लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
सांगानेर-दौसा की जमीन सरकारी संरक्षण में लेने की उठी आवाज
मुख्य सचिव को भेजे अभ्यावेदन में वित्तीय अनियमितताओं, भूमि उपयोग, निर्माण, फायर एनओसी और गौवंश सुरक्षा से जुड़े कई गंभीर सवाल उठाए; स्वतंत्र जांच, स्पेशल ऑडिट और नई प्रबंधन समिति गठित करने की मांग
नीरज मेहरा वरिष्ठ संवाददाता
जयपुर। राजधानी जयपुर की टोंक रोड स्थित श्री पिंजरापोल गौशाला को लेकर विवाद अब सरकार के स्तर तक पहुंच गया है। गौशाला की वर्तमान 41 सदस्यीय प्रबंधन कार्यकारिणी को तत्काल भंग करने और सांगानेर के साथ दौसा में गौशाला के नाम अथवा गौशाला प्रयोजन से जुड़ी भूमि को जांच पूरी होने तक सरकारी/सक्षम वैधानिक प्राधिकारी के संरक्षण में लेने की मांग की गई है।
इस संबंध में मुख्य सचिव, राजस्थान सरकार को 21 अगस्त 2026 को विस्तृत अभ्यावेदन भेजा गया है। अभ्यावेदन में गौशाला की भूमि, वित्तीय प्रबंधन, सरकारी अनुदान, निर्माण गतिविधियों, अग्नि सुरक्षा, विद्युत सुरक्षा, गौवंश की मृत्यु और कथित व्यावसायिक गतिविधियों सहित कई मुद्दों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग उठाई गई है।
हालांकि, अभ्यावेदन में लगाए गए आरोप और उठाए गए सवाल अभी जांच एवं संबंधित प्रक्रियाओं के विषय हैं। इन्हें किसी व्यक्ति अथवा संस्था के विरुद्ध सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। अंतिम स्थिति सक्षम जांच एजेंसी अथवा न्यायालयीन प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगी।

41 सदस्यीय कार्यकारिणी पर क्यों उठे सवाल?
अभ्यावेदन में कहा गया है कि वर्तमान 2025-2028 की 41 सदस्यीय कार्यकारिणी के कार्यकाल से जुड़े कई विषय विभिन्न स्तरों पर जांच अथवा न्यायिक परीक्षण के दायरे में बताए जा रहे हैं। ऐसे में शिकायतकर्ता पक्ष का तर्क है कि जब प्रबंधन के कामकाज से जुड़े गंभीर सवालों की जांच हो रही हो, तब उसी कार्यकारिणी के पास गौशाला की भूमि, संपत्ति, बैंक खातों और महत्वपूर्ण रिकॉर्ड का पूर्ण नियंत्रण बने रहना निष्पक्ष जांच की दृष्टि से उचित नहीं होगा।
इसी आधार पर कार्यकारिणी को तत्काल भंग अथवा निलंबित कर उसके प्रशासनिक, वित्तीय और संपत्ति संबंधी अधिकार समाप्त करने की मांग की गई है।
सांगानेर और दौसा की जमीन की जांच की मांग
अभ्यावेदन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा गौशाला की भूमि से जुड़ा है। मांग की गई है कि सांगानेर और दौसा स्थित गौशाला की पूरी भूमि की राजस्व एवं भौतिक जांच कराई जाए।
इसके तहत प्रत्येक खसरे की—
- जमाबंदी
- खसरा रिकॉर्ड
- खातेदारी अथवा पट्टा
- भूमि आवंटन आदेश
- लीज एवं हस्तांतरण दस्तावेज
- भूमि उपयोग की वर्तमान स्थिति
- सीमांकन रिकॉर्ड
की जांच कराने की मांग की गई है।
इसके साथ ही सक्षम राजस्व अधिकारियों से संयुक्त सीमांकन और मौके का भौतिक सत्यापन कराने की बात कही गई है, ताकि रिकॉर्ड में दर्ज भूमि और मौके पर मौजूद वास्तविक स्थिति का मिलान किया जा सके।

जमीन के उपयोग पर भी उठे सवाल
अभ्यावेदन में कहा गया है कि यदि जांच में यह सामने आता है कि गौशाला की भूमि का उपयोग निर्धारित गौसेवा उद्देश्य के अतिरिक्त किसी अन्य उद्देश्य के लिए हुआ है या आवंटन/पट्टे की शर्तों का उल्लंघन हुआ है, तो सक्षम वैधानिक प्राधिकारी कानून के अनुसार कार्रवाई करे।
शिकायतकर्ता पक्ष ने यह भी मांग की है कि जांच पूरी होने तक भूमि पर किसी प्रकार का हस्तांतरण, बिक्री, लीज, सब-लीज, नया निर्माण, व्यावसायिक उपयोग अथवा भूमि की प्रकृति में परिवर्तन न होने दिया जाए।
यानी विवाद का केंद्र केवल प्रबंधन समिति नहीं, बल्कि गौशाला से जुड़ी भूमि और उसकी वर्तमान स्थिति भी है।
