राष्ट्रमंडल — लोकतंत्र, सुशासन और वैश्विक सहयोग का जीवंत सूत्र : देवनानी

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क


 अजमेर। वासुदेव देवनानी ने 68वां कॉमनवेल्थ संसदीय सम्मेलन (CPC) में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए कहा कि राष्ट्रमंडल लोकतंत्र, पारदर्शिता और वैश्विक सहयोग का जीवंत सूत्र है। यह सम्मेलन बारबाडोस में आयोजित हुआ, जिसमें विश्व के विभिन्न विधानमंडलों के अध्यक्षों ने “सुशासन, बहुपक्षवाद और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में राष्ट्रमंडल की भूमिका” पर विचार व्यक्त किए।

राष्ट्रमंडल: साझा मूल्यों का जीवंत परिवार

देवनानी ने परिचर्चा में कहा कि राष्ट्रमंडल देशों का यह परिवार शक्ति या दबाव से नहीं, बल्कि साझा मूल्यों — लोकतंत्र, मानवाधिकार और विधि-शासन — से बंधा हुआ है। उन्होंने कहा कि 56 देशों का यह संघ विविधता में एकता का सशक्त प्रतीक है, जो लोकतंत्र को सशक्त, संस्थाओं को पारदर्शी और विकास को सहभागी बनाता है।

भारत ने दिखाया डिजिटल गवर्नेंस का मॉडल

देवनानी ने कहा कि राष्ट्रमंडल के मिशन के केंद्र में सुशासन है और भारत ने इस दिशा में डिजिटल गवर्नेंस और जवाबदेही का एक उत्कृष्ट मॉडल प्रस्तुत किया है। उन्होंने विशेष रूप से CPGRAMS प्रणाली का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे राष्ट्रमंडल सचिवालय द्वारा ‘स्मार्ट गवर्नेंस’ के वैश्विक सर्वोत्तम अभ्यास के रूप में मान्यता दी गई है। इसके साथ ही भारत का डिजिटल स्टैक मॉडल नागरिक भागीदारी और सेवा वितरण में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रहा है।

बहुपक्षवाद और वैश्विक साझेदारी

देवनानी ने कहा कि राष्ट्रमंडल एक सक्रिय बहुपक्षीय मंच है जो वैश्विक संवाद और साझा कार्रवाई को प्रोत्साहित करता है। भारत की भूमिका इस मंच पर केवल सहभागी की नहीं, बल्कि पथप्रदर्शक की रही है — चाहे वह प्रौद्योगिकी साझेदारी हो, कृत्रिम बुद्धिमत्ता में सहयोग हो या हरित ऊर्जा का प्रसार। भारत ने संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष के माध्यम से लगभग 60 देशों में 80 से अधिक परियोजनाओं को सहयोग दिया है, जिनमें आधे राष्ट्रमंडल से संबंधित हैं।

राजस्थान का योगदान

देवनानी ने बताया कि राजस्थान विधानसभा राष्ट्रमंडल संसदीय संघ की भारत शाखा में सक्रिय भागीदारी निभा रही है। यह भागीदारी न केवल संसदीय नवाचार, बल्कि महिला सशक्तिकरण, डिजिटल संसदीय प्रक्रियाओं और युवाओं की भागीदारी को भी प्रोत्साहित करती है। उन्होंने कहा कि राजस्थान लोकतंत्र की उस मिट्टी से जुड़ा है, जहाँ संवाद परंपरा और पारदर्शिता संस्कृति है।

देवनानी ने कहा, “जब वैश्विक चुनौतियाँ सीमाओं से परे हैं, तब राष्ट्रमंडल जैसी संस्थाएँ आशा का प्रकाश स्तंभ हैं। भारत और राजस्थान का अनुभव दर्शाता है कि डिजिटल लोकतंत्र, पारदर्शिता और सहभागिता के माध्यम से हम एक अधिक न्यायसंगत, समावेशी और टिकाऊ विश्व की रचना कर सकते हैं।”

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