लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
SIR विवाद के बीच 2006 के मामले की विजिलेंस जांच फिर खुली
SIR को लेकर इस्तीफे की मांग के बीच केरल में PWD सचिव रहते कथित अनियमितताओं की जांच दोबारा शुरू; मलेशियाई इंजीनियर की मौत से जुड़ा है मामला
राजस्थान से वरिष्ठ संवाददाता : नितिन मेहरा
नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। एक तरफ मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर विपक्ष सवाल उठा रहा है और उनके इस्तीफे की मांग को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं। दूसरी तरफ केरल सरकार ने ज्ञानेश कुमार के वर्ष 2006 के कार्यकाल से जुड़े एक पुराने मामले की विजिलेंस जांच दोबारा खोलने का आदेश दिया है।
SIR को लेकर चुनाव आयोग में मतभेद का मामला
यह विवाद उस समय और बढ़ा जब The Indian Express की एक जांच रिपोर्ट में चुनाव आयोग के भीतर SIR से जुड़े फैसलों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य दो चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेदों का विवरण सामने आया।
रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 मौकों पर कुछ फैसलों को लेकर औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। चुनाव आयोग ने इन नोट्स के अस्तित्व और उनके रिकॉर्ड पर होने की बात स्वीकार की, लेकिन कहा कि ये निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा थे और आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
इस घटनाक्रम के बाद विपक्षी दलों ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है। दिल्ली और मुंबई समेत कई जगहों पर इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन भी हुए हैं।
केरल में 2006 के मामले की जांच फिर शुरू
इसी बीच केरल के गृह विभाग ने वर्ष 2006 में हुए एक सड़क परियोजना से जुड़े मामले में विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) की जांच दोबारा शुरू करने का आदेश दिया है। उस समय ज्ञानेश कुमार केरल के लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव थे।
यह मामला मलेशियाई इंजीनियर ली सी बीन की आत्महत्या से भी जुड़ा है। वे केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट के तहत सड़क निर्माण से जुड़े PATI-BEL नामक इंडो-मलेशियाई संयुक्त उपक्रम से जुड़े थे। रिपोर्टों के मुताबिक, उनकी कथित आत्महत्या से पहले लिखे गए नोट में ज्ञानेश कुमार का नाम होने का दावा किया गया था।
शिकायत के आधार पर दोबारा जांच
केरल कांग्रेस नेता मलयिनकीझु वेणुगोपाल की शिकायत के आधार पर यह मामला फिर सामने आया है। शिकायत में ज्ञानेश कुमार के 2006 के PWD कार्यकाल के दौरान सड़क परियोजनाओं और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप लगाए गए हैं।
The Indian Express के मुताबिक, तत्कालीन शिकायत और बाद की जांच में यह आरोप भी सामने आया था कि परियोजना से जुड़े भुगतान को मंजूरी देने के लिए कथित तौर पर रिश्वत की मांग की गई थी। हालांकि, ये आरोप जांच का विषय हैं और इन्हें सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
पुरानी जांच पर भी उठे सवाल
केरल सरकार की मौजूदा कार्रवाई का एक अहम पहलू यह है कि वर्ष 2006 में शुरू हुई विजिलेंस जांच को दोबारा देखा जा रहा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उस समय मामले की जांच उचित तरीके से आगे नहीं बढ़ी थी।
अब दोबारा जांच में यह देखा जाएगा कि उस समय लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति क्या थी और पूर्व जांच किस निष्कर्ष तक पहुंची थी। केरल गृह विभाग ने मामले से संबंधित रिकॉर्ड और जांच की प्रक्रिया को फिर से सक्रिय किया है।
एक तरफ SIR, दूसरी तरफ पुराना मामला
इस तरह CEC ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवाद के दो अलग-अलग मोर्चे सामने हैं। SIR के मुद्दे पर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और आंतरिक निर्णय प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद चल रहा है, जबकि केरल में उनके PWD कार्यकाल से जुड़े करीब दो दशक पुराने मामले की विजिलेंस जांच दोबारा शुरू हुई है।
SIR को लेकर चुनाव आयोग ने अपने फैसलों को सर्वसम्मत बताया है, जबकि विपक्ष प्रक्रिया और पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है। वहीं केरल के पुराने मामले में आरोपों की वास्तविकता का निर्धारण जांच के निष्कर्ष के बाद ही हो सकेगा।























































