लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
AI से प्रतियोगी परीक्षाओं तक बढ़े अवसर
राजसमंद कॉलेज में ‘संस्कृत विषय क्यों पढ़ें?’ पर विशेष ओरिएंटेशन कार्यक्रम, विद्यार्थियों को पारंपरिक अध्ययन के साथ आधुनिक करियर विकल्पों की दी जानकारी
राजसमंद। संस्कृत को अक्सर भारतीय संस्कृति और प्राचीन ज्ञान परंपरा की भाषा के रूप में देखा जाता है, लेकिन बदलते दौर में इसका दायरा तेजी से रोजगार और तकनीक के क्षेत्रों तक भी बढ़ रहा है। AI, कंप्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स, डिजिटल कंटेंट, पांडुलिपि विज्ञान से लेकर UPSC-RPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं तक संस्कृत विद्यार्थियों के लिए नए अवसर खोल रही है।
इसी सोच को विद्यार्थियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से सेठ रंगलाल कोठारी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, राजसमंद में संस्कृत विभाग की ओर से ‘संस्कृत विषय क्यों पढ़ें?’ विषय पर एक दिवसीय विशेष ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संस्कृत के पारंपरिक महत्व के साथ आधुनिक करियर और रोजगार की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी गई।
संस्कृत बौद्धिक क्षमता और तार्किक चिंतन का माध्यम : प्राचार्या
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. सुमन बड़ोला ने की। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता, तार्किक चिंतन और व्यक्तित्व विकास को मजबूत करने का सशक्त माध्यम भी है।
उन्होंने विद्यार्थियों से संस्कृत का अध्ययन करते हुए आधुनिक रोजगार और करियर के अवसरों की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
अध्यापन से आगे बढ़ा संस्कृत का दायरा
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सहायक आचार्य संस्कृत विजेन्द्र कुमार शर्मा ने संस्कृत से जुड़ी पारंपरिक और आधुनिक संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि संस्कृत का क्षेत्र अब केवल अध्यापन और अनुवाद तक सीमित नहीं रह गया है। आज संस्कृत के विद्यार्थियों के लिए UPSC, RPSC सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं, शोध, योग, आयुर्वेद, ज्योतिष, डिजिटल कंटेंट, पांडुलिपि विज्ञान, कंप्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में भी अवसर सामने आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि—
“संस्कृत को केवल एक विषय नहीं, बल्कि अवसरों की भाषा के रूप में देखना चाहिए।”
विजेन्द्र कुमार शर्मा ने विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन, साहित्य और प्राचीन शास्त्रों के अध्ययन के साथ आधुनिक तकनीक और रोजगार के क्षेत्र में संस्कृत की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी।
AI और कंप्यूटर तकनीक में भी संस्कृत की संभावनाएं
कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना के जिला समन्वयक डॉ. गोपाल लाल कुमावत ने संस्कृत की वैज्ञानिक संरचना पर प्रकाश डाला। उन्होंने कंप्यूटर और आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में संस्कृत की संभावनाओं को भी विद्यार्थियों के सामने रखा।
उन्होंने विद्यार्थियों से परंपरा और तकनीक के बीच समन्वय स्थापित करते हुए आगे बढ़ने का आह्वान किया।
डिजिटल युग में भाषा, डेटा और तकनीक के बढ़ते महत्व को देखते हुए संस्कृत के अध्ययन को नए क्षेत्रों से जोड़कर देखने की जरूरत पर भी चर्चा की गई।
संस्कृत साहित्य से विकसित होता है संतुलित व्यक्तित्व
कार्यक्रम में वक्ताओं ने संस्कृत साहित्य के शैक्षणिक और व्यक्तित्व विकास से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा की।
उन्होंने कहा कि संस्कृत साहित्य विद्यार्थियों में नैतिकता, अनुशासन, तार्किकता, चिंतनशीलता और संतुलित व्यक्तित्व विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
वहीं भारतीय ज्ञान परंपरा, पांडुलिपि विज्ञान, शोध और डिजिटल तकनीक जैसे क्षेत्रों में उभरते अवसर संस्कृत को युवाओं के लिए नए सिरे से प्रासंगिक बना रहे हैं।
विद्यार्थियों को मिली करियर की नई दिशा
ओरिएंटेशन कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के मन में संस्कृत को लेकर मौजूद पारंपरिक धारणा को व्यापक बनाना रहा। विद्यार्थियों को बताया गया कि संस्कृत की पढ़ाई के साथ यदि तकनीकी और आधुनिक कौशल को जोड़ा जाए तो करियर के कई नए रास्ते खुल सकते हैं।
कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि संस्कृत का अध्ययन केवल भाषा और साहित्य तक सीमित न रखकर भारतीय ज्ञान परंपरा + आधुनिक तकनीक + रोजगार के त्रिकोण के रूप में देखा जाना चाहिए।
बड़ी संख्या में विद्यार्थी रहे मौजूद
कार्यक्रम में खुशबू, भवानी सिंह, रेणु और डॉ. गरिमा यादव सहित महाविद्यालय के संकाय सदस्य मौजूद रहे। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने कार्यक्रम में भाग लिया और संस्कृत के आधुनिक उपयोग तथा करियर से जुड़े अवसरों के बारे में जानकारी हासिल की।
कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि संस्कृत का महत्व केवल अतीत को समझने तक सीमित नहीं है। यदि इसे आधुनिक तकनीक, शोध और रोजगार के नए क्षेत्रों से जोड़ा जाए तो यह युवाओं के लिए भविष्य की संभावनाओं की भाषा भी बन सकती है।


















