2.21 करोड़ रुपये से अधिक के सरकारी अनुदान का मुद्दा
अभ्यावेदन में वर्ष 2021 से 2025 के दौरान 2.21 करोड़ रुपये से अधिक के कथित अनियमित सरकारी अनुदान से जुड़े सवाल भी उठाए गए हैं।
मांग की गई है कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए और यदि आवश्यक हो तो कार्यकारिणी के कार्यकाल से संबंधित वित्तीय मामलों का स्पेशल अथवा फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए।
ऑडिट के दायरे में सरकारी अनुदान, दान राशि, बैंक खाते, भुगतान, खर्च, रसीदें और संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड शामिल किए जाने की मांग की गई है।
चार गौवंश की मौत का मामला भी जांच के घेरे में
गौशाला परिसर में विद्युत करंट की घटना में चार गौवंश की मृत्यु का मामला भी अभ्यावेदन में उठाया गया है।
गौशाला का मूल उद्देश्य गौवंश की सुरक्षा और संरक्षण होने के कारण शिकायतकर्ता ने विद्युत सुरक्षा व्यवस्था, परिसर की निगरानी और प्रबंधन की जवाबदेही की जांच कराने की मांग की है।
सवाल यह उठाया गया है कि यदि परिसर में विद्युत सुरक्षा से जुड़ी कोई कमी थी, तो उसे समय रहते दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए और घटना के बाद जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की गई।
FIR का भी अभ्यावेदन में उल्लेख
अभ्यावेदन में थाना सांगानेर की FIR संख्या 0288/2026 का भी उल्लेख किया गया है। संबंधित प्रकरण की पुलिस जांच को निष्पक्ष तरीके से पूरा कराने और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की गई है।
यहां भी अंतिम जिम्मेदारी जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही निर्धारित हो सकती है।

निर्माण और जमीन के इस्तेमाल पर भी नजर
गौशाला परिसर में हुए अथवा प्रस्तावित निर्माणों को लेकर भी कई सवाल उठाए गए हैं।
अभ्यावेदन में स्वीकृत नक्शे, भवन निर्माण अनुमति, भूमि उपयोग अनुमति, JDA अथवा नगर निकाय की मंजूरी और अन्य वैधानिक स्वीकृतियों की जांच की मांग की गई है।
साथ ही राजस्थान आवासन मंडल की भूमि से जुड़े प्रवेश मार्ग और गेट आदि के संबंध में सामने आए सवालों का भी वैधानिक परीक्षण कराने की मांग रखी गई है।
Fire NOC का मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण?
गौशाला परिसर की Fire NOC और अग्नि सुरक्षा को लेकर भी अभ्यावेदन में गंभीर चिंता व्यक्त की गई है।
मांग की गई है कि संबंधित अग्निशमन प्राधिकारी द्वारा मौके का निरीक्षण कर यह देखा जाए कि परिसर में अग्नि सुरक्षा के मानकों का पालन हो रहा है या नहीं।
गौशाला में बड़ी संख्या में गौवंश होने के कारण आग जैसी आपात स्थिति में निकासी, अग्निशमन व्यवस्था और आपातकालीन सुरक्षा को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है।
Surabhi Sadan की गतिविधियां भी जांच के दायरे में
अभ्यावेदन में Surabhi Sadan में कथित विवाह, बैंक्वेट और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
शिकायतकर्ता पक्ष ने मांग की है कि यदि ऐसी गतिविधियां संचालित हुई हैं तो उनकी—
बुकिंग, रसीद, बैंक जमा, आय, खर्च और लेखांकन
की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि संबंधित गतिविधियों के लिए आवश्यक वैधानिक अनुमति ली गई थी या नहीं और उनसे प्राप्त आय का संस्था के रिकॉर्ड में किस प्रकार लेखांकन किया गया।
रिकॉर्ड सुरक्षित कराने की मांग
अभ्यावेदन में जांच के दौरान महत्वपूर्ण रिकॉर्ड सुरक्षित कराने की भी मांग की गई है।
इसमें—
- बैंक खाते और बैंक स्टेटमेंट
- लेखा पुस्तिकाएं
- दान रजिस्टर
- सरकारी अनुदान से जुड़े दस्तावेज
- गौवंश रिकॉर्ड
- निर्माण संबंधी फाइलें
- भूमि संबंधी दस्तावेज
- CCTV रिकॉर्ड
- डिजिटल रिकॉर्ड
