मास्टर जी की मटकी से पानी पीने पर, मासूम दलित छात्र की पीट-पीटकर हत्या

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मासूम इंद्र की मौत सभ्य समाज की घटिया सोच की हत्या

जिस मास्टर को जाति व्यवस्था मिनीटानी थी मिटाने थी उसी की जातिवादी सोच ने ने ली जान आजादी की 75 वीं वर्षगांठ तक भी नहीं बदली मनुवादी सोच

दबंगई इतनी की पिटाई के 23 दिन तक मुकदमा दर्ज नहीं होने दिया

जालोर । घटना राजस्थान के जालोर जिले की सायला कस्बे की है, जहां सुराण स्थित सरस्वती विद्यालय में तीसरी कक्षा के छात्र इंद्र कुमार मेघवाल को हेड मास्टर की मटकी से पानी पीने की सजा जान देकर चुकानी पड़ी। मात्र 8 साल के मासूम इंद्र को ना तो यह पता था कि वह है दलित वर्ग का है, उसकी जाति क्या है और न ही, उसको इस बात की भी समझ होगी कि वह ऊंचा है या नीचा है। लेकिन स्कूल के जिस हेड मास्टर की बच्चों के मन से इस भावना को दूर करने का जन्मा था, उसकी तो खुद की रग रग में घोर जातिवाद ऊंच-नीच की भावना कूट-कूट कर भरी थी जो एक बच्चे के एक मटकी को छूने और उससे पानी पीने पर बाहर आ गई। उसने मासूम को इतना पीटा कि उसकी अहमदाबाद के अस्पताल में 23 दिन बाद आज आजादी की पूर्व संध्या के 2 दिन पूर्व इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने हत्या के आरोपी हेड मास्टर छैल सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत नॉमिनी को ऑफिसर स्कीम में लेने और आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की बात कही है मृतक के परिजनों को ₹50000 देने की घोषणा की है। इस तरह के मामलों में ₹50l लाख तक देने का प्रावधान है।

यह है पूरा मामला

सायला के थानाधिकारी ध्रुव प्रसाद ने बताया कि घटना 20 जुलाई की है। छात्र के चाचा ने शनिवार को सायला थाने में मामला दर्ज करवाया है। रिपोर्ट के मुताबिक अपनी मटकी से पानी पीने पर हेड मास्टर छैल सिंह इतना खफा हुआ कि इंद्र कुमार को पीट दिया। कान के पास चोट से कराते हुए इंद्र कुमार स्कूल के सामने पिता की दुकान पर पहुंचा। वहां से परिजन अस्पताल लेकर भागे थे। बा नोख ड़ा भीनमाल दिशा दिशा मेहसाणा उदयपुर में इलाज करवाया लेकिन जब यहां फायदा नहीं हुआ तो बच्चे को माता पिता अहमदाबाद अस्पताल में लेकर गए जहां इलाज के दौरान 23 दिन बाद बच्चे मौत हो गई। थाना अधिकारी ने बताया कि रिपोर्ट पर मामला दर्ज करते हुए शिक्षक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है । बता दें कि शनिवार सुबह 11:00 बजे मौत के बाद पोस्टमार्टम के इंतजार में माता-पिता और परिजन शाम तक अहमदाबाद में थे जो रविवार सुबह गांव पहुंचे।

23 दिन तक नहीं हो सका मुकदमा दर्ज मास्टर मास्टर ने कराया समझौता

इंद्र के कान पर आंख पर चोट लगी थी अस्पताल का वीडियो भी सामने आया है। वह बोलने की स्थिति में नहीं था। परिजनों की पूछने पर कान पर हाथ लगाते हुए छैल सिंह का नाम बताता था । एसपी हर्षवर्धन अग्रवाल भी स्कूल में पहुंचे। उन्होंने पूरे मामले की जानकारी ली। बच्चे के चाचा किशोर मेघवाल का कहना है कि घटना के बाद हेड मास्टर ने दबाव बनाया और समझौता करवा दिया । हमें भी यह भरोसा नहीं था ,कि बच्चे की मौत हो जाएगी। क्योंकि हमें गांव में रहना है। ऐसे में लगता था कि सामान्य चोट है,तो 4 दिन में ठीक हो जाएगी । छैल सिंह ने बच्चे की मौत के 4 दिन पहले समझौते के नाम पर डेढ़ लाख रुपए परिजनों को दे दिए जिससे बच्चे का इलाज हो सके। लेकिन हम चाहते हैं शैल सिंह को कड़ी से कड़ी सजा मिले, क्योंकि अब हमारा मासूम बेटा तो नहीं आ सकता, लेकिन इस तरह की घटिया सोच के लोगों को सजा मिलना जरूरी है। स्कूल की मान्यता रद्द हो, स्कूल के अन्य टीचरों पर भी कार्यवाही हो।

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