लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
वाटेरा और भारजा में नोटिस दिए जाने का दावा, ग्रामीणों ने कहा—शांतिपूर्ण विरोध को अशांति फैलाना कैसे माना जा सकता है?
सिरोही/पिंडवाड़ा। सिरोही जिले की चार ग्राम पंचायतों में प्रस्तावित खनन परियोजना को लेकर विरोध लगातार जारी है। इस बीच आंदोलन कर रहे ग्रामीणों को पुलिस की ओर से पाबंदी नोटिस दिए जाने के दावे ने विवाद को और बढ़ा दिया है। शुक्रवार को वाटेरा और भारजा गांवों में नोटिस दिए जाने की बात सामने आई है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी है और उन्होंने भाजपा सरकार पर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने के अधिकार को दबाने के आरोप लगाए हैं।
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि वे संविधान और कानून के दायरे में रहकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आपत्ति दर्ज करा रहे हैं, तो इसे अशांति फैलाने की कार्रवाई से कैसे जोड़ा जा सकता है? उनका आरोप है कि खनन परियोजना के विरोध में उठ रही आवाज को दबाने के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों पर प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है।
खनन परियोजना को लेकर विरोध, कार्रवाई से बढ़ी नाराजगी
वाटेरा, भारजा सहित आसपास के गांवों में प्रस्तावित खनन परियोजना को लेकर ग्रामीणों की आपत्तियां सामने आ रही हैं। इसी बीच पाबंदी नोटिस दिए जाने की खबर ने आंदोलन को नया मुद्दा दे दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मांगों और आशंकाओं पर संवाद करने के बजाय नोटिस देकर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी तरह की गैरकानूनी गतिविधि का समर्थन नहीं करते, लेकिन अपने क्षेत्र से जुड़े मुद्दे पर शांतिपूर्ण विरोध करना उनका संवैधानिक अधिकार है। उनका कहना है कि वे नोटिस से डरकर पीछे हटने वाले नहीं हैं और कानून के दायरे में रहकर अपना संघर्ष जारी रखेंगे।
पंचायती राज चुनावों के बीच राजनीतिक चर्चा तेज
राजस्थान में पंचायती राज चुनावों के बीच खनन परियोजना का विरोध और ग्रामीणों को नोटिस दिए जाने का मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन सकता है। ग्रामीणों ने भाजपा सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर देखा है। हालांकि, इस मामले का चुनावों पर क्या असर पड़ेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
प्रशासन के पक्ष का इंतजार
फिलहाल पूरे मामले में प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। पाबंदी नोटिस किन परिस्थितियों में जारी किए गए, उनमें क्या कारण बताए गए हैं और प्रशासन का इस कार्रवाई को लेकर क्या तर्क है—इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
खनन परियोजना पर ग्रामीणों की आपत्तियों का समाधान संवाद से होगा या प्रशासनिक कार्रवाई से विवाद और बढ़ेगा? अब सबकी नजर प्रशासन के अगले कदम और ग्रामीणों की आगे की रणनीति पर है।




















































