लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
जयपुर
राजस्थान के मसालों की वैश्विक पहचान को और सशक्त बनाने के उद्देश्य से आज जयपुर के बिड़ला सभागार में राजस्थान मसाला कॉन्क्लेव – 2025 का आयोजन हुआ। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कार्यक्रम में कहा कि राजस्थान मसालों के उत्पादन और व्यापार का प्रमुख केंद्र होने के साथ ही इसकी समृद्ध परंपरा के लिए विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है। उन्होंने घोषणा की कि अब राज्य में हर वर्ष मसाला कॉन्क्लेव आयोजित किया जाएगा ताकि मसाला उत्पादकों और व्यापारियों को नई संभावनाओं तथा वैश्विक मंच उपलब्ध कराया जा सके। इसके लिए एक समिति का गठन भी किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में मसाला प्रसंस्करण उद्योग की अपार संभावनाएं हैं। राजस्थान जीरा उत्पादन में देश में पहले, मैथी व सौंफ उत्पादन में दूसरे और धनिया व अजवाइन उत्पादन में तीसरे स्थान पर है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान से मसाला उद्योग को मजबूती मिली है। केंद्र और राज्य सरकारें कृषि उत्पादों की प्रसंस्करण व विपणन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए योजनाएं चला रही हैं, जिससे किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सके।
कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटर से किसानों को लाभ
शर्मा ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें राजस्थान में आठ सेंटर बनाए जा रहे हैं। इन सेंटरों में कृषि उपज की जांच, छंटाई, ग्रेडिंग, गोदाम, कोल्ड स्टोरेज और प्रसंस्करण की सुविधा दी जाएगी, जिससे किसान अपने उत्पादों को बेहतर मूल्य पर बेच सकेंगे।
ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट की घोषणा
कृषि प्रसंस्करण, व्यवसाय और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए राज्य में 1,497 औद्योगिक इकाइयों को 630 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया है। करीब 3,504 करोड़ रुपये का निवेश हो चुका है। राइजिंग राजस्थान समिट के तहत 44 हजार करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। साथ ही, अगले वर्ष की शुरुआत में ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट आयोजित की जाएगी ताकि निवेशकों को आधुनिक तकनीक व अवसर उपलब्ध कराए जा सकें।
जीआई टैग से मसालों को वैश्विक पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के मसालों को विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए प्रमुख उत्पादों को जीआई टैग दिलवाया जा रहा है, जिससे किसानों को मूल्य संवर्धन का लाभ मिलेगा। साथ ही, राज्य में एफपीओ नीति लागू की गई है और अब तक 913 कृषक उत्पादक संगठनों का पंजीकरण किया जा चुका है।
फूड पार्क और मंडी विकास को प्राथमिकता
राज्य के 39 स्थानों पर फूड पार्क स्थापित किए जा रहे हैं ताकि प्रसंस्करण सुविधाएं एक ही स्थान पर मिल सकें। मंडी यार्डों के विकास के साथ संपर्क सड़कों का निर्माण भी किया जा रहा है। खरीफ 2025 में लगभग 163 लाख फसल बीमा पॉलिसी सृजित की जा चुकी हैं और 148 लाख पात्र किसानों को 3,912 करोड़ रुपये का क्लेम भुगतान किया गया है।
शिलान्यास व लोकार्पण
कार्यक्रम में कृषि उपज मंडी समिति आंगणवा (जोधपुर) और सोहेला (टोंक) के इन्क्यूबेशन सेंटर का वर्चुअल लोकार्पण किया गया। आंगणवा में मसालों, दालों व सब्जियों के प्रसंस्करण हेतु दो प्रोसेसिंग लाइन, कोल्ड स्टोरेज व फूड टेस्टिंग लैब स्थापित की गई है। सोहेला में तेल मिल, फल व सब्जी प्रसंस्करण इकाई, टमाटर व मिर्च पल्प यूनिट सहित फूड टेस्टिंग लैब शुरू की गई है। इसके अतिरिक्त सोनवा (टोंक) फूड पार्क का लोकार्पण भी किया गया।
किसानों और उद्यमियों को प्रोत्साहन
कार्यक्रम में नए एफपीओ का पंजीयन, पीएम एफएमई योजना के तहत लाभार्थियों को अनुदान, श्रम सम्मान कार्ड का विमोचन, राज-स्पाइस ऐप का लोकार्पण और विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत चेक वितरित किए गए। साथ ही, उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों व मसाला प्रदर्शनी में चयनित स्टॉलों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।
सड़क और मंडी विकास कार्यों की शुरुआत
शर्मा ने 143.37 करोड़ रुपये के सड़क एवं मंडी विकास कार्यों का शिलान्यास और 83.49 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण किया। कार्यक्रम के दौरान मसाला प्रसंस्करण और निर्यात पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।
इस अवसर पर सहकारिता राज्य मंत्री गौतम कुमार दक, कृषि सचिव राजन विशाल, बड़ी संख्या में कृषक, मसाला व्यापारी और कृषि विशेषज्ञ उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने स्टॉलों का अवलोकन कर महिलाओं से बातचीत की और किसानों के कल्याण हेतु सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।