लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
तीन बार जैसलमेर की सियासत में जमाया मुकाम
नीरज मेहरा वरिष्ठ संवाददाता
जैसलमेर की राजनीति में छोटू सिंह भाटी का सफर सरकारी सेवा से शुरू होकर विधानसभा तक पहुंचने की कहानी है। करीब तीन दशक तक सरकारी सेवा में रहने के बाद उन्होंने चुनावी राजनीति में कदम रखा। भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर 2008 में पहली बार विधानसभा पहुंचे, 2013 में अपनी सीट बरकरार रखी, लेकिन 2018 में जैसलमेर की सीट कांग्रेस के खाते में चली गई। पांच साल बाद, 2023 में उन्होंने फिर वापसी की और तीसरी बार विधायक बने।
छोटू सिंह भाटी का जन्म 19 जनवरी 1955 को जैसलमेर जिले के पूनम नगर गांव में हुआ। उनके पिता का नाम करण सिंह भाटी और माता का नाम चांद कंवर बताया गया है।
उनकी शिक्षा जैसलमेर के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय से हुई। उपलब्ध चुनावी हलफनामे के अनुसार उन्होंने राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर से 1973-74 में दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की।
यही उनकी राजनीतिक यात्रा का अहम मोड़ बना। सरकारी सेवा से निकलकर उन्होंने सीधे विधानसभा चुनाव के मैदान में उतरने का फैसला किया।
2008: पहली बार चुनाव लड़ा, सुनीता भाटी को हराकर बने विधायक
छोटू सिंह भाटी ने 2008 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर जैसलमेर सीट से चुनाव लड़ा। सरकारी सेवा से राजनीति में आए भाटी के सामने कांग्रेस की सुनीता भाटी थीं।
इस मुकाबले में छोटू सिंह भाटी को 34,072 वोट मिले, जबकि सुनीता भाटी को 28,297 वोट प्राप्त हुए। उन्होंने 5,775 वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया।
यह जीत उनके राजनीतिक जीवन की पहली बड़ी उपलब्धि बनी। वे तेरहवीं राजस्थान विधानसभा के सदस्य बने।

2013: रूपाराम से कड़ा मुकाबला, 2,867 वोटों से जीते
2013 के विधानसभा चुनाव में छोटू सिंह भाटी के सामने कांग्रेस के रूपाराम थे। यह मुकाबला पिछले चुनाव की तुलना में अधिक करीबी रहा।
2013 का चुनाव परिणाम
छोटू सिंह भाटी भाजपा 78,790 रूपाराम, कांग्रेस 75,923 जीत का अंतर: 2,867 वोट
आधिकारिक चुनावी आंकड़ों के अनुसार, छोटू सिंह भाटी ने रूपाराम को 2,867 मतों से हराया और लगातार दूसरी बार विधायक बने। इस जीत के साथ उन्होंने चौदहवीं राजस्थान विधानसभा में भी अपनी जगह बनाई।
2018 के विधानसभा चुनाव में छोटू सिंह भाटी स्वयं उम्मीदवार नहीं थे। भाजपा ने इस बार सांग सिंह भाटी को मैदान में उतारा, जबकि कांग्रेस ने रूपाराम पर भरोसा जताया।
रूपाराम को 1,06,531 वोट मिले और भाजपा के सांग सिंह भाटी को 76,753 वोट प्राप्त हुए। कांग्रेस ने 29,778 वोटों के अंतर से जैसलमेर सीट जीत ली।इसलिए यह कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा कि 2018 में रूपाराम ने सीधे छोटू सिंह भाटी को हराया था। उस चुनाव में छोटू सिंह प्रत्याशी नहीं थे, लेकिन भाजपा की सीट कांग्रेस के हाथों चली गई।
2023: फिर आमने-सामने आए रूपाराम और छोटू सिंह
2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर छोटू सिंह भाटी को टिकट दिया। कांग्रेस की ओर से रूपाराम चुनाव मैदान में थे। इस तरह दोनों नेताओं के बीच 2013 के बाद फिर सीधा मुकाबला हुआ।
2023 का चुनाव परिणाम
छोटू सिंह भाटी भाजपा 1,04,636 रूपाराम, कांग्रेस 85,949 जीत का अंतर: 18,687 वोट
राजस्थान के आधिकारिक चुनाव परिणाम के अनुसार, छोटू सिंह भाटी ने रूपाराम को 18,687 मतों से पराजित किया। इसके साथ उन्होंने तीसरी बार जैसलमेर विधानसभा सीट जीती और सोलहवीं राजस्थान विधानसभा के सदस्य बने।
| वर्ष | प्रमुख प्रतिद्वंद्वी | परिणाम |
|---|---|---|
| 2008 | सुनीता भाटी, कांग्रेस | 5,775 वोटों से जीत |
| 2013 | रूपाराम, कांग्रेस | 2,867 वोटों से जीत |
| 2018 | चुनाव नहीं लड़ा | भाजपा के सांग सिंह भाटी हारे |
| 2023 | रूपाराम, कांग्रेस | 18,687 वोटों से जीत |
स्रोत: राजस्थान विधानसभा चुनाव के उपलब्ध परिणाम और निर्वाचन संबंधी अभिलेख।
छोटू सिंह भाटी की राजनीतिक यात्रा में तीन चुनावी जीत और 2018 का वह दौर महत्वपूर्ण है, जब जैसलमेर सीट भाजपा के हाथ से निकल गई थी। 2008 में पहली जीत, 2013 में करीबी मुकाबले में दोबारा विजय और 2023 में बड़े अंतर से वापसी उनके चुनावी सफर के प्रमुख पड़ाव हैं।
विधानसभा में वे पर्यावरण संबंधी समिति के सभापति भी रहे। राजस्थान विधानसभा के उपलब्ध विवरण के मुताबिक, उन्होंने 2014-15 में इस समिति के सभापति की जिम्मेदारी निभाई और अन्य विधानसभा समितियों में भी सदस्य के रूप में काम किया।
जैसलमेर जैसे विशाल रेगिस्तानी क्षेत्र में पानी, सड़क, ग्रामीण विकास और पर्यटन स्थानीय राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। भाटी ने अपने सार्वजनिक परिचय में भी इन विषयों और गरीब तथा पिछड़े लोगों की सेवा में रुचि का उल्लेख किया है।















































