लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
भजनलाल 40 दिनों में करवा रहे चुनाव: राजेंद्र राठौड़
राठौड़ का गहलोत पर पलटवार—‘मुद्दाविहीन कांग्रेस ओछी शब्दावली पर उतरी, प्रताप सिंह खाचरियावास का बयान कुंठा से भरा’
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जयपुर। (रूपनारायण सांवरिया)
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयानों पर पलटवार करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है। राठौड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए करीब 280 दिनों तक प्रदेश को चुनावी आचार संहिता में रखने वाले गहलोत आज मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ नीति के तहत पंचायत और निकाय चुनाव करीब 40 दिनों में कराने के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं।
राठौड़ ने कहा कि आश्चर्य की बात है कि गहलोत भाजपा सरकार से ढाई साल का रिपोर्ट कार्ड मांग रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा विधानसभा में कांग्रेस को चुनौती दे चुके हैं कि भाजपा सरकार अपना रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रख रही है, कांग्रेस भी अपनी सरकार का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखे।
सफाईकर्मी भर्ती को लेकर भी गहलोत पर निशाना
राजेंद्र राठौड़ ने सफाईकर्मियों की भर्ती को लेकर भी पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भजनलाल सरकार ने 24,752 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की है, जबकि पिछली कांग्रेस सरकार ने सफाईकर्मियों की भर्ती के नाम पर कर्मचारियों के साथ धोखा किया।
राठौड़ ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने आचार संहिता लागू होने से महज तीन दिन पहले भर्ती का विज्ञापन जारी किया था, लेकिन भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
उन्होंने गहलोत के मुख्यमंत्री के रोड शो पर सवाल उठाने को लेकर कहा कि यदि उन्हें रोड शो पर आपत्ति है तो उन्हें अपने विधानसभा क्षेत्र में रोड शो करके दिखाना चाहिए।
‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ से कम होगा आचार संहिता का असर
राठौड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की सोच देश के सामने रखी है। इसका उद्देश्य केवल चुनाव सुधार नहीं, बल्कि चुनाव में लगने वाले समय, संसाधनों और भारी खर्च को कम करना तथा बार-बार लागू होने वाली आचार संहिता के कारण प्रशासनिक कामकाज पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करना है।
उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव होने से सरकारी मशीनरी, पुलिस, प्रशासन, शिक्षक और अन्य सरकारी कर्मचारी चुनाव ड्यूटी में लग जाते हैं। इससे विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं की निरंतरता प्रभावित होती है।
राठौड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की सोच को राजस्थान में धरातल पर उतारने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने देश में पहली बार ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ की घोषणा की। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने उस समय इस व्यवस्था को लेकर कटाक्ष किया था।
राठौड़ ने कहा, “अब देख लो, आपके काकाजी ही करा रहे हैं।”
309 नगरीय निकायों के चुनाव एक साथ कराने का दावा
राठौड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री के प्रयासों से राजस्थान में पहली बार 309 नगरीय निकायों के चुनाव कार्यक्रम एक साथ घोषित हुए हैं और चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि नगरीय निकाय चुनाव के लिए 19 अगस्त 2026 को राज्य में आचार संहिता लागू हुई है, जो 17 सितंबर 2026 तक रहने की बात कही गई है। इसके बाद पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव भी नवंबर तक संपन्न होने की संभावना है।
राठौड़ के अनुसार, राजस्थान में मौजूदा चुनावी प्रक्रिया में कुल मिलाकर करीब 40 दिन आचार संहिता रहेगी, जबकि पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान करीब 280 दिनों तक अलग-अलग चुनावों के कारण आचार संहिता लागू रही थी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय 2019 से 2021 के बीच नगरीय निकाय चुनाव पांच मतदान चरणों और पंचायती राज चुनाव आठ चरणों में कराए गए थे। इस तरह कुल 13 चरणों में चुनाव हुए और करीब 18 महीने की अवधि में लगभग 280 दिन आचार संहिता लागू रही।
पिछली सरकार के दौरान आचार संहिता के आंकड़े गिनाए
राठौड़ ने पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान हुए चुनावों का विवरण देते हुए कहा कि 25 अक्टूबर से 27 नवंबर 2019 तक 49 नगर निकायों के चुनाव के दौरान 34 दिन आचार संहिता लागू रही।
इसके बाद 26 दिसंबर 2019 से 30 जनवरी 2020 तक पंच एवं सरपंच चुनाव के दौरान 36 दिन आचार संहिता रही। वर्ष 2020 में 3,848 ग्राम पंचायतों के चुनाव के दौरान 16 सितंबर से 10 अक्टूबर तक 25 दिन आचार संहिता लागू रही।
जयपुर, जोधपुर और कोटा के छह नगर निगमों के चुनाव के दौरान 13 अक्टूबर से 3 नवंबर तक 22 दिन आचार संहिता रही। वहीं 24 अक्टूबर से 11 दिसंबर तक 21 जिलों में जिला परिषद एवं पंचायत समिति चुनाव के दौरान 49 दिन आचार संहिता लागू रही।
राठौड़ के अनुसार, 5 जनवरी 2021 से 31 जनवरी 2021 तक 90 नगर निकायों के चुनाव के दौरान भी 27 दिन आचार संहिता लागू रही।
उन्होंने कहा कि लगातार चुनावी प्रक्रिया और आचार संहिता के कारण विकास कार्य प्रभावित हुए और इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ा।
राठौड़ ने कहा, “कांग्रेस जनता को चुनावों में उलझाती है, हम जनता को सुलझाते हैं।”
‘चुनाव कम, विकास ज्यादा’ का दिया नारा
भाजपा नेता ने कहा कि पिछली सरकार के समय लंबे समय तक चुनावी आचार संहिता का सिलसिला चलता रहा, जबकि भाजपा सरकार चाहती है कि चुनाव लोकतंत्र को मजबूत करें, लेकिन विकास को बाधित न करें।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ इसी सोच का प्रतीक है कि ‘बार-बार चुनाव नहीं, बार-बार विकास।’
राठौड़ ने कहा कि भाजपा सरकार का संकल्प है—‘आचार संहिता कम से कम, विकास ज्यादा से ज्यादा’ और ‘चुनाव में समय कम, राजस्थान के निर्माण में समय ज्यादा।’
शेखावाटी की हवेलियों को यूनेस्को सूची में शामिल होने पर जताई खुशी
राठौड़ ने कहा कि अलसीसर से सीकर तक की 100 वर्ष से अधिक पुरानी 14 हवेलियों का यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होना राजस्थान के लिए गौरव की बात है।
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल शेखावाटी ही नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान के लिए खुशी का विषय है। राठौड़ ने इसके लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को धन्यवाद देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने शेखावाटी की ऐतिहासिक हवेलियों को बचाने के लिए पहल की।
प्रताप सिंह खाचरियावास के बयान पर भी साधा निशाना
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए राठौड़ ने कांग्रेस के पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि खाचरियावास का बयान राजस्थान की परंपरा, लोकलाज और लोक संबंधों के विपरीत है।
राठौड़ ने इसे उनकी ‘कुंठा’ और कांग्रेस के राजनीतिक चरित्र का परिचायक बताया। उन्होंने कहा कि राजनीति में नीतियों और फैसलों की आलोचना होनी चाहिए, लेकिन किसी व्यक्ति के निजी जीवन पर टिप्पणी करना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक संवैधानिक संस्था भी है और राजनीतिक मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए।
राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस के नेताओं को व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचना चाहिए और जनता के मुद्दों तथा नीतियों पर बहस करनी चाहिए।