लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर | रूपनारायण सांवरिया
दूदू के गिदानी गांव में जन्मे वरिष्ठ इंजीनियर को मिला ‘जल प्रहरी सम्मान’, साहिबी नदी से लेकर दिल्ली के जलस्रोतों के संरक्षण में निभाई अहम भूमिका
जयपुर। राजस्थान के दूदू क्षेत्र के गिदानी गांव में जन्मे वरिष्ठ इंजीनियर एमसीटी परेवा को जल संरक्षण और जलवायु सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। भारत सरकार के जल मंत्री द्वारा उन्हें ‘जल प्रहरी सम्मान’ प्रदान किए जाने की खबर से खटीक समाज में खुशी की लहर है। सोशल मीडिया पर उन्हें बधाइयां देने का सिलसिला जारी है।
साहिबी नदी के संरक्षण से जल प्रबंधन तक उल्लेखनीय योगदान
इंजीनियर एमसीटी परेवा ने राजस्थान की साहिबी और लोनी नदियों सहित दिल्ली के तालाबों, नदियों और नालों के संरक्षण तथा जल संचयन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए। उनके प्रयासों में नदी संरक्षण, जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और भूजल स्तर में सुधार पर विशेष जोर रहा।
साहिबी नदी के सर्वेक्षण और नदी क्षेत्र में छोटे-छोटे मिट्टी के बांधों के निर्माण से जुड़े कार्यों को क्षेत्र में बाढ़ नियंत्रण के प्रयासों में महत्वपूर्ण बताया जाता है। इन प्रयासों से किसानों को सिंचाई और भूजल संबंधी लाभ मिलने के साथ जल संसाधनों के संरक्षण को भी बढ़ावा मिला।
कई बांधों के सुधार और पुनर्विकास में निभाई भूमिका
वर्ष 1977 में हुई अतिवृष्टि के बाद सांभर झील बाढ़ नियंत्रण बंध सहित छापरवाड़ा, बिंजोलाव, हेंगा, हींगोनिया और रामगढ़ के बांधों के सुधार एवं पुनर्विकास में भी परेवा का योगदान रहा। जल प्रबंधन से जुड़े इन कार्यों ने क्षेत्रीय जल संसाधनों के संरक्षण और बाढ़ नियंत्रण के प्रयासों को मजबूती देने में भूमिका निभाई।
आठ विभागों में दी सेवाएं, सेवानिवृत्ति के बाद भी सक्रिय
इंजीनियर एमसीटी परेवा ने अपने लंबे सेवाकाल में आठ अलग-अलग विभागों में कार्य किया। भारत सरकार में उच्च पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी वे इंडियन इंस्टीट्यूशन ऑफ टेक्निकल आर्बिट्रेटर्स के चेयरमैन के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। तकनीकी और सामाजिक क्षेत्रों में उनकी सक्रियता लगातार बनी हुई है।
सम्मान से समाज में उत्साह, जल संरक्षण का दिया संदेश
राष्ट्रीय सम्मान मिलने पर खटीक समाज के लोगों और शुभचिंतकों में उत्साह का माहौल है। सोशल मीडिया पर बधाइयों के जरिए लोग उनकी उपलब्धि पर खुशी जता रहे हैं।
सम्मान मिलने के अवसर पर जल संरक्षण का संदेश देते हुए परेवा ने कहा, “जल है तो जीवन है।” उनका यह संदेश जल संसाधनों को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी बचाने की जरूरत को रेखांकित करता है।




















































