लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
रितू मेहरा संवाददाता
जयपुर। राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के बहुचर्चित चुनाव में मंगलवार को उस वक्त बड़ा कानूनी मोड़ आ गया, जब मतदान प्रक्रिया के बीच सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद चुनाव परिणामों की घोषणा पर रोक लग गई। जयपुर स्थित RCA एकेडमी में छह प्रमुख पदों के लिए मतदान हुआ, लेकिन अब मतगणना के बाद परिणाम तत्काल सार्वजनिक नहीं किए जाएंगे। वोटों को सीलबंद लिफाफे में सुरक्षित रखा जाएगा और आगे की स्थिति अदालत के आदेश के बाद स्पष्ट होगी।
RCA की चुनावी जंग पहले ही राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई थी। अध्यक्ष पद समेत प्रमुख पदों पर दावेदारी को लेकर अलग-अलग गुट आमने-सामने थे। खास बात यह है कि मुकाबले में बीजेपी से जुड़े राजनीतिक परिवारों के नेता पुत्रों के नाम भी प्रमुखता से सामने आए। ऐसे में क्रिकेट संगठन का चुनाव धीरे-धीरे सियासी रसूख और प्रभाव की लड़ाई के तौर पर भी देखा जाने लगा।
38 मतदाता, छह प्रमुख पद और आमने-सामने दो खेमे
मंगलवार सुबह करीब 11:30 बजे RCA चुनाव के लिए मतदान शुरू हुआ। छह प्रमुख पदों के लिए 11 प्रत्याशी मैदान में थे और 38 मतदाताओं को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करना था।
एक तरफ बृजकिशोर उपाध्याय पैनल था, तो दूसरी ओर धनंजय सिंह गुट चुनावी मुकाबले में था। दोनों खेमों ने अपनी-अपनी रणनीति के साथ समर्थन जुटाया। मतदान प्रक्रिया आगे बढ़ रही थी, लेकिन इसी दौरान अदालत से आए निर्देश ने पूरे चुनावी घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया।
अब चुनावी मैदान में डाले गए वोट तत्काल जीत-हार में तब्दील नहीं होंगे। परिणामों को सुरक्षित रखा जाएगा और अदालत की अगली प्रक्रिया के बाद ही तस्वीर साफ होगी।
तीन जिलों की सदस्यता बनी विवाद की जड़
पूरे विवाद का केंद्र तीन नए जिले—बालोतरा, खैरथल-तिजारा और डीडवाना-कुचामन—हैं।
इन जिलों को RCA की अंतिम मतदाता सूची में शामिल किए जाने और मतदान का अधिकार दिए जाने को लेकर आपत्ति उठाई गई है। इसी मुद्दे को लेकर RCA एडहॉक कमेटी के पूर्व कन्वीनर और सवाई माधोपुर जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष डीडी कुमावत की ओर से कानूनी चुनौती दी गई।
याचिका में इन जिलों की सदस्यता और मताधिकार से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए। विवाद बढ़ने के बाद मामला अदालत तक पहुंचा और अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश ने चुनाव परिणामों पर अस्थायी रोक की स्थिति पैदा कर दी है।
डीडी कुमावत का कहना है कि वे इस मामले को आगे सुप्रीम कोर्ट तक लेकर जाएंगे। उनका रुख साफ है कि तीनों जिलों को मताधिकार देने की प्रक्रिया की न्यायिक जांच होनी चाहिए।
चुनाव हुआ, लेकिन जीत का ऐलान नहीं
RCA चुनाव की खास बात यही है कि मतदान पूरा होने के बावजूद तत्काल किसी उम्मीदवार को विजेता घोषित नहीं किया जाएगा।
मतदान में इस्तेमाल किए गए वोट सुरक्षित रखे जाएंगे। परिणाम सीलबंद लिफाफे में रहेंगे और अदालत के आगामी निर्देश के बाद ही यह तय होगा कि चुनावी प्रक्रिया का अगला चरण किस तरह आगे बढ़ेगा।
इस आदेश ने उन उम्मीदवारों और समर्थकों की बेचैनी बढ़ा दी है, जो मतदान के बाद नतीजे का इंतजार कर रहे थे। अब सभी की नजर अदालत की अगली सुनवाई और निर्देशों पर है।
RCA की कुर्सी इतनी अहम क्यों?
