुनावी दौड़ से बाहर थे।
भाजपा में मंथन शुरू
चेयरमैन पद अनारक्षित घोषित होने के बाद भाजपा संगठन में भी रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पिछले चुनाव में पर्याप्त समर्थन होने के बावजूद भाजपा अपना बोर्ड बनाने में सफल नहीं हो पाई थी। ऐसे में इस बार पार्टी कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही।
क्षेत्रीय विधायक राजेंद्र गुर्जर के नेतृत्व में भाजपा संभावित उम्मीदवारों के नामों पर मंथन कर रही है। पार्टी ऐसे चेहरे की तलाश में है जो संगठन और जनता दोनों के बीच मजबूत पकड़ रखता हो।
कांग्रेस भी तैयार कर रही रणनीति
कांग्रेस खेमे में भी गतिविधियां बढ़ गई हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चा शुरू हो चुकी है। कांग्रेस आगामी चुनाव में मजबूत प्रत्याशी उतारकर नगरपालिका में वापसी की रणनीति पर काम कर रही है।
बाजारों और चौपालों में चुनावी चर्चा
लॉटरी परिणाम के बाद उनियारा कस्बे के बाजारों, चौराहों और चाय की थड़ियों पर चुनावी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। लोग संभावित उम्मीदवारों के नामों को लेकर अपने-अपने कयास लगा रहे हैं। कई दावेदारों ने पार्टी टिकट के लिए जयपुर और जिला मुख्यालय स्तर पर सक्रियता भी बढ़ा दी है।
अब 17 अगस्त की लॉटरी पर नजर
चेयरमैन पद का आरक्षण तय होने के बाद अब सभी की नजर 17 अगस्त को होने वाली वार्ड आरक्षण लॉटरी पर टिकी हुई है। जिला कलेक्टर की मौजूदगी में वार्डों का आरक्षण तय किया जाएगा। इसके बाद यह स्पष्ट होगा कि कौन-सा संभावित दावेदार किस वार्ड से पार्षद का चुनाव लड़कर चेयरमैन पद की दौड़ में शामिल होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वार्ड आरक्षण की घोषणा के बाद उनियारा की चुनावी तस्वीर और अधिक स्पष्ट होगी तथा प्रमुख दल अपने उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया को अंतिम रूप देंगे।



















































