सुपर अल नीनो 2026 का खतरा: भारत में सूखा, भीषण गर्मी और बाढ़ का डबल अटैक

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

 1877 से भी गंभीर संकट की आशंका

नितिन मेहरा, वरिष्ठ संवाददाता (राजस्थान)

नई दिल्ली: प्रशांत महासागर में तेजी से बढ़ती गर्म समुद्री परिस्थितियों ने भारत सहित दुनिया के कई देशों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि साल 2026 में विकसित हो रहा ‘सुपर अल नीनो’ (Super El Niño) भारत में मौसम का बेहद खतरनाक और असामान्य पैटर्न पैदा कर सकता है। इसके चलते देश के कई हिस्सों में सूखा, भीषण गर्मी और अचानक बाढ़ जैसी चरम स्थितियां देखने को मिल सकती हैं।

अमेरिकी मौसम एजेंसी National Oceanic and Atmospheric Administration (NOAA) और India Meteorological Department (IMD) के शुरुआती विश्लेषणों के अनुसार, प्रशांत महासागर के कई हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 3 डिग्री सेल्सियस तक अधिक रहने की संभावना जताई गई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह स्थिति दक्षिण-पश्चिम मानसून को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि यह पैटर्न मजबूत बना रहता है तो 2026 का मानसून सामान्य से कमजोर हो सकता है और देशभर में बारिश का वितरण बेहद असंतुलित रहेगा।

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उत्तर और मध्य भारत में सूखे का खतरा

पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे कृषि प्रधान राज्यों में पहले से ही तापमान सामान्य से अधिक रिकॉर्ड किया जा रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगस्त और सितंबर के दौरान कई इलाकों में बारिश में भारी कमी आ सकती है, जिससे सूखे जैसे हालात बन सकते हैं।

लगातार लू चलने से भूजल स्तर गिर सकता है और सिंचाई पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव खरीफ फसलों पर देखने को मिलेगा।

दक्षिण और तटीय भारत में फ्लैश फ्लड का खतरा

दूसरी ओर, तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में कम समय में अत्यधिक बारिश होने की आशंका जताई जा रही है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून का असंतुलित वितरण शहरी इलाकों में अचानक बाढ़ और जलभराव की स्थिति पैदा कर सकता है।

विशेषकर चेन्नई और केरल के निचले इलाकों में फ्लैश फ्लड का खतरा अधिक माना जा रहा है।https://images.openai.com/static-rsc-4/-qCq-STLDKKJrZO3nKklcpDoHRvChOTl9CyijiZbDGqxnNKfVO9h9cTzkTwvDogIfzaGExrc_PssmKyeqHAcBntdFc6SI5dp9VKveeIS-4qEzIP4hc8pOcFKU1YE5K7-lrmLz9bIp9umilwQFS54e4__eyKXyV6135Xe94xuodSHWbBSjl2YG3shl6COYVlu?purpose=fullsize


कृषि और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर

फसलों की बर्बादी से बढ़ सकती है महंगाई

मौसम में इस बड़े बदलाव का सबसे ज्यादा असर खेती पर पड़ने की आशंका है। धान, दालें, गन्ना और तिलहन जैसी खरीफ फसलें पानी की कमी से प्रभावित हो सकती हैं। यदि उत्पादन घटता है तो खाद्यान्न, सब्जियों और खाद्य तेलों की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव

ग्रामीण भारत की आय का बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर करता है। फसल खराब होने से ग्रामीण बाजारों में मांग घट सकती है, जिसका असर एफएमसीजी और उपभोक्ता कंपनियों के कारोबार पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार शेयर बाजार में भी अस्थिरता बढ़ सकती है।


जल और बिजली संकट की आशंका

देश के कई बड़े जलाशयों और बांधों का जलस्तर प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है। यदि मानसून कमजोर रहता है तो कई राज्यों में पीने के पानी का संकट गहरा सकता है।

इसके अलावा पनबिजली उत्पादन घटने से बिजली ग्रिड पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे कई राज्यों में बिजली कटौती की स्थिति बन सकती है।

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1877 जैसा संकट फिर लौटेगा?

इतिहासकारों के अनुसार 1877-78 के सुपर अल नीनो ने भारत में भीषण अकाल पैदा किया था, जिसमें लाखों लोगों की मौत हुई थी। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि आज का भारत तकनीक, खाद्यान्न भंडारण और आपदा प्रबंधन के मामले में कहीं अधिक मजबूत स्थिति में है।


राहत की उम्मीद भी मौजूद

आधुनिक तकनीक और अर्ली वार्निंग सिस्टम

आज भारत के पास एडवांस सैटेलाइट मॉनिटरिंग और मौसम पूर्वानुमान प्रणाली मौजूद है। India Meteorological Department लगातार मौसम पर नजर बनाए हुए है और समय-समय पर चेतावनी जारी कर रहा है।

खाद्यान्न का मजबूत भंडार

सरकार के पास अनाज का पर्याप्त बफर स्टॉक उपलब्ध है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते रणनीतिक फैसले लेकर खाद्य संकट को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

पॉजिटिव IOD से राहत की संभावना

वैज्ञानिकों के अनुसार हिंद महासागर में विकसित हो रहा पॉजिटिव इंडियन ओशन डिपोल (IOD) कुछ हद तक अल नीनो के प्रभाव को संतुलित कर सकता है। इससे भारत के कुछ हिस्सों में अतिरिक्त नमी पहुंच सकती है और मानसून को आंशिक समर्थन मिल सकता है।


विशेषज्ञों की सलाह

विशेषज्ञों ने राज्यों को अभी से जल संरक्षण, फसल प्रबंधन और आपदा तैयारियों को मजबूत करने की सलाह दी है। किसानों को मौसम आधारित खेती अपनाने और कम पानी वाली फसलों की ओर ध्यान देने की अपील की गई है।

यदि सुपर अल नीनो की स्थिति और मजबूत होती है, तो 2026 भारत के लिए जलवायु चुनौतियों का सबसे कठिन वर्षों में से एक साबित

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