लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
शौर्य की अमर गाथा
जोधपुर। भारतीय सैन्य इतिहास में 1971 का भारत–पाकिस्तान युद्ध अदम्य साहस और बलिदान की अनगिनत गाथाओं से भरा है। इन्हीं में से एक है बसंतर की ऐतिहासिक टैंक जंग (Battle of Basantar), जिसमें जोधपुर जिले के बेलवा राणा जी गांव के वीर सपूत रिसलदार सगत सिंह इन्दा ने ऐसा पराक्रम दिखाया कि उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित हो गया।
वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने एवं 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर सगत सिंह इन्दा की स्मृति में शेरगढ़ क्षेत्र में 1971 युद्ध में भाग ले चुके पूर्व सैनिकों एवं सेनानियों के लिए विशेष फिल्म शो का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सगत सिंह इन्दा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘इक्कीस’ का विशेष प्रदर्शन किया गया।
फिल्म ‘इक्कीस’ के जरिए जीवंत हुआ इतिहास
हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘इक्कीस’ ने सगत सिंह इन्दा के पराक्रम को नई पीढ़ी के सामने जीवंत कर दिया है। फिल्म में अभिनेता सिकंदर खेर ने सगत सिंह इन्दा की भूमिका निभाई है। उनके सशक्त अभिनय ने दर्शकों को भावुक कर दिया।
जोधपुर में आयोजित विशेष शो के दौरान 17 पूना हॉर्स यूनिट में सेवाएं दे चुके पूर्व सैनिकों ने बताया कि सगत सिंह इन्दा यूनिट की “रीढ़” थे। फिल्म देखने के बाद कई पूर्व सैनिक भावुक हो उठे और उन्होंने इसे आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

परिवार और पूर्व सैनिकों का सम्मान
इस विशेष अवसर पर सगत सिंह इन्दा के सुपुत्र सुमेश सिंह, उनके भाई चैन सिंह, तथा शेरगढ़ क्षेत्र के अनेक रणबांकुरे पूर्व सैनिक उपस्थित रहे। फिल्म प्रदर्शन से पूर्व पूर्व सैनिकों एवं उनके परिजनों का सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया।
आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवाओं को सगत सिंह इन्दा के जीवन, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति से परिचित कराना रहा।
बसंतर की लड़ाई: जहां पीछे हटना विकल्प नहीं था
16 दिसंबर 1971, शकरगढ़ सेक्टर—बसंतर की निर्णायक जंग में सगत सिंह इन्दा, परमवीर चक्र विजेता सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल के टैंक ‘फामागुस्ता’ के क्रू का अहम हिस्सा थे। जब दुश्मन के टैंकों ने चारों ओर से घेर लिया और रेडियो पर पीछे हटने का आदेश मिला, तब उन्होंने मृत्यु को स्वीकार किया, पर हार नहीं मानी।
इतिहास गवाह है कि टैंक में आग लगने के बावजूद सगत सिंह इन्दा और उनके साथी अंतिम सांस और अंतिम गोले तक डटे रहे। उनके इस अद्वितीय बलिदान ने दुश्मन की बख्तरबंद शक्ति को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।
उसी रेजिमेंट के रहे पूर्व सैनिक महिपाल सिंह बताते हैं कि सगत सिंह इन्दा और उनके कमांडर ने मिलकर दुश्मन के 65 से अधिक टैंकों को नष्ट किया, जो भारतीय सैन्य इतिहास का अद्भुत अध्याय है।
आयोजक का संदेश
आयोजनकर्ता जसवंत सिंह इन्दा ने कहा—
“सगत सिंह इन्दा जैसे नायकों को भले ही इतिहास की सुर्खियों में कम स्थान मिला हो, लेकिन आज की पीढ़ी उन्हें अपना सच्चा हीरो मानती है। उनके परिवार के साथ यह फिल्म देखना हमारे लिए गर्व और भावुकता का क्षण है।”















































