वाल्मीकि, नायक,भील और मेघवालों के बाल नहीं काटने पर पुलिस ने जारी किए निर्देश

0
194
- Advertisement -

जयपुर। आजादी के 72 साल बाद में देश के कई ऐसे इलाक है जहां पर सार्वजनिक स्थानों पर अनुसूचित जाति ,अनुसूचित जनजाति के लोगों के साथ भेदभाव होना आम बात है । ऐसा ही मामला है सिरोही जिले का जहां गांव में आज भी सैलून की दुकानों पर वाल्मीकि, मेघवाल, भील, नायक और अनुसूचित जाति, जनजाति में आने वाली अन्य जातियों के लोगों के बाल काटने से मना कर दिया जाता है। जबकि उन्हीं सैलून की दुकानों पर दूसरी जातियों के लोगों के बाल काटे जाते हैं। यह एक तरह से मानवाअधिकार के खिलाफ है। इसको लेकर कुछ लोगों ने मानवाधिकार आयोग को शिकायत की। इस पर पुलिस महानिरीक्षक किशन सहाय ने मानव अधिकार राजस्थान सरकार जयपुर ने एक आदेश जारी कर कहा कि यदि कहीं भी इस तरह का भेदभाव होता है, या किसी भी व्यक्ति या व्यक्ति को जातीय, धर्म के आधार पर सार्वजनिक स्थल पर जहां पर दूसरे लोगों के साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं होता है और वहां यदि किसी के साथ इस तरह का बर्ताव हो रहा है तो यह गलत है और मानवाधिकार के खिलाफ है ।ऐसा करना कानून भी गलत है, ऐसे करने पर पुलिस कार्रवाई भी करेगी और उन्हें सजा भी दिलाएगी। पुलिस महानिरीक्षक किशन सहाय का कहना है कि आधुनिकता के इस दौर में इस तरह की शिकायत आती है, तो काफी गंभीर है और सरकार इसको गंभीरता से ले रही है और इस तरह के मामले आने पर शक्ति से निपटेगी और जो कोई भी जाति का आधार पर भेदभाव करेगा ,उसके खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई की जाएगी इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here