पंचगव्य चिकित्सा भारतीय परंपरा और आयुर्वेद का महत्वपूर्ण अंग : जोराराम कुमावत

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

जोधपुर। जिले के मोकलावास स्थित गौ संवर्द्धन आश्रम में सोमवार को एक ऐतिहासिक पहल की शुरुआत हुई। पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने देश के प्रथम पंचगव्य चिकित्सा पाठ्यक्रम की कक्षाओं का विधिवत शुभारंभ किया।

मंत्री कुमावत ने इस अवसर पर कहा कि पंचगव्य चिकित्सा भारतीय परंपरा और आयुर्वेद का महत्वपूर्ण अंग है, जो स्वास्थ्य क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा करेगा। उन्होंने इस पहल को ग्रामीण विकास, स्वदेशी चिकित्सा पद्धति के प्रसार और युवाओं के लिए रोजगार सृजन की दिशा में अहम कदम बताया।

यह पाठ्यक्रम डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर एवं लक्ष्य पर्यावरण एवं जन कल्याण संस्था के संयुक्त तत्वावधान में संचालित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत पंचगव्य के सिद्धांत, औषधि निर्माण, रोगों के उपचार, पंचकर्म पद्धतियां, मानव स्वास्थ्य एवं जीवनशैली के साथ-साथ गौ-स्वास्थ्य, गौशाला प्रबंधन और गो-उत्पाद आधारित स्वरोजगार का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान मंत्री कुमावत ने आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाओं को भी सम्मानित किया। संस्था के सचिव राकेश निहाल ने मंत्री को आश्रम का भ्रमण कराते हुए विभिन्न प्रकल्पों की जानकारी दी। मंत्री ने तीन पीढ़ियों वाली गायों एवं नंदी को देखकर संतोष व्यक्त किया और गौवंश को ग्वार लापसी खिलाई।

इस अवसर पर पुष्प जैन, घनश्याम ओझा, महावीर चोपड़ा, राजेंद्र पालीवाल सहित कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। साथ ही विश्वविद्यालय के कुलपति वैद्य गोविंद शुक्ला भी विशेष रूप से मौजूद रहे।

कार्यक्रम के अंत में गौ संवर्धन आश्रम के अध्यक्ष नंदलाल भाटी ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

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