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पीपल लगाया, खेजड़ी बताया! पीएम मोदी के पौधारोपण पर मचा विवाद

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

 आखिर चूक कहां हुई?

जयपुर। राजस्थान के बालोतरा जिले में पचपदरा रिफाइनरी के कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पौधारोपण को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कार्यक्रम में “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत प्रधानमंत्री ने पौधा लगाया, लेकिन इसके बाद आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट और भाषण में पौधे की प्रजाति को लेकर हुई कथित चूक विपक्ष के निशाने पर आ गई।

मोदी जी पीपल लगाया , स्पीच और सोशल मीडिया पर लिखा खेजड़ी

बताया जा रहा है कि कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने पीपल का पौधा लगाया, जबकि उनके आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट में इसे खेजड़ी का पौधा बताया गया। इतना ही नहीं, कार्यक्रम के दौरान दिए गए संबोधन में भी खेजड़ी का उल्लेख किया गया। बाद में संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट हटा ली गई, जिसके बाद इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक रंग ले लिया।

इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेता हरीश चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री के पोस्ट का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि जो पीपल और खेजड़ी जैसे पूजनीय वृक्षों की सही पहचान तक नहीं कर पा रहे हैं, वे संस्कृति की रक्षा के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि थार की जनता दिखावे और वास्तविक समझ का फर्क अच्छी तरह जानती है।

पोस्ट को वायरल होने पर हटाया

पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस शुरू हो गई। विपक्षी दलों और कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय की तैयारी पर सवाल उठाने का अवसर बनाया।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी तथ्यात्मक चूक कैसे हुई? क्या कार्यक्रम के आयोजन से जुड़े प्रशासनिक अधिकारियों से गलती हुई? क्या भाषण तैयार करने वाली टीम ने गलत जानकारी शामिल कर दी? या फिर सोशल मीडिया टीम ने बिना पुष्टि के पोस्ट जारी कर दी? फिलहाल इस संबंध में किसी भी स्तर पर आधिकारिक रूप से जिम्मेदारी तय नहीं की गई है।

क्या जिम्मेदारों पर होगी कार्रवाई

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों की तैयारी कई स्तरों पर होती है। ऐसे में भाषण, मंच संचालन और आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट में एक जैसी जानकारी का जाना यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं समन्वय में कमी रही।

हालांकि, इस पूरे मामले पर केंद्र सरकार या प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से कोई विस्तृत स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस कथित चूक पर आगे कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं।

फिलहाल इतना तय है कि एक पौधे की पहचान को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है और विपक्ष इसे सरकार को घेरने के लिए एक नए मुद्दे के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।

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