लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
सुनील निगम, लोक टुडे
गंगधार, झालावाड़। आज से पितृपक्ष की शुरुआत हो रही है। यह समय पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष के दौरान पूर्वज पृथ्वी लोक पर आते हैं और अपने वंशजों पर कृपा बरसाते हैं। वहीं, पितरों की आत्मशांति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विधि-विधान से श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। इस दौरान पूरे 16 दिनों तक कई नियमों का विशेष रूप से पालन करने की भी मान्यताएं हैं।
पंडितो के अनुसार, श्राद्धपक्ष का समय अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का होता है, इसलिए इस दौरान सात्विक भोजन करने के साथ पंचबली का भी ध्यान रखा जाता है। ऐसे में पितृपक्ष के आने वाले 16 दिनों में किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, आइए जानते हैं।

नियम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष के दौरान बाल और नाखून काटने से बचें। यह नकारात्मकता और दोष को बढ़ा सकता है।
पितृपक्ष में पितरों की आत्मशांति के लिए तर्पण, पिंडदान, दान और श्राद्ध कर्म करें। मान्यता है कि, विधि-विधान से किए गए इन कर्मों से पितरों को शांति मिलती है। साथ ही घर-परिवार में खुशियां बनी रहती हैं।
श्राद्ध पक्ष के समय खरीदारी, बड़ी धार्मिक यात्राएं, नए और मांगलिक कार्य करने से बचने की परंपरा है। इसके अलावा आप गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्यों के साथ ही कोई नई शुरुआत करने से भी बचें।
पितृपक्ष के दौरान भोजन में सात्विकता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इन 16 दिनों में अधिक तेल-मसाले वाले भोजन से बचने और सादा एवं सात्विक भोजन करने की मान्यताएं हैं।
पितृपक्ष के दौरान भोजन का पहला हिस्सा गाय, कुत्ते, कौवे, देवता और चींटियों के लिए निकालें। इसे पंचग्रास कहा जाता है। ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।


















































