लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
182वें स्थापना दिवस पर कॉलेज का गौरवशाली इतिहास चर्चा में, बेशकीमती भूमि के स्वामित्व का विवाद भी उठा
जयपुर। राजस्थान की शैक्षणिक विरासत में विशिष्ट स्थान रखने वाले जयपुर के ऐतिहासिक महाराजा कॉलेज ने देश को दो उपराष्ट्रपति दिए। पूर्व उपराष्ट्रपति एवं राजस्थान के तीन बार मुख्यमंत्री रहे भैरों सिंह शेखावत और पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ इस संस्थान के विद्यार्थी रहे हैं। कॉलेज के 182वें स्थापना दिवस पर इसके गौरवशाली इतिहास, राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में योगदान और संस्थान से जुड़े पारिवारिक संस्मरणों की चर्चा फिर ताजा हो गई है।
श्री बिशन सिंह शेखावत शोध एवं शिक्षण संस्थान के अध्यक्ष डॉ. भूपेंद्र सिंह शेखावत ने कॉलेज के स्थापना दिवस पर अपने विचार साझा करते हुए संस्थान से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रसंगों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान पत्रिका में वरिष्ठ पत्रकार एवं इतिहासकार जितेंद्र सिंह शेखावत ने महाराजा कॉलेज के इतिहास से जुड़ी रोचक जानकारियों को सामने रखा है।
फुटबॉल टीम के कप्तान रहे भैरों सिंह शेखावत
डॉ. भूपेंद्र सिंह शेखावत के अनुसार, उनके परिवार के वरिष्ठ सदस्य और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत भी महाराजा कॉलेज के विद्यार्थी रहे थे। एक चर्चा के दौरान शेखावत ने उन्हें बताया था कि कॉलेज में अध्ययन के समय वे फुटबॉल टीम के कप्तान रहे और उनकी टीम ने राष्ट्रीय स्तर की ट्रॉफियां जीती थीं। उन्होंने यह भी बताया था कि कॉलेज में शेक्सपियर पर आधारित एक नाटक में उन्होंने शेक्सपियर की प्रमुख भूमिका निभाई थी।
जगदीप धनखड़ का भी इसी कॉलेज से विद्यार्थी के रूप में जुड़ाव रहा है। इस तरह महाराजा कॉलेज की शैक्षणिक पृष्ठभूमि का संबंध देश के दो उपराष्ट्रपतियों से रहा है।

शेखावत परिवार की भी रही कॉलेज से गहरी नजदीकी
डॉ. भूपेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि उनके पिता, राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार और कर्मचारी-शिक्षक नेता बिशन सिंह शेखावत भी महाराजा कॉलेज के विद्यार्थी रहे। उन्होंने कॉलेज की छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और छात्रसंघ के संयुक्त सचिव का दायित्व संभाला।
परिवार के एक अन्य सदस्य एवं राजस्थान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी रहे राजेंद्र सिंह शेखावत ने भी इसी संस्थान से बीएससी की परीक्षा अच्छे अंकों से उत्तीर्ण की। वे वर्तमान में राजस्थान भाजपा के बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक हैं।
इसी प्रकार, परिवार के एक अन्य सदस्य और राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके प्रताप सिंह खाचरियावास को राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव लड़ने के दौरान महाराजा कॉलेज के विद्यार्थियों का समर्थन मिला था।
कॉलेज की बेशकीमती भूमि को लेकर उठाया सवाल
स्थापना दिवस के अवसर पर डॉ. भूपेंद्र सिंह शेखावत ने महाराजा कॉलेज की लगभग 30 बीघा भूमि के स्वामित्व से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, करोड़ों रुपये बाजार मूल्य वाली इस भूमि का नामांतरण नगर निगम और जयपुर विकास प्राधिकरण के नाम किए जाने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने इसके विरुद्ध अभियान शुरू किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकरण में कुछ प्रभावशाली भू-माफिया और विश्वविद्यालय के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध रही। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
डॉ. शेखावत के मुताबिक, उन्होंने विश्वविद्यालय समुदाय, मीडिया और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने विधायक कालीचरण सर्राफ, विधायक मनीष यादव और विधायक सुभाष गर्ग को भी प्रकरण से जुड़े तथ्य बताए। उनके अनुसार, विधानसभा में इस मुद्दे का विरोध किए जाने के बाद जयपुर जिला कलेक्टर ने भूमि का स्वामित्व नगर निगम और जेडीए के नाम से हटाकर पुनः राजस्थान विश्वविद्यालय के अधिकार क्षेत्र में करने का आदेश जारी किया।
भूमि से संबंधित आदेश और राजस्व अभिलेखों की स्वतंत्र पुष्टि के आधार पर इस मामले की कानूनी स्थिति का विस्तृत आकलन किया जा सकता है।
गौरवशाली विरासत को सहेजने का संदेश
महाराजा कॉलेज का 182वां स्थापना दिवस केवल एक शैक्षणिक संस्थान की स्थापना का अवसर नहीं, बल्कि उसकी ऐतिहासिक विरासत, प्रतिभाओं के निर्माण और सार्वजनिक जीवन में उसके योगदान को याद करने का भी अवसर है।
डॉ. भूपेंद्र सिंह शेखावत ने स्थापना दिवस पर सभी को शुभकामनाएं देते हुए कॉलेज की ऐतिहासिक पहचान और उससे जुड़ी धरोहर को संरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
— डॉ. भूपेंद्र सिंह शेखावत
अध्यक्ष, श्री बिशन सिंह शेखावत शोध एवं शिक्षण संस्थान




















































