लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
बढ़ती हिंसा, सैकड़ों मौतें; इंटरनेट बंद, अंतरराष्ट्रीय चिंता गहराई
तेहरान।
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन लगातार उग्र होते जा रहे हैं। आर्थिक संकट, महंगाई और राजनीतिक असंतोष के चलते शुरू हुआ यह आंदोलन अब देशव्यापी रूप ले चुका है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक 600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ईरानी सरकार ने कई शहरों में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दी हैं, जिससे सूचनाओं के आदान-प्रदान पर रोक लग गई है। सुरक्षा बलों की सख्ती के कारण हालात और तनावपूर्ण बने हुए हैं।
विरोध की वजह
विशेषज्ञों के अनुसार विरोध की मुख्य वजह तेजी से गिरती अर्थव्यवस्था, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और ईरानी मुद्रा रियल का अवमूल्यन है। शुरुआत में आर्थिक मांगों तक सीमित यह आंदोलन अब राजनीतिक सुधारों और सरकार की जवाबदेही की मांग में बदल चुका है।
सरकार का सख्त रुख
ईरानी प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को “देश विरोधी ताकतें” करार देते हुए कार्रवाई तेज कर दी है। राजधानी तेहरान समेत कई प्रमुख शहरों में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती है। वहीं, सरकार समर्थक रैलियों का आयोजन कर यह दिखाने की कोशिश की जा रही है कि सत्ता को जनसमर्थन प्राप्त है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
ईरान में बिगड़ते हालात पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने चिंता जताई है। अमेरिका ने अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने की चेतावनी जारी की है। मानवाधिकार संगठनों और कई वैश्विक नेताओं ने ईरानी सरकार से संयम बरतने और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों की रक्षा करने की अपील की है।
महिलाओं के अधिकारों पर चिंता
नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला युसुफज़ई सहित कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियों ने ईरान में महिलाओं की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के हनन पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि मौजूदा हालात ईरान में अभिव्यक्ति की आज़ादी के लिए गंभीर खतरा हैं।
आगे क्या?
विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच संवाद की कोई ठोस पहल नहीं हुई, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। बढ़ती हिंसा और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच ईरान एक गंभीर राजनीतिक और सामाजिक संकट के दौर से गुजर रहा है।













































