लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
उनियारा (दुर्योधन मयंक)। श्री दिगम्बर जैन सुखोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र सुथड़ा में सोलहकारण पर्व के अवसर पर श्रद्धालुओं द्वारा दर्शन विशुद्धि सहित विभिन्न भावनाओं की आराधना श्रद्धा एवं भक्ति भाव से की जा रही है।
प्रबंध कमेटी अध्यक्ष महावीर प्रसाद पराणा एवं संतु जैन ने बताया कि चैत्र मास में मनाया जाने वाला सोलहकारण पर्व (षोडशकारण पर्व) जैन धर्म का अत्यंत पवित्र पर्व है। इसमें तीर्थंकर प्रकृति के बंध के लिए 16 विशेष भावनाओं की आराधना की जाती है। यह पर्व वर्ष में तीन बार—चैत्र, भाद्रपद और माघ मास में मनाया जाता है। इन दिनों में श्रद्धालु आत्मशुद्धि, पूजा-विधान और तप के माध्यम से तीर्थंकर पद प्राप्ति की भावना करते हैं।
उन्होंने बताया कि सोलह कारण व्रत जैन धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत है, जिसमें सोलह विशुद्ध भावनाओं (गुणों) को आत्मसात किया जाता है, जिससे तीर्थंकर प्रकृति के बंध का मार्ग प्रशस्त होता है।
इस अवसर पर शास्त्री प्रिंस जैन देवांश के निर्देशन में सर्वप्रथम मंगलाष्टक के साथ नित्य अभिषेक एवं शांतिधारा का आयोजन किया गया। तीर्थरक्षक शांतिधारा महावीर प्रसाद, मुकेश कुमार (निवाई), वार्षिक शांतिधारा पुण्यार्जक रमेशचंद, रौनक सर्राफ (निवाई वाले, जयपुर) तथा पांडुकशिला शांतिधारा तेजमल, नाथूलाल और आदित्य कुमार (बनेठा) द्वारा की गई।
इसके पश्चात देव-शास्त्र पूजा, चौबीस भगवान के मूलनायक की पूजा तथा सोलहकारण भावना की पूजा-अर्चना कर श्रद्धालुओं ने सोलहकारण पर्व मनाया।
भक्तामर संयोजक हुक्मचंद शहर वाले एवं नाथूलाल जैन बनेठा ने बताया कि सायं 7 बजे से श्रेष्ठी परिवार एवं रविवार भक्तामर मंडल अलीगढ़ द्वारा भक्तामर दीपार्चना का आयोजन भी भक्तिभाव के साथ संपन्न किया गया।














