RCA अध्यक्ष पद को लेकर इतनी खींचतान की वजह सिर्फ संगठनात्मक प्रतिष्ठा नहीं है। राजस्थान में क्रिकेट प्रशासन का बड़ा ढांचा RCA से जुड़ा हुआ है। जिला क्रिकेट संघों से लेकर प्रदेश स्तर की क्रिकेट गतिविधियों तक संस्था की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
इसके अलावा संगठन के पास उपलब्ध वित्तीय संसाधन और क्रिकेट से जुड़े प्रशासनिक अधिकार भी इस पद को प्रभावशाली बनाते हैं।
इसी वजह से RCA की कमान हासिल करने की होड़ हर चुनाव में खास दिलचस्पी पैदा करती है। इस बार यह मुकाबला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि मैदान में उतरने वाले कई प्रमुख चेहरों के पीछे राजनीतिक परिवारों का प्रभाव दिखाई देता है।

क्रिकेट की संस्था में सियासी परिवारों की सीधी भिड़ंत
RCA चुनाव में बीजेपी से जुड़े राजनीतिक परिवारों के नेता पुत्रों की अलग-अलग खेमों से दावेदारी ने राजनीतिक चर्चा को और हवा दी है।
राजनीतिक मंच पर साथ दिखाई देने वाले कई प्रभावशाली परिवार क्रिकेट संगठन की चुनावी राजनीति में अलग-अलग पक्षों के साथ खड़े नजर आए। यही वजह है कि RCA का मुकाबला केवल क्रिकेट प्रशासन तक सीमित नहीं रहा।
हालांकि अलग-अलग खेमों की ओर से चुनाव को संगठनात्मक और क्रिकेट प्रशासन से जुड़ा मुकाबला बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे प्रभाव और प्रतिष्ठा से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
पार्टी से ज्यादा RCA की कुर्सी?
RCA चुनाव ने एक और सवाल खड़ा किया है—क्या क्रिकेट संगठन की कमान हासिल करने की होड़ में राजनीतिक समीकरण पीछे छूट गए?
पार्टी की राजनीति में कई चेहरे एक ही मंच पर दिखाई देते हैं, लेकिन RCA के चुनाव में उनके परिवारों से जुड़े दावेदार अलग-अलग पैनल में नजर आए।
यही टकराव इस चुनाव को सामान्य खेल संगठन के चुनाव से अलग बनाता है। यहां दांव सिर्फ एक पद पर नहीं है, बल्कि राजस्थान क्रिकेट के प्रशासनिक ढांचे में प्रभाव स्थापित करने पर भी है।
हालांकि किस गुट के पास कितना समर्थन है और अंतिम रूप से किसे बहुमत मिलता है, इसका आधिकारिक जवाब अदालत की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही सामने आएगा।
डीडी कुमावत की याचिका ने बदल दिया पूरा समीकरण
RCA एडहॉक कमेटी के पूर्व कन्वीनर डीडी कुमावत की ओर से उठाया गया सदस्यता का मुद्दा अब पूरे चुनाव की सबसे अहम कानूनी कड़ी बन गया है।
तीन जिलों को मतदाता सूची में शामिल करने और उन्हें वोटिंग राइट्स देने की वैधता पर उठे सवाल ने चुनावी प्रक्रिया को सीधे न्यायिक जांच के दायरे में ला दिया है।
यही वजह है कि मतदान के बाद भी RCA का चुनावी अध्याय पूरा नहीं हुआ।
अब सवाल यह नहीं है कि किस उम्मीदवार ने कितने वोट हासिल किए। बड़ा सवाल यह है कि अदालत के निर्देश के बाद इन वोटों का भविष्य क्या होगा और तीनों जिलों की सदस्यता को लेकर अंतिम स्थिति क्या बनती है।
अब अदालत के अगले आदेश पर टिकी नजर
RCA चुनाव में मतदान हो चुका है। उम्मीदवारों ने अपनी ताकत आजमा ली है। समर्थकों ने भी जीत के दावे किए हैं। मगर आधिकारिक नतीजा फिलहाल सामने नहीं आएगा।
तीन जिलों की सदस्यता और मताधिकार का विवाद, चुनावी प्रक्रिया और परिणामों की घोषणा—तीनों मुद्दे अब कानूनी घटनाक्रम से जुड़े हैं।
इस पूरे मामले में आने वाला अदालत का अगला आदेश RCA की नई कार्यकारिणी की राह तय करेगा।
फिलहाल तस्वीर यही है—
RCA की कुर्सी के लिए मुकाबला मैदान में हुआ, वोट भी पड़ गए… लेकिन जीत का फैसला अब अदालत की अगली तारीख के इंतजार में है।
राजस्थान क्रिकेट की सबसे प्रतिष्ठित संस्थाओं में शामिल RCA का यह चुनाव अब सिर्फ क्रिकेट प्रशासन की लड़ाई नहीं रहा। इसमें संगठन, प्रभाव, राजनीतिक परिवारों की दावेदारी और कानूनी पेच—चारों एक साथ उलझ गए हैं। अब देखना यह होगा कि अदालत का अगला आदेश इस पूरे चुनावी विवाद को किस दिशा में ले जाता है।




















































