क्या अमित शाह दूर करेंगे भाजपा नेताओं की धड़े बंदी?

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जयपुर। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के बीच की गुटबाजी किसी से छिपी नहीं है। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं बीजेपी के स्वयंभू मुख्यमंत्री पद के दावेदार अलग अलग तरीके से भाजपा को खींचने का काम कर रहे हैं । यह गुटबाजी और धड़े-बंदी जग जाहिर है । भाजपा में कई नेता ऐसे हैं जो अपने आप को मुख्यमंत्री पद का दावेदार मानकर बैठे हैं और वह अभी से मुख्यमंत्री की तरह ही व्यवहार करने लगे हैं ।यहां तक कि प्रदेश में उनके अपने समर्थक है और उनके समर्थक पार्टी को छोड़कर सिर्फ अपने नेता का ही प्रचार प्रसार करते हैं । सोशल मीडिया पर भी यह साफ तौर पर देखा जा सकता है।

भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी में गुटबाजी को देखते हुए कल अमित शाह जयपुर दौरे पर आ रहे हैं और जयपुर दौरे पर अमित शाह बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं से प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के नेताओं से मुलाकात करेंगे। तो क्या उम्मीद की जानी चाहिए भाजपा नेताओं के बीच की गुटबाजी को दूर करेंगे या फिर इस खाई को और बढ़ने का इंतजार करेंगे ? क्योंकि अभी हाल ही में राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक के बाद उम्मीद लगाई जा रही थी कि भाजपा नेताओं की गुटबाजी कुछ हद तक दूर होगी। लेकिन जब उदयपुर में नूपुर शर्मा का बयान का समर्थन करने पर कन्हैया लाल साहू की हत्या हुई तो उसके बाद जब भाजपा नेताओं ने वहां पर एकजुट होकर जाने की बजाए, अपने अपने हिसाब से और अपने अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचे ।

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अपने नजदीकी लोगों के साथ पहुंची और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत उन्होंने अलग से सांत्वना देने पहुँचे। प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया भी वहां पहुंचे और उनके साथ भी पार्टी के दूसरे नेता भी गए। भारतीय जनता पार्टी के नेता पहुंचे और उनके साथ उदयपुर में एक मृतक परिवार के घर पर सांत्वना देने जाते समय भी भाजपा के लोगों की गुटबाजी साफ तौर पर देखी गई। यह विशेष मुद्दा भी बना । सोशल मीडिया पर भी ट्रोल हुआ और समाचार पत्रों ने भी इसी को हवा दी। जबकि 2 दिन पहले ही भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में पार्टी की एकजुटता था संदेश दिया गया था। ऐसे में साफ है कि कहीं न कहीं भाजपा नेताओं में गुटबाजी चरम पर है और नेता एक दूसरे को देखना तक नहीं चाहते ।सब एक दूसरे की सेवा में जुटे हैं ,यही कारण है कि राजस्थान में पिछले 4 साल में जितने भी उपचुनाव हुए हैं उन सभी में एक उपचुनाव को छोड़कर अन्य चुनाव में कांग्रेस पार्टी चुनाव जीती है। नेताओं की लड़ाई में मरण आम कार्यकर्ता का हो रहा है। वह किसनेता के कार्यक्रम में जाए, किसके बयान का विरोध करें और किस का समर्थन करें ।अब देखना यह है कि जब अमित शाह जयपुर आ रहे हैं तो क्या वह इन नेताओं के आपसी झगड़े को दूर कर पाते हैं, या फिर दे इस धड़े बंदी को और बढ़ने का इंतजार करते हैं। आपको बता दें कि राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी में प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ,पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ,लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ,अर्जुन राम मेघवाल , डॉ किरोड़ी लाल मीणा और कभी कभार सुनील बंसल ,राजेंद्र सिंह राठौड़ का नाम भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में लिया जाता है। भाजपा का कार्यकर्ता अभी शांत है। लेकिन फिर भी वह चाहता है कि भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व नेताओं की गुटबाजी को दूर करें ।उनके बीच चल रही लड़ाई और भगदड़ को दूर करें। जिससे भारतीय जनता पार्टी अमित शाह के दौरे से भी यही उम्मीद की जानी चाहिए कि वह राजस्थान भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के बीच दूरियों को दूर करेंगे।

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