लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
गंगधार, झालावाड़। (सुनील निगम, लोक टुडे)
श्रावण मास के दौरान भगवान श्रीकृष्ण को हिंडोले में विराजमान कर झुलाने की प्राचीन धार्मिक परंपरा गंगधार कस्बे में आज भी श्रद्धा और आस्था के साथ निभाई जा रही है। महर्षि गर्गाचार्य की तपोभूमि माने जाने वाले प्राचीन नगर गर्गरातटपुरम गंगधार के विभिन्न मंदिरों में ठाकुर जी के लिए आकर्षक हिंडोले सजाए गए हैं। मंदिरों में प्रतिदिन श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों में भाग ले रहे हैं।
श्रावण मास में हरियाली तीज से लेकर रक्षाबंधन और जन्माष्टमी तक ठाकुर जी को विभिन्न प्रकार के हिंडोलों में विराजमान कर झुलाने की परंपरा रही है। पुष्टिमार्गीय परंपरा में इस आयोजन का विशेष महत्व माना जाता है। भगवान के बाल स्वरूप को प्रसन्न करने के लिए हिंडोले को फूलों, मोतियों, फलों, सब्जियों और अन्य आकर्षक सामग्री से सजाया जाता है।
गंगधार के गौवर्धन नाथ जी की हवेली, श्री नृसिंह मंदिर, श्री राधा-कृष्ण मंदिर, राम जानकी मंदिर, सत्यनारायण मंदिर और द्वारकाधीश मंदिर सहित अनेक प्राचीन मंदिरों में ठाकुर जी के लिए सुंदर हिंडोले सजाए गए हैं। हिंडोलों को आकर्षक सजावटी सामग्री, रंग-बिरंगे वस्त्रों, मोतियों और फूलों से सजाकर भगवान को विराजमान कराया जा रहा है।
विशेष रूप से गौवर्धन नाथ मंदिर में गंगधार सहित चौमहला क्षेत्र से बड़ी संख्या में दर्शनार्थी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु भगवान के दर्शन के साथ भजन-कीर्तन में शामिल होकर धार्मिक वातावरण में मनोरथ लाभ ले रहे हैं।
प्राचीन परंपराओं का हो रहा निर्वहन
गंगधार में श्रावण मास के दौरान धार्मिक परंपराओं की निरंतरता बनाए रखते हुए विभिन्न आयोजन किए जा रहे हैं। पूरे श्रावण मास में अभिषेक, ठाकुर जी के हिंडोले, कांवड़ यात्रा तथा गौरीशंकर महादेव की नगर भ्रमण सवारी जैसे धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही।
श्रद्धालुओं का कहना है कि हिंडोला उत्सव केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि गंगधार की सदियों पुरानी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का हिस्सा है। नई पीढ़ी भी इन परंपराओं से जुड़ रही है, जिससे प्राचीन परंपराओं की कड़ी निरंतर बनी हुई है।























































