लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
अनंता रिजॉर्ट मामले में पूछा- CBI जांच से क्यों बच रही सरकार?
जोधपुर। राजस्थान की राजनीति में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। मुख्यमंत्री के बयानों पर पलटवार करते हुए गहलोत ने उन्हें 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने बिना तथ्यों के उनके खिलाफ झूठे और कपोल-कल्पित आरोप लगाए हैं। यदि उनके पास आरोपों के समर्थन में तथ्य और दस्तावेज हैं तो उन्हें सार्वजनिक करें, अन्यथा 24 घंटे के भीतर माफी मांगें।
जोधपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान गहलोत ने मुख्यमंत्री पर राजनीतिक मर्यादाएं तोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के बयानों से उन्हें व्यक्तिगत तौर पर पीड़ा पहुंची है। गहलोत ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री अपने आरोपों का विस्तृत विवरण और दस्तावेज उन्हें भी उपलब्ध कराएंगे तथा प्रदेश की जनता के सामने भी सच्चाई रखेंगे।
अनंता रिजॉर्ट प्रकरण पर गहलोत ने घेरा, मुख्यमंत्री की भूमिका पर उठाए सवाल
गहलोत ने मुख्यमंत्री पर पलटवार के साथ अनंता रिजॉर्ट प्रकरण को भी राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री लोकतांत्रिक मर्यादा का परिचय देते हुए अपने पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव आईएएस शिखर अग्रवाल को लेकर विला खरीद मामले में मीडिया में उठ रहे आरोपों और अपनी भूमिका पर स्थिति स्पष्ट करेंगे।
गहलोत ने सवाल उठाया कि अनंता कंपनी को विशेष छूट देने का फैसला जिस निवेश बोर्ड की बैठक में हुआ, उसके अध्यक्ष स्वयं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा हैं। ऐसे में इस पूरे प्रकरण में मुख्यमंत्री की क्या भूमिका रही, इसका जवाब प्रदेश की जनता को मिलना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि मूल सवालों का जवाब देने के बजाय मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत आरोप लगाकर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश की है। गहलोत ने मुख्यमंत्री की भाषा को भी राजनीतिक मर्यादाओं के विपरीत बताया।
‘ACB नहीं, CBI को जांच क्यों नहीं सौंप रहे मुख्यमंत्री?‘
पूर्व मुख्यमंत्री ने जांच एजेंसी को लेकर भी सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने सवाल किया कि यदि सरकार इस मामले में पूरी तरह पारदर्शी है तो जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को क्यों नहीं सौंपी जा रही?
गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री के अधीन काम करने वाली एसीबी उस निवेश बोर्ड के फैसले की निष्पक्ष जांच कैसे कर सकती है, जिसकी अध्यक्षता स्वयं मुख्यमंत्री कर रहे थे? उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति में जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सियासी टकराव में अब सबूत और माफी की चुनौती
गहलोत ने मुख्यमंत्री के सामने दो टूक चुनौती रखते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के तथ्य और दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। ऐसा नहीं होने पर 24 घंटे के भीतर माफी मांगी जाए।
अनंता रिजॉर्ट प्रकरण, निवेश बोर्ड के फैसले और जांच एजेंसी के चयन को लेकर गहलोत के सवालों ने राजस्थान की सियासत में नया विवाद खड़ा कर दिया है। अब निगाहें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के जवाब पर टिकी हैं। राजनीतिक टकराव के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आरोपों और प्रत्यारोपों से आगे बढ़कर इस पूरे प्रकरण के तथ्य और दस्तावेज जनता के सामने कब आएंगे?





















































