लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
938 करोड़ से अधिक के बिल भुगतान के लिए अग्रेषित
गोशालाओं के अनुदान में दो साल में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी, 1,892 गोशालाओं को 555.86 करोड़ रुपये का भुगतान
जयपुर, 9 सितंबर। राजस्थान सरकार ने गोवंश संरक्षण और गोशालाओं के सुचारू संचालन की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 के दूसरे चरण के अनुदान की प्रक्रिया तेज कर दी है। प्रदेश की 3,477 गोशालाओं ने अनुदान के लिए आवेदन किया था। इनमें से 3,418 गोशालाओं की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की जा चुकी है, जबकि 3,207 गोशालाओं के अनुदान की वित्तीय स्वीकृति भी जारी कर दी गई है।
पशुपालन, गोपालन एवं देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि राज्य सरकार गोशालाओं के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। गोवंश संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए लगातार आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और गोशालाओं के सुचारू संचालन के लिए विभाग द्वारा हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
दो साल में 25 प्रतिशत बढ़ा गोशालाओं का अनुदान
मंत्री कुमावत ने बताया कि राज्य सरकार ने गोशालाओं को दिए जाने वाले अनुदान में दो चरणों में क्रमशः 10 प्रतिशत और 15 प्रतिशत की वृद्धि की है। इस तरह पिछले दो वर्षों में गोशालाओं के अनुदान में कुल 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
1,892 गोशालाओं को 555.86 करोड़ का भुगतान
गोपालन मंत्री ने बताया कि गोशालाओं के बिलों के पुनर्भरण की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है। निर्धारित नियमों एवं प्रक्रिया के तहत पात्र गोशालाओं को अनुदान का भुगतान किया जा रहा है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के दूसरे चरण के लिए कुल 3,477 गोशालाओं ने आवेदन किया था। इनमें से 1,892 गोशालाओं को 555.86 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान किया जा चुका है। शेष गोशालाओं के बिलों का भुगतान प्रक्रियाधीन है और शीघ्र ही भुगतान किए जाने की बात विभाग ने कही है।
इससे पहले बारां जिले में आयोजित कार्यक्रम में दूसरे चरण के लिए 751 गोशालाओं को 250 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था।
3,165 गोशालाओं के 938.62 करोड़ के बिल अग्रेषित
मंत्री के अनुसार, आईएफएमएस (IFMS) पर 3,165 गोशालाओं के 938.62 करोड़ रुपये के बिल भुगतान के लिए अग्रेषित किए गए थे। इनमें से 1,892 गोशालाओं को 555.86 करोड़ रुपये का भुगतान हो चुका है, जबकि शेष बिलों का भुगतान प्रक्रिया में है।
मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि विभाग का उद्देश्य पात्र गोशालाओं को नियमानुसार समय पर सहायता उपलब्ध कराना है। साथ ही अनुदान व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।









































