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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
खाली पड़ी जमीनों पर कब्जा दिलाया जाए अवैध निर्माण रोके जाएं
जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए
अगली सुनवाई 9 दिसंबर 2025 तय की गई है।
नीरज मेहरा
20 अगस्त 2025 के आदेश की पालना न होने पर कड़ी नाराजगी, अधिकारियों पर फौजदारी कार्रवाई की चेतावनी**
जयपुर। सांगानेर क्षेत्र की 87 अवैध कॉलोनियों से अतिक्रमण हटाने के मामले में आज राजस्थान हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था की याचिका पर बहस के दौरान अधिवक्ता पूनम चंद भंडारी और डॉ. टी.एन. शर्मा ने अदालत को बताया कि 20 अगस्त 2025 के स्पष्ट आदेशों के बावजूद आवासन मंडल और जेडीए ने अवैध कब्जों पर कार्रवाई नहीं की। खाली पड़े प्लॉटों पर भी कब्जा नहीं दिलाया गया और कई जगह नए निर्माण अब भी जारी हैं।
हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी
खंडपीठ ने कहा कि 20 अगस्त के अतिक्रमण हटाने के आदेश की पालना हर हाल में होनी चाहिए। अदालत ने हाउसिंग बोर्ड से उन अधिकारियों के नाम मांगे जो इस अवधि में पद पर थे या सेवानिवृत्त हो चुके हैं। न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि उनके खिलाफ फौजदारी कार्रवाई हेतु राज्यपाल को अनुशंसा की जाएगी।
कई समितियों के प्रार्थना पत्र खारिज
अवैध कॉलोनियों की ओर से कई समितियों ने पक्षकार बनाने के लिए अर्जियां लगाई थीं। सनी नगर समिति के आवेदन में भारी अनियमितताएं पाई गईं, पदाधिकारियों के नाम तक नहीं बताए जा सके। कोर्ट ने इसे 5 वर्ष पुरानी अवैध समिति बताते हुए प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया।
अन्य कई समितियों के आवेदन रिकॉर्ड पर नहीं आने पर वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत शर्मा ने आपत्ति जताई। अदालत ने कहा कि पक्षकार नहीं बनाया जाएगा, पर इंटरवीनर के रूप में सुनवाई संभव है।
हाउसिंग बोर्ड के तर्क और अदालत की प्रतिक्रिया
राज्य सरकार और हाउसिंग बोर्ड की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कमलाकर शर्मा ने कहा कि करीब 5000 बीघा जमीन अधिग्रहित की गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में लोग रह रहे हैं, जबकि 1000 बीघा जमीन अब भी खाली है।
कोर्ट ने कहा कि सरकारी जमीन की सुरक्षा अनिवार्य है और सभी अतिक्रमण तत्काल हटाए जाने चाहिए।
हाउसिंग बोर्ड ने जवाब दाखिल करने के लिए 8 सप्ताह का समय मांगा, जिस पर अदालत ने 9 दिसंबर 2025 तक का अंतिम अवसर दिया।
12 मार्च 2025 के नियमन आदेश पर बड़ा सवाल
याचिकाकर्ताओं के अनुसार राजस्थान सरकार ने 12 मार्च 2025 को सांगानेर की 87 कॉलोनियों को नियमित करने का आदेश जारी किया था, जबकि यह जमीनें हाउसिंग बोर्ड ने काश्तकारों से खरीदी थीं और भुगतान भी कर दिया था।
अधिवक्ता भंडारी ने आरोप लगाया कि अधिकारियों और भूमाफियाओं की मिलीभगत से इन जमीनों पर अवैध कब्जे करवाए गए और बाद में नियमन का प्रयास किया गया, जो हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के खिलाफ है।
सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत
राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के 20 अगस्त 2025 के आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, पर राहत न मिलने पर राज्य सरकार को अपनी याचिका वापस लेनी पड़ी। सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
अगली सुनवाई 9 दिसंबर को
सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि…
20 अगस्त 2025 के आदेश की पूरी पालना हो
खाली पड़ी जमीनों पर कब्जा दिलाया जाए
अवैध निर्माण रोके जाएं
जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए
अगली सुनवाई 9 दिसंबर 2025 तय की गई है।
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