मोदी का एक फोन काॅल… और बदल गईं मदन राठौड़ की किस्मत !

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

करिअर को खत्म करने पर तुले थे विरोधी, हाशिये से लेकर बागी नेता तक कठिनाईंयों से भरा रहा प्रदेशाध्यक्ष राठाैड़ का राजनीतिक सफर
नीरज मेहरा। जयपुर राजनीति में कई बार एक फैसला जिंदगी बदल देता है, लेकिन राजस्थान की राजनीति में एक ऐसा नेता भी है जिसकी किस्मत सिर्फ एक फोन कॉल ने बदल दी। एक समय ऐसा था जब अपनी ही पार्टी में उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा था। टिकट कट चुका था। समर्थकों में नाराजगी थी और उन्होंने पार्टी के खिलाफ बगावत का बिगुल भी फूंक दिया था। निर्दलीय पर्चा भरा, इसी बीच खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उनके पास फोन आया। पीएम मोदी ने फोन पर सिर्फ एक लाइन कही “जाओ और अपना नामांकन वापस ले लो”। पीएम के इस एक फोन कॉल का ऐसा असर हुआ कि उन्होंने तुरंत बिना कोई सवाल किए अपना पर्चा वापस ले लिया और पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के लिए प्रचार में जुट गए। फिर किस्मत ने लिया यू-टर्न। पार्टी के प्रति इस निष्ठा और अनुशासन का इनाम उन्हें जल्द ही मिला। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि असल हकीकत है मदन राठाैड़ की। फरवरी 2024 में भाजपा ने उन्हें राजस्थान से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया और वे निर्विरोध चुनकर संसद पहुंचे। जुलाई 2024 में संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए भाजपा आलाकमान ने उन्हें सीपी जोशी की जगह राजस्थान भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर दिया।

निर्दलीय ठोक चुके थे ताल
भाजपा नेता मदन राठौड़ ने वर्ष 2023 में सुमेरपुर विधानसभा सीट से बीजेपी का टिकट मांगा था, लेकिन पार्टी ने यहां से जोराराम कुमावत को दूसरी बार टिकट दे दिया। टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर मदन राठौड़ निर्दलीय ही चुनाव मैदान में कूद गए। चुनाव में नामांकन भरा। मदन राठौड़ अपनी ही पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार जोराराम कुमावत की हार का बड़ा कारण बन सकते थे। ये सोचकर राजस्थान के नेताओं ने पीएम मोदी तक ये बात पहुंचाई।

पीएमओ से बजी फोन की घंटी –
इधर मदन राठौड अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ चुनाव प्रचार में जुटे थे कि अचानक मोबाइल की घंटी बजी, फोन था सीधा पीएमओ से। फोन देखकर पहले मदन राठौड़ चौंके। लगा कोई मजाक कर रहा है, लेकिन जैसे ही फोन उठाया उधर से आवाज आई मदन जी बोल रहे हैं। साहब बात करेंगे, यकायक मदन राठौड़ को अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ। उधर से आवाज आई नरेंद्र मोदी बोल रहा हूं। बस फिर क्या था मदन राठाैड़ ने मोदी जी को प्रणाम किया और अपनी पीड़ा बताई। मोदी जी ने पुरी बात सुनी और कहा आप पार्टी के पुराने कार्यकर्ता है। आपका सम्मान रखा जाएगा। आप पर्चा उठाए और आप पार्टी के लिए काम करें। बाकी हम पर छोड़ दें। बस मोदीजी के इस फोन ने मदन राठौड़ की जिंदगी बदल कर रख दी। जैसे ही फोन कटा। मदन राठौड़ ने अपने हजारों समर्थकों को ये बात बताई। समर्थक ज्यादातर लोग संघ और बीजेपी के ही थे। जो पार्टी की लगातार उपेक्षा से नाराज थे और पार्टी को सबक सिखाने के मूड में थे। लेकिन उनके लिए मोदी और शाह से बड़ा कोई हो नहीं सकता था। पीएम का फोन आना उन सबके लिए सम्मान की बात थी। कार्यकर्ताओं और खुद मदन राठौड़ के लिए पीएम मोदी से बड़ा कौन हो सकता था। उन्होंने कहा साहब का फोन है नाम वापस लेना पड़ेगा और सुमेरपुर सीट भी पार्टी को जीतानी पड़ेगी।

फिर सुमेरपुर सीट बनीं मूंछ का सवाल-
मदन राठौड़ ने पीएम मोदी से हुई बात के बाद नामांकन फार्म वापस ले लिया और प्रचार में जुट गए, बगैर किसी लाग-लपेट और नफा-नुकसान का सोचे। फिर क्या था.. परिणाम आया और बीजेपी जीत गई। लेकिन अब आपको बताते है फोन के पीछे की असली कहानी। आपको लग रहा होगा कि क्या मदन राठौड़ इतने बड़े नेता थे कि उनके पास सीधा पीएम मोदी का फोन आए और उनसे निवेदन करे कि जोराराम कुमावत को जिताने के लिए नाम वापस ले लो।
अहम जिम्मेदारियों के बावजूद आए हाशिये पर-
अब आपको बताते हैं मदन राठौड़ की असल कहानी। मदन राठौड़ शुरू से ही आरएसएस के स्वंयसेवक रहे है। वर्ष 2003 और 2013 में सुमेरपुर से भाजपा के विधायक रहे। वसुंधरा राजे सरकार में सरकारी उप मुख्य सचेतक भी रहे। फिर उनका राजनीतिक साजिश के चलते सिटिंग एमएलए होते हुए भी अचानक टिकट काट दिया गया। उसके बाद वे लगातार पार्टी का काम देख रहे थे लेकिन पार्टी वहां नया नेतृत्व खड़ा कर चुकी थी। इसलिए उन्हें टिकट नहीं दिया गया। राजनीति में वे हासिये पर चले गए। वे हर बार टिकट की दावेदारी करते थे, लेकिन पार्टी ने जातिगत संतुलन का बहाना बनाकर उन्हें घर बैठा दिया गया।

प्रदेशाध्यक्ष बने तो चमकी किस्मत
कुछ दिनों बाद जब सीपी जोशी को हटाकर नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम की घोषणा की गई तो वो नाम मदन राठौड़ का था। जयपुर से लेकर पाली तक लोग फोन कर राठौड़ को बधाई देने लगे। इधर खुद मदन राठौड़ को ये भरोसा नहीं था कि पार्टी में इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिल जाएगी। लोग उन्हें फोन कर रहे थे लेकिन वे कंफर्म नहीं थे। लेकिन जैसे ही दिल्ली से फोन आया बधाई आपको पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया जाता है। फिर राठौड़ की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बस उसी दिन से मदन राठौड़ की जिंदगी अलग ही संवर गई।

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