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उपमुख्यमंत्री रहे बनवारी लाल बैरवा ने सादगी, संघर्ष और जनसेवा से रचा राजनीतिक इतिहास

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

गरीबी से उपमुख्यमंत्री तक का सफर:

टोंक। राजस्थान की राजनीति में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान केवल उनके पदों से नहीं बल्कि उनके व्यक्तित्व, सादगी और जनसेवा से होती है। पूर्व उपमुख्यमंत्री स्वर्गीय बाबू बनवारी लाल बैरवा ऐसा ही एक नाम थे। एक साधारण किसान परिवार से निकलकर राजस्थान के उपमुख्यमंत्री पद तक पहुंचने वाले बैरवा का राजनीतिक जीवन संघर्ष, सामाजिक न्याय और जनसेवा का प्रेरक उदाहरण माना जाता है।

गरीब किसान के घर जन्में बनवारी लाल बैरवा

19 जनवरी 1933 को टोंक जिले में किसान दौलतराम बैरवा के घर जन्मे बनवारी लाल बैरवा का बचपन आर्थिक अभावों में बीता। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने शिक्षा को जीवन का सबसे बड़ा आधार बनाया। गांव से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से एमए और एलएलबी की डिग्री हासिल की। उस दौर में ग्रामीण परिवेश से निकलकर उच्च शिक्षा प्राप्त करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि थी।

उच्च शिक्षा के बाद उन्होंने धौलपुर नगर पालिका में अधिशाषी अधिकारी के रूप में सरकारी सेवा शुरू की, लेकिन उनका मन केवल नौकरी तक सीमित नहीं रहा। समाज के बीच रहकर लोगों के अधिकारों के लिए काम करने की इच्छा ने उन्हें सरकारी नौकरी छोड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इस्तीफा देकर वकालत को अपना पेशा बनाया और यहीं से सार्वजनिक जीवन में उनकी सक्रिय भूमिका शुरू हुई।

अंबेडकर के जीवन से रहे प्रभावित

डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों से प्रभावित बनवारी लाल बैरवा सामाजिक न्याय और समान अवसर के प्रबल समर्थक थे। कांग्रेस की विचारधारा से जुड़े उनके परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि ने भी उन्हें जनसेवा की राह पर आगे बढ़ाया। समय के साथ वे राजस्थान कांग्रेस के प्रमुख दलित नेताओं में शामिल हो गए और सर्वसमाज के बीच अपनी अलग पहचान बनाई।

1972 में पहली बार बने विधायक

उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत वर्ष 1966 में हुई, जब कांग्रेस ने उन्हें नगर परिषद टोंक का उपसभापति बनाया। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 1972, 1993 और 1998 में वे निवाई विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए। विधायक के रूप में उनकी पहचान जनता के बीच रहने वाले जनप्रतिनिधि की रही।

हरिदेव जोशी सरकार में रहे मंत्री

1972 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी ने उन्हें जेल एवं समाज कल्याण विभाग का राज्यमंत्री बनाया। बाद में 1998 में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार में उन्हें समाज कल्याण एवं परिवहन मंत्री का दायित्व सौंपा गया। प्रशासनिक अनुभव, संगठनात्मक क्षमता और जनता के बीच मजबूत पकड़ के चलते वर्ष 2002 में उन्हें राजस्थान का उपमुख्यमंत्री बनाया गया, जो उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रही।

दो बार रहे टोंक के सांसद

विधानसभा तक ही नहीं, लोकसभा में भी उन्होंने टोंक का प्रतिनिधित्व किया। कांग्रेस ने उन्हें 1980 और 1984 में टोंक लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया और दोनों चुनावों में जनता ने उन्हें सांसद चुनकर संसद भेजा। विधायक, सांसद, मंत्री और उपमुख्यमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए भी उन्होंने कभी अपनी सादगी नहीं छोड़ी।

गहलोत सरकार में बने उपमुख्यमंत्री

राजनीतिक गलियारों में उन्हें प्रेम और सम्मान से “बाबू बनवारी लाल” कहकर पुकारा जाता था। कहा जाता है कि उपमुख्यमंत्री बनने के बाद भी उनके सरकारी आवास के दरवाजे आम लोगों के लिए हमेशा खुले रहते थे। सुबह से शाम तक दूर-दराज़ से लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते थे। वे हर व्यक्ति की बात धैर्यपूर्वक सुनते, जहां तक संभव होता सहायता करते और यदि किसी कारण काम संभव नहीं होता तो भी सम्मानपूर्वक समझाकर विदा करते थे। यही सहज व्यवहार उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बनाता था।

बनवारी लाल बैरवा को बाबू बनवारी के नाम से किया जाता है याद

टोंक और निवाई क्षेत्र के लोगों के बीच उनकी विशेष पकड़ थी। क्षेत्र के विकास, सामाजिक समरसता और कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए किए गए उनके प्रयासों को आज भी याद किया जाता है। राजनीतिक विरोधी भी उनके सरल स्वभाव और सौम्य व्यक्तित्व की सराहना करते थे।

22 जुलाई 2009 को बाबू बनवारी लाल बैरवा का निधन हो गया, लेकिन उनका राजनीतिक और सामाजिक योगदान आज भी लोगों की स्मृतियों में जीवित है। संघर्ष से शिखर तक का उनका सफर यह संदेश देता है कि ईमानदारी, शिक्षा, सादगी और जनसेवा के बल पर कोई भी व्यक्ति समाज और राजनीति में अमिट पहचान बना सकता है।

राजस्थान की राजनीति में बाबू बनवारी लाल बैरवा का नाम आज भी एक ऐसे जननेता के रूप में लिया जाता है, जिन्होंने सत्ता को कभी विशेषाधिकार नहीं, बल्कि जनता की सेवा का माध्यम माना। यही कारण है कि उनके निधन के वर्षों बाद भी वे सर्वसमाज के सम्मानित और प्रेरणास्रोत नेताओं में गिने जाते हैं।

 

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