लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
8 विधानसभा क्षेत्रों में BSP से चुनाव लड़ने का ऐलान
बारां जिला प्रमुख के लिए संदीप शर्मा को बनाया चेहरा, बूंदी में गिरराज गौतम को मिली जिम्मेदारी
बूंदी। किसान आंदोलन के बाद राजनीतिक रूप से सक्रिय हुए युवा नेता नरेश मीणा ने आगामी पंचायती राज चुनावों को लेकर बड़ा सियासी दांव खेला है। बूंदी में बीएसपी प्रदेश अध्यक्ष सुम्रत सिंह की मौजूदगी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नरेश मीणा ने बहुजन समाज पार्टी (BSP) के साथ चुनावी तालमेल का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि तीसरा मोर्चा बारां की चार, बूंदी की तीन और देवली-उनियारा सहित कुल आठ विधानसभा क्षेत्रों में पंचायत चुनाव लड़ेगा।
नरेश मीणा ने कहा कि पहले आम आदमी पार्टी के चुनाव चिह्न ‘झाड़ू’ पर चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी थी और इसे लेकर पार्टी के शीर्ष नेताओं से बातचीत भी हुई थी। हालांकि, उनके अनुसार ऐन वक्त पर परिस्थितियां बदल गईं। उन्होंने प्रमोद जैन भाया के प्रभाव और पर्दे के पीछे साजिश की आशंका का आरोप लगाते हुए AAP से अलग होने और BSP के ‘हाथी’ चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ने का फैसला बताया।
बारां जिला प्रमुख के लिए संदीप शर्मा का नाम
नरेश मीणा ने जातिगत राजनीति के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनका फोकस सर्वसमाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने पर है। इसी क्रम में उन्होंने बारां जिला प्रमुख पद के लिए संदीप शर्मा को प्रत्याशी घोषित किया। अटरू से वंदना नागर सहित कई युवाओं को चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी है। बारां से पूर्व विधायक शिवनारायण नागर की पुत्री को भी चुनावी मैदान में आगे किए जाने की बात कही गई।
बूंदी जिले में आंदोलनकारी गिरराज गौतम को संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है। नरेश मीणा के मुताबिक जिले की प्रमुख पंचायत समितियों में भी मजबूत और स्थानीय चेहरों को प्रत्याशी बनाया जाएगा।
‘दलालों’ के बजाय पढ़े-लिखे युवाओं को टिकट
नरेश मीणा ने कहा कि पंचायती राज चुनावों में ऐसे युवाओं को अवसर दिया जाएगा जो शिक्षित हैं, बेरोजगार हैं और सामाजिक सरोकारों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि थानों और तहसीलों में दलाली करने वालों के बजाय एमए, बीएड जैसी डिग्रीधारी और सामाजिक रूप से सक्रिय युवाओं को टिकट में प्राथमिकता दी जाएगी।
किसान आंदोलन को बताया राजनीतिक बदलाव की शुरुआत
नरेश मीणा ने किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए दावा किया कि आंदोलन के दबाव के चलते किसानों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को फैसले लेने पड़े। उन्होंने यूरिया उपलब्धता का उदाहरण देते हुए कहा कि किसानों को अब 1350 रुपये में बिना अटैचमेंट यूरिया मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन के बाद अब लड़ाई का अगला चरण पंचायतों से शुरू होगा। उनका लक्ष्य पंचायत स्तर पर ‘जनता का राज’ स्थापित करना है।
नरेश मीणा के इस ऐलान ने बारां, बूंदी और देवली-उनियारा क्षेत्र की पंचायत चुनावी राजनीति में नए समीकरणों की संभावना पैदा कर दी है। अब देखने वाली बात होगी कि BSP के साथ यह तीसरा मोर्चा भाजपा और कांग्रेस के अलावा स्थानीय राजनीति में कितना प्रभाव पैदा कर पाता है।




















































