डॉ किरोडी लाल मीणा ने मंत्री पद से दिया इस्तीफा

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डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा का इस्तीफा मंजूर नहीं होगा? विभाग में होगा बदलाव

जयपुर। लक टुडे विशेष संवाददाता राजस्थान के कृषि मंत्री डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने आज मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है ।उन्होंने इस्तीफा राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा को सौपा है । वह पिछले दो दिनों से दिल्ली में थे। उनकी राष्ट्रीय स्तर पर कई नेताओं से मुलाकात हुई। वह दिल्ली में राष्ट्रीय महामंत्री से मुलाकात करने गए थे। लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हुई। उन्होंने जयपुर पहुंचते ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को मंत्री पद से इस्तीफा सौंप दिया। हालांकि इस दौरान डॉक्टर मीणा का कहना था कि उनकी सरकार से सरकार के मुखिया भजनलाल शर्मा से या संगठन से किसी तरह के नाराजगी भी नहीं है । लेकिन उन्होंने चुनाव के दौरान सार्वजनिक तौर पर मंच से इस बात का ऐलान किया था यदि पूर्वी राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी को हार मिलती है, तो वह मंत्री पद पर नहीं रहेंगे । इसीलिए वह अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं । क्योंकि वह पूर्वी राजस्थान में भाजपा को जीत दिलाने में असमर्थ रहे ।

किरोड़ी का इस्तीफा नहीं होगा मंजूर

हालांकि डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा के इस्तीफा पर फैसला पार्टी के राष्ट्रीय नेता ही करेंगे । माना जा रहा है कि डॉक्टर किरोडी लाल मीणा का इस्तीफा मंजूर नहीं होगा। क्योंकि यदि उनका इस्तीफा मंजूर होता है तो इसकी लपटे पूरे देश में जाती है। जिन भी इलाकों में भारतीय जनता पार्टी को हार सामना करना पड़ा है, वहां के नेताओं और मंत्रियों पर इसकी गाज पड़ेगी । इसीलिए राष्ट्रीय स्तर पर नेता किरोड़ी का इस्तीफा मंजूर नहीं करेंगे । इस्तीफा देकर मीणा ने दौहरा काम कर लिया। इस्तीफा देकर उन्होंने जनता से किया वायदा भी पूरा कर दिया और अब पार्टी उनका इस्तीफा मंजूर नहीं करती है, तो वह मंत्री बने रहेंगे। हो सकता है उनका विभाग बदल दिया जाए, उनकी शिक्षा मंत्री दिलावर से तबादलों को लेकर टकराव की बात सामने आई थी। लेकिन उन्होंने इससे इनकार किया है कि उनका किसी को टकराव नहीं है। यह तो जनता के बीच वायदा किया था उसी निभाने के लिए इस्तीफा दिया है । पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व तय करेगा कि उन्हें पद पर बने रहना है, या उनका इस्तीफा स्वीकार किया जाता है ।आपको बता दें कि डॉक्टर तीखे तेवरों के लिए जाने जाते हैं। इसलिए उनका इस्तीफा स्वीकार करके भारतीय जनता पार्टी आने वाले विधानसभा उपचुनाव में किसी भी तरह का जोखिम उठाना नहीं चाहेगी । यदि उनका इस्तीफा मंजूर होता है तो वह पूरे 5 साल भजनलाल सरकार को भी किसी ने किसी मुद्दे पर कटघरे में खड़ा करते रहेंगे। दूसरा विपक्ष को भी एक बड़ा मुद्दा मिल जाएगा ,जिसको लेकर विपक्ष लगातार सरकार का घेराव करेगी। इसलिए सरकार भी नहीं चाहती कि फिलहाल उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया जाए।

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