Home crime थांदेवाला स्कूल में छात्राओं से छेड़छाड़ मामला — पोक्सो एक्ट में दर्ज...

थांदेवाला स्कूल में छात्राओं से छेड़छाड़ मामला — पोक्सो एक्ट में दर्ज हुआ मुकदमा

0

स्कूल में छात्राओं छेड़छाड़ मामला — पोक्सो एक्ट में दर्ज हुआ मुकदमा, प्रशासन की सख्ती

विशेष रिपोर्ट | मनजीत सिंह के साथ हेमराज तिवारी | लोकटुडे

गजसिंहपुर तहसील के अंतर्गत आने वाले थांदेवाला गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले कक्षा 6 से 8 के नाबालिग छात्रों के साथ कथित रूप से छेड़छाड़ और मानसिक उत्पीड़न का आरोप चार पुरुष शिक्षकों पर लगा है।

घटना की जानकारी तब सामने आई जब पीड़ित छात्रों ने घर जाकर परिजनों को आपबीती बताई, जिसके बाद ग्रामीणों और परिजनों ने एकजुट होकर स्कूल में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। स्कूल प्रांगण में “टीचर गिरफ्तार करो”, “बच्चों को न्याय दो” जैसे नारे गूंजते रहे।

पीड़ित छात्रों का आरोप:

1. कुछ शिक्षकों द्वारा कक्षा में अनुचित ढंग से छूने, शारीरिक हरकतें करने और गोपनीय अंगों पर टिप्पणी करने जैसे संगीन आरोप लगाए गए हैं।

2. मानसिक उत्पीड़न के तहत शिक्षकों द्वारा डराने-धमकाने, चुप रहने के लिए धमकी देने, और मारपीट करने की भी बात सामने आई है।

3. शिकायतकर्ताओं के अनुसार, यह व्यवहार लगभग 3–4 महीनों से जारी था, लेकिन डर और शर्म के कारण छात्र पहले चुप रहे।

परिजनों और ग्रामीणों का आक्रोश:

घटना सामने आने के बाद ग्रामीणों ने स्कूल के गेट पर धरना दिया और शिक्षकों को बर्खास्त करने व गिरफ्तारी की मांग की। स्थानीय प्रशासन को सूचना मिलने पर गजसिंहपुर पुलिस व उपखंड अधिकारी मौके पर पहुंचे।
मौके पर पहुंचेअधिकारियों ने ग्रामीणों को शांत कराते हुए तत्काल जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया।

प्रशासनिक कार्रवाई:

चारों शिक्षकों के खिलाफ POCSO (Protection of Children from Sexual Offences) एक्ट और IPC की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

प्रारंभिक जांच में दो शिक्षकों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जिन्हें निलंबित कर दिया गया है। विद्यालय प्रधानाचार्य को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है कि इस तरह की घटनाएं विद्यालय प्रशासन की जानकारी में क्यों नहीं आईं।

पोक्सो एक्ट के अंतर्गत मामला:

पोक्सो कानून के अनुसार, किसी भी प्रकार का यौन उत्पीड़न, शारीरिक छेड़छाड़, मानसिक उत्पीड़न नाबालिग के खिलाफ अपराध की श्रेणी में आता है। इस मामले में POCSO की धारा 7, 8, 9 और 10 के तहत केस दर्ज हुआ है, जो गंभीर दंडनीय अपराध हैं और 7 से 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान रखते हैं।

विद्यालय की भूमिका पर सवाल:

क्या स्कूल प्रबंधन को इस तरह की गतिविधियों की जानकारी थी?
अगर थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
सीसीटीवी फुटेज, स्कूल डायरी, उपस्थिति रजिस्टर जैसे दस्तावेजों को जांच में लिया गया है।

छात्रों और समाजसेवियों की मांग:

बच्चों के बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराए जाएं स्कूल में काउंसलिंग और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं ऐसे शिक्षकों को ब्लैकलिस्ट कर भविष्य में किसी अन्य स्कूल में नियुक्त न किया जाए महिला शिक्षकों की नियुक्ति प्राथमिक कक्षाओं में अनिवार्य की जाए

पोक्सो एक्ट बेहद स्पष्ट है – यदि कोई शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न किसी नाबालिग के साथ होता है, तो उस पर कठोर कार्रवाई अनिवार्य है। कोई भी समझौता या आपसी सुलह इसकी प्रक्रिया को प्रभावित नहीं कर सकता।”
एडवोकेट गगनदीप सिंह, बाल अधिकार विशेषज्ञ
इस घटना ने एक बार फिर राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा संस्थानों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहाँ एक ओर बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों द्वारा इस तरह की गतिविधियाँ समाज के लिए गंभीर चेतावनी हैं।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version