लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
राजकीय महाविद्यालय आबूरोड के बाहर धरना जारी
आबूरोड (सिरोही)।
राजकीय महाविद्यालय आबूरोड में विद्यार्थियों की समस्याओं एवं महाविद्यालय के विकास से जुड़ी 32 सूत्रीय मांगों को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने आंदोलन शुरू कर दिया है। परिषद कार्यकर्ताओं ने महाविद्यालय प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए कॉलेज के मुख्य द्वार के बाहर धरना शुरू किया।
एबीवीपी का आरोप है कि लंबे समय से विद्यार्थियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों की अनदेखी की जा रही है, जिसके चलते संगठन को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
विद्यार्थियों ने की समस्याओं के समाधान की मांग
एबीवीपी आबूरोड इकाई के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं कार्यकर्ता महाविद्यालय परिसर के बाहर एकत्रित हुए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने महाविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी 32 सूत्रीय मांगों के शीघ्र समाधान की मांग उठाई।
परिषद पदाधिकारियों का कहना है कि महाविद्यालय में आधारभूत सुविधाओं की कमी, शैक्षणिक व्यवस्थाओं में सुधार तथा विद्यार्थियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं, जिससे छात्र-छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पूर्व में भी सौंपे गए थे ज्ञापन
एबीवीपी नेताओं ने बताया कि इन समस्याओं को लेकर पहले भी कई बार महाविद्यालय प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन दिए गए थे। इसके अलावा विभिन्न स्तरों पर वार्ता भी की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से विद्यार्थियों में नाराजगी है।
परिषद का कहना है कि विद्यार्थियों के हितों की रक्षा और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन शुरू किया गया है।
मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन होगा तेज
प्रदर्शन के दौरान एबीवीपी पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
फिलहाल महाविद्यालय के मुख्य द्वार के बाहर धरना जारी है और बड़ी संख्या में विद्यार्थी परिषद कार्यकर्ता अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं।
एबीवीपी ने महाविद्यालय प्रशासन और उच्च शिक्षा विभाग से विद्यार्थियों के हितों को प्राथमिकता देते हुए 32 सूत्रीय मांगों का शीघ्र निराकरण करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि यह आंदोलन विद्यार्थियों के अधिकारों, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और महाविद्यालय के समग्र विकास के लिए किया जा रहा है तथा मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा।
