लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
25 वर्ष की साहित्यिक यात्रा का हुआ सम्मान
‘मेरा गांव-मेरा गौरव’ पुस्तक का विमोचन, पूर्व अध्यक्षों सहित साहित्यकारों और संस्थान के सहयोगियों का हुआ सम्मान
गौतम शर्मा राजसमन्द
राजसमंद। साहित्य, शिक्षा, संगीत, संस्कृति और संस्कार को समर्पित साकेत साहित्य संस्थान, राजसमंद की 25 वर्षीय साहित्यिक यात्रा पूर्ण होने पर रजत जयंती समारोह हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया गया। समारोह का आयोजन सुभाष पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल, हाउसिंग बोर्ड, धोइंदा में हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यकार, कवि, शिक्षाविद और कलाप्रेमी मौजूद रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ कंचन राठौड़ ने मां सरस्वती की वंदना से किया। इसके बाद साकेत साहित्य संस्थान की नवीनतम प्रकाशित पुस्तक ‘मेरा गांव-मेरा गौरव’ का मंचस्थ अतिथियों ने विमोचन किया। 
पूर्व अध्यक्षों और साहित्यकारों का सम्मान
रजत जयंती समारोह में साकेत साहित्य संस्थान के सभी पूर्व अध्यक्षों को प्रमाण पत्र और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। साथ ही पिछले पांच वर्षों में जिन साहित्यकारों की पुस्तकें प्रकाशित हुईं, उन्हें भी सम्मानित किया गया। संस्थान के विकास में विशेष सहयोग देने वाले संस्थापक सदस्यों और सुभाष स्कूल के निदेशक नारायण लाल कुमावत को भी सम्मान प्रदान किया गया।
संस्थान के महासचिव कमल अग्रवाल ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. भैरू लाल गर्ग ने की। मुख्य अतिथि सुरेंद्र सिंह राव रहे। विशिष्ट अतिथियों के रूप में डॉ. चंद्रकांता बंसल, पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी राकेश तैलंग, उदयपुर की युगधारा संस्था के अध्यक्ष एवं शिक्षाविद प्रकाश तातेड, वरिष्ठ साहित्यकार माधव नागदा और जगदीश चंद जोशी मौजूद रहे।
100 से अधिक कवि-साहित्यकार हुए शामिल
समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार चतुर कोठारी, प्रमोद सनाढ्य, श्याम मठवाल, सम्पत उजाला, विजय सिंह राव, सतीश आचार्य, अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष शंकर माली, डॉ. भगवान लाल बंशीवाल, मनोज पोरवाड़, नीतू बाफना, देवकिशन मेघांश, राजेंद्र सिंह चारण, शिवदास वैरागी, गणेश लाल कुमावत, कमलेश टेलर, धर्मेंद्र सालवी, मदन लाल जोशी सार्थक, उत्सव जैन, ओम उज्जवल, बंशीलाल लड्ढा, मोहन लाल रैगर, सत्यनारायण सत्य, देवकीनंदन नंदवाना, शकुंतला पामेचा, ज्योत्सना पोखरना, वीरेंद्र सिंह चुंडावत और हरिनारायण डाबी सहित 100 से अधिक कवि, साहित्यकार और कलाप्रेमी मौजूद रहे।
राजसमंद सहित राज्य के विभिन्न जिलों में निवासरत संस्थान से जुड़े वरिष्ठ साहित्यकारों, कवियों और सदस्यों ने भी समारोह में सहभागिता की। उनकी मौजूदगी ने साकेत साहित्य संस्थान की 25 वर्ष की यात्रा के उत्सव को विशेष बना दिया।
25 वर्षों की साहित्यिक यात्रा का किया उल्लेख
कार्यक्रम का संचालन करते हुए संस्थान के उपाध्यक्ष नारायण सिंह राव ने साकेत साहित्य संस्थान की 25 वर्ष की यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने संस्थान की ओर से अब तक प्रकाशित पुस्तकों और साहित्यिक गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर संस्थान की अध्यक्ष वीणा वैष्णव, उपाध्यक्ष नारायण सिंह राव, महासचिव कमल अग्रवाल, साहित्य प्रमुख कुसुम अग्रवाल, सह सचिव कुमार दिनेश, जिला मीडिया प्रभारी अन्नू राठौड़ रुद्रांजली, आईटी सेल प्रभारी माधव जटिया तथा ‘मेरा गांव-मेरा गौरव’ पुस्तक के संपादक डॉ. सम्पत रेगर एवं सह-संपादक चंद्रशेखर नारलाई सहित जिले के कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
साहित्य को यथार्थ से जोड़ने पर जोर
मुख्य अतिथि सुरेंद्र सिंह राव ने कहा कि साहित्य को यथार्थ साहित्य ही रहने दिया जाना चाहिए। विशिष्ट अतिथि डॉ. राकेश तैलंग ने कहा कि साकेत साहित्य संस्थान जनजागरूकता के साथ साहित्य के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
डॉ. चंद्रकांता बंसल ने साहित्यकारों से आह्वान किया कि वे जहां भी रहें, अपने ज्ञान और लेखनी से समाज को प्रकाशित करते रहें।
अंत में संस्थान की अध्यक्ष वीणा वैष्णव ने समारोह में उपस्थित सभी अतिथियों, मीडियाकर्मियों और कार्यकारिणी सदस्यों का आभार व्यक्त किया।






















































