लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
पादूकलां। कस्बे में गोगा नवमी का पर्व शनिवार को श्रद्धा, उल्लास और धार्मिक आस्था के साथ मनाया गया। पद्मावती सरोवर किनारे स्थित मेला मैदान में गोगाजी महाराज मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के साथ तीन दिवसीय मेले का शुभारंभ हुआ। मंदिर में ध्वज चढ़ाने के साथ ज्योत प्रज्वलित की गई। सुबह से ही दर्शन के लिए श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया।
दिनभर मंदिर परिसर और मेला मैदान ‘जाहरवीर बाबा की जय’ के जयकारों से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में माथा टेककर परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की।
बारी-बारी से करवाए दर्शन
मंदिर के पुजारी कैलाश प्रजापत ने बताया कि गोगा नवमी पर सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचने लगे। युवा कार्यकर्ताओं और मंदिर समिति की ओर से श्रद्धालुओं को बारी-बारी से दर्शन करवाए गए।
श्रद्धालुओं ने गोगाजी महाराज को खीर, चूरमा, सेवइयां, मिठाई सहित विभिन्न पकवानों का भोग लगाया। महिलाओं ने मंगल गीत गाते हुए बाबा के दर्शन किए। किसानों ने अच्छी बारिश और फसल की खुशहाली के लिए लोकदेवता से अरदास की।
झूले और दुकानों से सजा मेला मैदान
तीन दिवसीय मेले को लेकर मेला मैदान में विभिन्न प्रकार के झूले, खिलौनों और अन्य सामान की दुकानें सजाई गई हैं। बच्चों में झूलों को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु मेले में पहुंचे, जिससे पूरे दिन मेला मैदान में रौनक बनी रही।
सामाजिक सौहार्द की मिसाल है गोगा मेला
गोगाजी महाराज का यह मेला धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सौहार्द और भाईचारे का संदेश भी देता है। मेले में हिंदू, मुस्लिम सहित विभिन्न समुदायों के श्रद्धालु बाबा के दरबार में पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं। विभिन्न समुदायों की सहभागिता मेले को आपसी भाईचारे और सद्भाव की मिसाल बनाती है।
जाहरवीर बाबा के रूप में पूजे जाते हैं गोगाजी
लोकमान्यता के अनुसार वीर गोगाजी महाराज को जाहरवीर बाबा और नागों के देवता के रूप में पूजा जाता है। श्रद्धालुओं में मान्यता है कि बाबा सर्पदंश से रक्षा करते हैं। गोगा नवमी पर विशेष पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की जाती है। कई स्थानों पर दूध से अभिषेक करने की परंपरा भी निभाई जाती है।
घर-घर होगी पूजा, घोड़े को बांधेंगे राखी
गोगा नवमी पर कस्बे और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर गोगाजी महाराज की पूजा-अर्चना की जाएगी। श्रद्धालु विभिन्न पकवान तैयार कर बाबा को भोग लगाएंगे। कई परिवारों में गोगाजी महाराज के घोड़े को राखी बांधने की परंपरा भी निभाई जाती है। कुम्हार समुदाय की ओर से मिट्टी से गोगाजी महाराज की प्रतिमाएं तैयार कर घर-घर पहुंचाई जाती हैं।
मेले में प्रशासक प्रतिनिधि शिवजीराम फड़ौदा, नाथूदास वैष्णव, वार्ड पंच प्रतिनिधि नरसाराम गोरा, तनिष बोहरा, विकास गोरा, हुक्मीचंद प्रजापत, संतोष प्रजापत सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु मौजूद रहे। तीन दिवसीय मेले को लेकर कस्बे सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।




















