- बैठक एवं कार्यकारिणी से जुड़े दस्तावेज
को सुरक्षित रखने की मांग की गई है।
तर्क यह दिया गया है कि जांच के दौरान रिकॉर्ड में किसी प्रकार का बदलाव न हो और जांच एजेंसियों को मूल दस्तावेज उपलब्ध हो सकें।
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हाईकोर्ट में मामला लंबित होने का भी हवाला
अभ्यावेदन में राजस्थान हाईकोर्ट में लंबित एक रिट याचिका का भी उल्लेख किया गया है। इसमें S.B. Civil Writ Petition No. 13808/2026, गिर्राज गुर्जर एवं अन्य बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य का हवाला देते हुए कहा गया है कि मामले से संबंधित न्यायालयीन कार्यवाही चल रही है।
अभ्यावेदन में 13 अगस्त 2026 के आदेश का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि प्रकरण में राज्य की ओर से जवाब दाखिल किए जाने की प्रक्रिया है और अगली सुनवाई के लिए 22 सितंबर 2026 की तारीख का उल्लेख किया गया है।
इसके अलावा अभ्यावेदन में D.B. Civil Writ Petition No. 9364/2026 का भी उल्लेख किया गया है।
हालांकि इन न्यायालयीन मामलों में अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है। इसलिए इनका उल्लेख केवल लंबित न्यायिक कार्यवाही के संदर्भ में किया जाना उचित है।
अब अंतरिम प्रशासन की मांग
अभ्यावेदन में केवल वर्तमान कार्यकारिणी को हटाने की मांग नहीं की गई है, बल्कि उसके बाद की व्यवस्था का प्रस्ताव भी दिया गया है।
मांग की गई है कि कार्यकारिणी के अधिकार समाप्त किए जाने के बाद गौशाला के दैनिक संचालन के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष अंतरिम प्रशासन नियुक्त किया जाए।
यह अंतरिम व्यवस्था गौशाला के गौवंश, भूमि, संपत्ति, बैंक खातों और रिकॉर्ड की सुरक्षा सुनिश्चित करे तथा जांच पूरी होने तक किसी बड़े नीतिगत अथवा संपत्ति संबंधी निर्णय पर रोक रहे।
जांच पूरी होने के बाद नई समिति
अभ्यावेदन में अंतिम रूप से लागू कानून और संस्था के संविधान के अनुसार नई एवं स्वतंत्र प्रबंधन समिति गठित करने की मांग की गई है।
मांग का आधार यह है कि जांच के बाद संस्था में पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रबंधन व्यवस्था स्थापित हो और गौशाला से जुड़े जनविश्वास को बहाल किया जा सके।

सरकार के सामने अब क्या चुनौती?
पिंजरापोल गौशाला से जुड़ा मामला अब केवल प्रबंधन विवाद तक सीमित नहीं दिख रहा। इसमें गौशाला की जमीन, सरकारी अनुदान, संपत्ति, निर्माण, अग्नि सुरक्षा, विद्युत सुरक्षा, गौवंश संरक्षण और संस्था के प्रशासन जैसे कई पहलू शामिल हो गए हैं।
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो कानून के अनुसार कार्रवाई हो। वहीं, यदि आरोप जांच में प्रमाणित नहीं होते हैं तो संस्था की कार्यप्रणाली को लेकर स्थिति भी स्पष्ट करनी होगी।
असली सवाल: गौशाला की जमीन और जनविश्वास की सुरक्षा कौन करेगा?
श्री पिंजरापोल गौशाला जैसी संस्था केवल एक निजी प्रबंधन व्यवस्था नहीं, बल्कि गौसेवा और जनआस्था से जुड़ा संस्थागत ढांचा है। ऐसे में विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि गौशाला की भूमि, गौवंश, दान एवं सरकारी सहायता से जुड़ी राशि और संस्था के रिकॉर्ड पूरी तरह सुरक्षित रहें।
अब निगाहें राजस्थान सरकार और संबंधित विभागों की अगली कार्रवाई पर हैं। क्या सरकार पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराएगी? क्या सांगानेर और दौसा की भूमि का संयुक्त सीमांकन होगा? क्या वित्तीय मामलों का फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाएगा? और क्या वर्तमान 41 सदस्यीय कार्यकारिणी के स्थान पर अंतरिम प्रशासन गठित होगा?























































