लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
गिरफ्तारी के ऐलान के बीच सियासी टकराव
– वनकर्मियों से मारपीट के मामले में भगत सिंह सेना प्रमुख की तलाश तेज, परिवार ने पुलिस की दबिश पर उठाए सवाल; 6 नवंबर को गिरफ्तारी देने के ऐलान के बीच पंचायत चुनाव में कार्रवाई के असर पर चर्चा
बारां। वनकर्मियों से मारपीट के आरोप… समर्थकों की गिरफ्तारी… और अब भगत सिंह सेना प्रमुख नरेश मीणा की तलाश में अलसुबह उनके घर पहुंची पुलिस… बारां के नया गांव में मंगलवार सुबह हुई पुलिस की दबिश ने कानून-व्यवस्था के साथ राजनीतिक टकराव की चर्चाओं को भी तेज कर दिया है। नरेश मीणा जहां 6 नवंबर को नाहरगढ़ थाने में गिरफ्तारी देने का ऐलान कर चुके हैं, वहीं पुलिस मंगलवार सुबह भारी बल के साथ उनके घर पहुंच गई। परिवार ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए, तो नरेश मीणा ने इसे सरकार के इशारे पर दबाव बनाने की कोशिश बताया।
6 नवंबर को गिरफ्तारी देने का ऐलान, फिर भी घर पहुंची पुलिस
मंगलवार सुबह पुलिस की टीम नरेश मीणा के नया गांव स्थित घर पहुंची। पुलिस उनके खिलाफ वनकर्मियों से मारपीट के मामले में दर्ज मुकदमे को लेकर तलाश कर रही है। अचानक भारी पुलिस बल को घर पर देखकर परिवार के सदस्य घबरा गए। नरेश मीणा के पिता कल्याण सिंह मीणा ने पुलिस अधिकारियों से सवाल किए कि आखिर इतनी सुबह इतनी बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी घर क्यों पहुंचे हैं?
परिवार की महिलाओं ने भी पुलिस कार्रवाई पर आपत्ति जताई। उनका सवाल था कि आखिर नरेश मीणा ने ऐसा कौन सा अपराध कर दिया कि पुलिस को सुबह-सुबह इतनी बड़ी फोर्स लेकर घर पहुंचना पड़ा? महिलाओं ने कहा कि घर में बुजुर्ग और बहन-बेटियां रहती हैं। अचानक पुलिस के पहुंचने से परिवार में दहशत का माहौल बन गया।
परिजनों ने सवाल उठाया कि क्या नरेश मीणा ने कोई हत्या कर दी है, जो पुलिस इस तरह घर पहुंच गई? इस पर पुलिस अधिकारियों ने जवाब दिया कि गिरफ्तारी केवल हत्या के मामलों में नहीं होती। मारपीट और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोपों में भी पुलिस कार्रवाई कर सकती है।
पुलिस ने परिजनों से नरेश मीणा के बारे में जानकारी मांगी और उन्हें जल्द पेश होने का संदेश देने को कहा। परिवार ने बताया कि नरेश मीणा खुद गिरफ्तारी देने की बात कह चुके हैं। उनके पिता ने पुलिस से कहा कि अगर उन्हें गिरफ्तार करना है तो चुनाव प्रचार के दौरान गांव में तलाश कर गिरफ्तार कर लिया जाए।
पुलिस की दबिश पर नरेश मीणा का सवाल- परिवार को परेशान क्यों?
