लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
मखमली लाल रंग का यह नन्हा जीव दे रहा प्रकृति संरक्षण का संदेश
गंगधार क्षेत्र में सावन की बारिश के बाद दिखने लगे लाल मखमली कीड़े; छूने पर सिकुड़कर गेंद जैसा हो जाता है शरीर, पर्यावरणविद ने संरक्षण की अपील की
गंगधार, झालावाड़। सावन के महीने में बारिश की पहली बौछार पड़ते ही प्रकृति में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं। धरती की सतह पर नमी आते ही मिट्टी के भीतर रहने वाले अनेक जीव-जंतु और कीड़े-मकोड़े बाहर निकलने लगते हैं। इन्हीं में से एक आकर्षक जीव है ‘वीर बहूटी’, जिसे बारिश के शुरुआती दिनों में कई ग्रामीण क्षेत्रों में देखा जा सकता है।
गहरे लाल रंग और मखमली शरीर वाला यह छोटा जीव देखने में बेहद खूबसूरत दिखाई देता है। बारिश के मौसम में खेतों, खुले स्थानों और नम मिट्टी वाले इलाकों में इसकी मौजूदगी नजर आती है। ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चे भी बारिश के दिनों में इन्हें देखते और इनके साथ खेलते रहे हैं।
छूते ही सिकुड़कर बन जाता है मखमली गेंद जैसा
वीर बहूटी की खासियत उसका व्यवहार भी है। इसे छूने या उठाने पर यह अपने छोटे-छोटे पैरों को शरीर के नीचे समेट लेता है और कुछ समय के लिए मखमली लाल गेंद जैसा दिखाई देने लगता है। खतरा टलने का एहसास होने पर यह धीरे-धीरे अपने पैर खोलकर फिर से चलने लगता है।
यह जीव मनुष्यों के लिए सामान्यतः जहरीला नहीं माना जाता। हालांकि, किसी भी जंगली जीव को अनावश्यक रूप से पकड़ने या नुकसान पहुंचाने के बजाय उसे उसके प्राकृतिक वातावरण में छोड़ देना ही बेहतर है।
मिट्टी और जैविक पदार्थों से जुड़ा जीवन
जानकारों के अनुसार बारिश के दौरान दिखाई देने वाले ऐसे छोटे जीव पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। वीर बहूटी मिट्टी में मौजूद जैविक पदार्थों और सड़े-गले अवशेषों से जुड़े खाद्य तंत्र का हिस्सा है। ऐसे जीव मिट्टी के प्राकृतिक चक्र और जैव विविधता में अपनी भूमिका निभाते हैं।
औषधीय उपयोग को लेकर कई पारंपरिक दावे
पर्यावरणविद दशरथ नंदन पांडे ने बताया कि वीर बहूटी की सुंदरता का वर्णन लोक जीवन और साहित्य में भी मिलता है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से कई जगहों पर इस जीव का पारंपरिक औषधीय उपयोग भी किया जाता रहा है।
उन्होंने बताया कि लोक मान्यताओं में वीर बहूटी से तैयार किए गए पदार्थों का उपयोग लकवा, जोड़ों के दर्द और अन्य समस्याओं के उपचार में किए जाने का उल्लेख मिलता है। हालांकि, ऐसे उपचारों की वैज्ञानिक पुष्टि और चिकित्सकीय सुरक्षा को लेकर विशेषज्ञ सलाह जरूरी है, इसलिए इसे किसी बीमारी के इलाज के विकल्प के रूप में नहीं अपनाना चाहिए।
पांडे ने बताया कि कथित औषधीय उपयोग के लिए बड़ी संख्या में इन जीवों को पकड़कर मारने और सुखाने की परंपरा भी कुछ स्थानों पर रही है। इससे इनके प्राकृतिक अस्तित्व पर दबाव पड़ सकता है।
रासायनिक दवाओं और बदलते पर्यावरण से अस्तित्व पर संकट
पर्यावरणविद का कहना है कि खेतों में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ-साथ प्राकृतिक आवासों में बदलाव के कारण कई छोटे जीवों की संख्या प्रभावित हो रही है। वीर बहूटी भी ऐसे जीवों में शामिल हो सकती है, जिनकी मौजूदगी अब पहले की तुलना में कम दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि प्रकृति में मौजूद हर छोटा जीव पारिस्थितिकी तंत्र की किसी न किसी कड़ी से जुड़ा होता है। इसलिए केवल आकर्षक दिखने वाले बड़े वन्यजीवों ही नहीं, बल्कि छोटे कीड़े-मकोड़ों और अन्य सूक्ष्म जीवों का संरक्षण भी जरूरी है।
प्रकृति के इस अनोखे जीव को बचाने की जरूरत
बारिश के मौसम में दिखाई देने वाली वीर बहूटी केवल एक खूबसूरत कीड़ा नहीं, बल्कि प्रकृति की जैव विविधता का हिस्सा है। जरूरत इस बात की है कि लोग इनके बारे में जागरूक हों और इन्हें देखकर मारने या पकड़ने के बजाय प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित रहने दें।
यदि रासायनिक प्रदूषण, प्राकृतिक आवासों में कमी और अनावश्यक दोहन पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले समय में कई ऐसे जीव हमारी आंखों से ओझल हो सकते हैं। वीर बहूटी का संरक्षण भी प्रकृति और जैव विविधता को बचाने की दिशा में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।



















































