राहुल की बैटिंग में दम नहीं, मोदी को कैसे करेंगे बोल्ड!-अठावले

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

 – सरकार आंदोलन से नहीं, वोट से बदलती है 

2029 में फिर मोदी सरकार की वापसी का दावा, क्रिकेट की तुकबंदी से विपक्ष पर निशाना; पिंक सिटी प्रेस क्लब के स्थापना दिवस पर पत्रकारों का सम्मान

जयपुर। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने जयपुर में अपने चिर-परिचित तुकबंदी वाले अंदाज में विपक्ष पर सियासी हमला बोला। पिंक सिटी प्रेस क्लब के 35वें स्थापना दिवस समारोह में उन्होंने सरकार के खिलाफ चल रहे धरने-प्रदर्शनों, राहुल गांधी और 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर बेबाक टिप्पणियां कीं। अठावले ने कहा कि सरकार आंदोलन से नहीं, वोट से बदलती है। राहुल गांधी पर क्रिकेट के अंदाज में तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि उनकी बैटिंग में इतना दम नहीं कि वे नरेंद्र मोदी को बोल्ड कर सकें। उनके इस बयान ने समारोह में राजनीतिक चर्चा को नया रंग दे दिया।

आंदोलन नहीं, वोट से बदलती है सरकार

सरकार के खिलाफ जारी धरने-प्रदर्शनों पर टिप्पणी करते हुए अठावले ने चुनावी लोकतंत्र का हवाला दिया। उनका कहना था कि सरकार बदलने का रास्ता चुनाव और मतदान से होकर गुजरता है, केवल आंदोलन से नहीं। इस बयान के जरिए उन्होंने विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों पर सवाल उठाए और मोदी सरकार के समर्थन में अपनी बात रखी।

राहुल गांधी की बैटिंग पर तंज, 2029 में विपक्ष का विकेट गिरने का दावा

अठावले ने क्रिकेट की पिच को सियासत से जोड़ते हुए राहुल गांधी पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की बैटिंग में दम नहीं है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बोल्ड कर सकें। साथ ही 2029 के लोकसभा चुनाव में मोदी सरकार की दोबारा वापसी का दावा किया। क्रिकेट की भाषा में की गई उनकी तुकबंदी ने राजनीतिक मुकाबले को बल्लेबाजी और विकेट के रूपक में पेश किया।

यह अठावले का राजनीतिक दावा है। 2029 के चुनाव का वास्तविक परिणाम मतदाता तय करेंगे।

मोदी सरकार की तारीफ, संविधान पर विपक्ष को घेरा

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की और संविधान के मुद्दे पर विपक्ष को निशाने पर लिया। उन्होंने अपनी राजनीतिक दलीलें रखते हुए केंद्र सरकार का समर्थन किया। उनके संबोधन में विपक्ष पर कटाक्ष और सरकार के पक्ष में तर्क प्रमुख रहे।

भजनलाल सरकार और दिया कुमारी की कार्यशैली की प्रशंसा

राजस्थान की राजनीति का जिक्र करते हुए अठावले ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कामकाज की तारीफ की। उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी की कार्यशैली की भी सराहना की। उनके वक्तव्य में केंद्र और राजस्थान की भाजपा सरकारों के प्रति समर्थन दिखाई दिया।

पत्रकारों का सम्मान

समारोह का उद्देश्य केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं था। पिंक सिटी प्रेस क्लब के तीन दिवसीय 35वें स्थापना दिवस कार्यक्रम के अंतिम दिन प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इस मौके पर टीवी 18 के भवानी सिंह देवड़ा, आज तक के शरत कुमार सिंह, समाचार प्लस के सुधांशु माथुर, भास्कर मदन कलाल,टीवी 9 ध्वज आर्य, समाचार जगत के  मिथलेश जैमनी, फर्स्ट इंडिया के भारत दीक्षित, भास्कर सुभाष बंसल, डिजिटल मीडिया से जितेश जेठानंदानी, न्यूज ढाणी डिजिटल चैनल के न्यूज एडिटर दिनेश सविता, पीके टाइम्स से दिनेश चंद शर्मा को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड , दैनिक नवज्योति से अरुण गुप्ता, कुंजेश पतसरिया, जितेंद्र सिंह , फोटो जनर्लिस्ट संतोष शर्मा, दीपक सैनी, पंकज खांडल, सुनील शर्मा , महेश आचार्य को पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मान प्रदान किया गया। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले, डिप्टी सीएम दीया कुमारी,  विधायक एवं पत्रकार गोपाल शर्मा, क्लब अध्यक्ष मुकेश मीणा और महासचिव रामकुमार शर्मा ने उन्हें शॉल एवं साफा पहनाकर स्मृति चिह्न भेंट किया।

वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण छाबड़ा को भी सम्मानित किया गया। राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने उन्हें सम्मान प्रदान किया। समारोह में पत्रकारिता जगत से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।

प्रेस क्लब की जरूरतों पर भी हुई चर्चा

अठावले ने पिंक सिटी प्रेस क्लब की आवश्यकताओं और संसाधनों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने क्लब के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त सहयोग का भरोसा दिलाया। इस तरह स्थापना दिवस समारोह में एक ओर पत्रकारिता के योगदान को सम्मान मिला, तो दूसरी ओर राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर बयानबाजी भी हुई।

पिंक सिटी प्रेस क्लब के मंच पर रामदास अठावले ने चुनाव, आंदोलन और विपक्ष की भूमिका को लेकर अपना राजनीतिक नजरिया रखा। उनका संदेश स्पष्ट था—सरकार बदलने का फैसला मतपेटी में होता है। राहुल गांधी पर क्रिकेट के जरिए किया गया कटाक्ष उनके संबोधन का सबसे चर्चित हिस्सा बना। हालांकि, 2029 में सत्ता किसके हाथ में होगी, इसका फैसला राजनीतिक दावों से नहीं, चुनावी नतीजों से होगा।

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