पुलिस के घर पहुंचने के बाद नरेश मीणा ने भी सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे गांव में ही मौजूद हैं और फरार नहीं हैं। अगर पुलिस उन्हें गिरफ्तार करना चाहती है तो गांव में प्रचार करते समय गिरफ्तार कर सकती है।
नरेश मीणा ने 6 नवंबर को नाहरगढ़ थाने में गिरफ्तारी देने की बात दोहराई। उनका कहना है कि वे गिरफ्तारी से बचने के लिए कहीं नहीं भाग रहे हैं। ऐसे में पुलिस को उनके परिवार को परेशान करने के बजाय सीधे उन्हें गिरफ्तार करना चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस और नरेश मीणा के बीच सवाल-जवाब का सिलसिला तेज हो गया है। एक तरफ पुलिस मुकदमे के आधार पर गिरफ्तारी की कार्रवाई को जरूरी बता रही है, तो दूसरी तरफ नरेश मीणा इसे दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं।
वनकर्मियों से मारपीट के मामले में समर्थकों की गिरफ्तारी
नरेश मीणा की तलाश का मामला वनकर्मियों से मारपीट के आरोपों से जुड़ा है। इस मामले में पुलिस ने सोमवार को उनके समर्थकों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद नाहरगढ़ थाने के बाहर समर्थकों ने प्रदर्शन और नारेबाजी की।
समर्थकों की गिरफ्तारी के बाद नरेश मीणा ने सोमवार रात सोशल मीडिया पर वीडियो जारी किया। उन्होंने बारां पुलिस अधीक्षक को संबोधित करते हुए कहा कि वे नया गांव में ही मौजूद हैं। पुलिस उन्हें गिरफ्तार करना चाहती है तो गांव आ सकती है।
नरेश मीणा ने पुलिस को चुनौती देते हुए कहा कि वे फरार नहीं हैं और गिरफ्तारी से बचने के लिए कहीं नहीं जा रहे हैं। उन्होंने पुलिस से मानवता बरतने की अपील भी की।
मंगलवार सुबह पुलिस उनके घर पहुंची, लेकिन नरेश मीणा वहां नहीं मिले। परिवार से बातचीत के बाद पुलिस वापस लौट गई। अब पुलिस उनकी तलाश कर रही है।
चुनाव के बीच गिरफ्तारी, समर्थकों के मनोबल पर पड़ सकता है असर
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम पहलू पंचायत चुनाव है। 3 और 5 नवंबर को मतदान होना है। ऐसे में नरेश मीणा की गिरफ्तारी का मामला चुनावी माहौल से भी जुड़ गया है।
नरेश मीणा ने अपने वीडियो में तीसरे चरण के चुनाव का जिक्र करते हुए समर्थकों से हाथी चुनाव चिह्न पर वोट देने की अपील की है। उन्होंने गिरफ्तारी की स्थिति में चुनाव की जिम्मेदारी अपने बेटे को सौंपने की बात भी कही।
अब सवाल यह है कि यदि मतदान के बीच नरेश मीणा गिरफ्तार होते हैं तो उनके समर्थकों पर इसका क्या असर पड़ेगा? क्या गिरफ्तारी से समर्थकों का मनोबल प्रभावित होगा? क्या उनके प्रचार और मतदान की रणनीति में बदलाव आएगा?
नरेश मीणा के समर्थकों का आरोप है कि चुनाव के दौरान दबाव बनाने के लिए कार्रवाई की जा रही है। उनके मुताबिक, तीसरे मोर्चे के चुनावी प्रदर्शन से सरकार घबराई हुई है और इसी वजह से नरेश मीणा को निशाना बनाया जा रहा है।
हालांकि, सरकार के इशारे पर कार्रवाई होने के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
नरेश मीणा का आरोप- सरकार के इशारे पर गिरफ्तारी की कोशिश
नरेश मीणा ने आरोप लगाया है कि उनकी गिरफ्तारी की कोशिश सरकार के इशारे पर हो रही है। उनका कहना है कि पुलिस चुनाव के बीच उन्हें गिरफ्तार कर उनके समर्थकों पर दबाव बनाना चाहती है।
दूसरी तरफ पुलिस का तर्क है कि मुकदमे में दर्ज आरोपों के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। पुलिस के मुताबिक, कानून हाथ में लेने पर पुलिस अपना काम करेगी। हर कार्रवाई के लिए सरकार के इशारे की जरूरत नहीं होती।
यानी इस मामले में पुलिस और नरेश मीणा के आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब कानून और राजनीति दोनों पर चर्चा हो रही है।
6 नवंबर पर टिकी निगाहें
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नरेश मीणा अपने ऐलान के मुताबिक 6 नवंबर को नाहरगढ़ थाने पहुंचकर गिरफ्तारी देंगे? या पुलिस इससे पहले ही उन्हें गिरफ्तार कर लेगी?
वनकर्मियों से मारपीट के आरोपों में शुरू हुआ मामला अब चुनावी माहौल, पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक आरोपों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
मतदान के बीच गिरफ्तारी होती है तो उसका असर समर्थकों के मनोबल और चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है। वहीं, पुलिस के लिए भी आरोपी की तलाश और कानून के तहत कार्रवाई अहम है।
बारां में अब निगाहें 6 नवंबर पर हैं… नरेश मीणा की गिरफ्तारी, पुलिस की अगली कार्रवाई और पंचायत चुनाव के बीच बदलते राजनीतिक समीकरणों पर।



















































