लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
रिपोर्टर – नितिन मेहरा
अजमेर। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने भारतीय संविधान के सिंधी (देवनागरी और फारसी लिपि) में अनुवाद के विमोचन को ऐतिहासिक बताते हुए इसे देशभर के करीब एक करोड़ सिंधी भाषियों के लिए “स्वर्णिम क्षण” करार दिया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1967 में संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल होने के बाद आज अपनी मातृभाषा में संविधान को देखना हर सिंधी के लिए गर्व का विषय है।
प्रधानमंत्री और मेघवाल का जताया आभार
विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा आयोजित समारोह में देवनानी ने नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि देवनागरी लिपि में पहली बार और फारसी लिपि में दूसरी बार संविधान का प्रकाशन सिंधी समाज को वैश्विक पहचान दिलाएगा।
सिंधी भाषा की समृद्धि पर प्रकाश
देवनानी ने कहा कि सिंधी भाषा अत्यंत समृद्ध और वैज्ञानिक है, जिसकी वर्णमाला में 52 अक्षर हैं—जो हिंदी और अंग्रेजी से भी अधिक हैं। उन्होंने कहा, “हमारे राष्ट्रगान में ‘सिंध’ शब्द का होना इस क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास का प्रमाण है।”
विभाजन की पीड़ा और समाज का योगदान
उन्होंने 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस घोषित करने के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि यह विभाजन के दर्द को झेलने वाले लोगों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
देवनानी ने कहा कि सिंधी समाज ने खुद को कभी “शरणार्थी” नहीं माना, बल्कि अपनी मेहनत से “पुरुषार्थी” बनकर देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने बताया कि देश की लगभग 1% आबादी होने के बावजूद यह समाज आयकर में 24% तक योगदान दे रहा है।
‘सिंध’ के भारत से जुड़ाव पर बयान
देवनानी ने कहा कि सांस्कृतिक रूप से सिंध हमेशा भारत की आत्मा से जुड़ा रहा है और भविष्य में इसके पुनः भारत का अभिन्न अंग बनने की आशा व्यक्त की।
इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, सांसद शंकर लालवानी सहित देशभर से आए सिंधी समाज के प्रतिनिधि एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।