क्या तृणमूल कांग्रेस में होने वाली है बड़ी टूट? कई सांसदों के भाजपा के संपर्क में होने की अटकलें

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

नितिन मेहरा वरिष्ठ संवाददाता, (राजस्थान)

पश्चिम बंगाल,कोलकाता। बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर भारी हलचल शुरू हो गई है। सियासी हलकों में यह चर्चा बेहद तेज है कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर एक बड़ा अंदरूनी संकट गहरा रहा है। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि लोकसभा में तृणमूल के कई सांसद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में हैं और जल्द ही पार्टी में एक बड़ा दलबदल देखने को मिल सकता है।

क्या है सांसदों का पूरा गणित?
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 29 सांसदों में से करीब 12 सांसदों का एक गुट भाजपा में शामिल होने या उन्हें बाहर से समर्थन देने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसके अलावा, पांच से छह अन्य सांसदों के साथ भी पर्दे के पीछे बातचीत चलने की खबरें आ रही हैं।

* दलबदल कानून की चुनौती: तकनीकी रूप से दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) की कार्रवाई से बचने के लिए किसी भी गुट को अलग होने के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों के समर्थन की जरूरत होती है। यही वजह है कि रणनीति के तहत कम से कम 19 से 20 सांसदों को एक साथ लाने की कोशिशें की जा रही हैं ताकि संसद में उनकी सदस्यता पर कोई आंच न आए।

ममता और अभिषेक बनर्जी के करीबियों पर नजर

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि असंतुष्टों की सूची में कथित तौर पर तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के बेहद करीबी माने जाने वाले कुछ बड़े चेहरे भी शामिल हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तृणमूल के भीतर ‘आई-पैक’ (I-PAC) की कार्यशैली और संगठन के आंतरिक फैसलों को लेकर कुछ समय से जो असंतोष पनप रहा था, यह संभावित टूट उसी का नतीजा हो सकती है।

भाजपा के लिए क्यों अहम है यह समीकरण?
मौजूदा लोकसभा में भाजपा के पास अपने दम पर 240 सीटें हैं और केंद्र सरकार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगी दलों के समर्थन के भरोसे चल रही है। ऐसे में यदि बंगाल से तृणमूल के सांसदों का एक बड़ा धड़ा भाजपा के पाले में आता है, तो सदन में पार्टी की अपनी व्यक्तिगत ताकत काफी मजबूत हो जाएगी। इससे सरकार की सहयोगी दलों पर निर्भरता भी कम होगी। बताया जा रहा है कि लोकसभा के साथ-साथ भाजपा की नजर राज्यसभा में मौजूद तृणमूल सांसदों पर भी टिकी है।

नेतृत्व हुआ सतर्क, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
सूत्रों का दावा है कि तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को भी इस संभावित बगावत की भनक लग चुकी है। इसके बाद से ही डैमेज कंट्रोल और सांसदों को एकजुट रखने की कोशिशें पर्दे के पीछे शुरू कर दी गई हैं। हालांकि, इन तमाम राजनीतिक अटकलों और दावों पर अभी तक न तो तृणमूल कांग्रेस और न ही भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है।

 

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