लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
उनियारा (सत्यप्रकाश मयंक)।
उपखंड क्षेत्र के सुखोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र सूथड़ा में श्रमण संस्कृति के उन्नायक कहे जाने वाले संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी का 58 वां दीक्षा दिवस भक्ति भाव पूर्वक मनाया गया। प्रबंध कमेटी के गजानंद जैन एवं अजय गोधा अलीगढ़ ने बताया कि पूज्य आचार्य विद्यासागर जी जैनों के ही नहीं बल्कि जन-जन के संत थे।उनका जन्म 10 अक्टूबर 1946 को शरद पूर्णिमा के दिन ग्राम सदलगा जिला बेलगांव कर्नाटक में हुआ । मुनि दीक्षा 30 जून 1968 को अजमेर में आषाढ़ शुक्ल पंचमी के दिन हुई। 22 नवंबर 1972 को उन्हें अपने गुरु आचार्य ज्ञानसागर जी के द्वारा आचार्य पद प्राप्त हुआ एवं 18 फरवरी 2024 को चंद्रगिरी डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ में उनकी समाधि हुई थी ।
कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाष्टक जिनाभिषेक एवं शांतिधारा के साथ हुई। जिसमें मूलनायक भगवान की शांतिधारा तीर्थरक्षक किशोर कुमार,मनीबेन लखमती अहमदाबाद, दूसरी शांतिधारा बावूलाल, मुकेश कुमार मित्तल उनियारा,तृतीय शांतिधारा कजोड़मल,विनय कुमार सर्राफ उनियारा,चतुर्थ शांतिधारा तेजमल,संतू कुमार खूंट वाले उनियारा वालों के द्वारा की गई। आचार्य विद्यासागर जी महाराज 8 भाषाओं के ज्ञाता थे। कई धार्मिक ग्रंथों और कविताओं के रचयिता थे। आर्यिका विशेषमति माताजी के सानिध्य में हिमांशु शास्त्री एवं पुजारी राजेश जैन के द्वारा सभी करवाई गई। शाम साढ़े7बजे से भक्तामर दीपार्चना की गई। इसके बाद समिति के सदस्यों द्वारा पुण्यार्जक परिवार का साफा,माला एवं दुपट्टा पहना कर सम्मान किया गया।
