लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
40 साल बाद इतिहास रचेगा भारत:
नई दिल्ली/वेलिंगटन | (रितु मेहरा)
भारत और न्यूज़ीलैंड के संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री Narendra Modi अगले सप्ताह न्यूज़ीलैंड की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पिछले 40 वर्षों में न्यूज़ीलैंड की पहली आधिकारिक यात्रा होगी, जिसे दोनों देशों के रिश्तों के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है।
न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री Christopher Luxon ने यात्रा की घोषणा करते हुए कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और दोनों देशों के बीच सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का यह महत्वपूर्ण अवसर होगा। प्रधानमंत्री मोदी 10 जुलाई को ऑकलैंड पहुंचेंगे और 11 जुलाई को अपनी यात्रा पूरी कर भारत लौटेंगे।
मुक्त व्यापार समझौता रहेगा प्रमुख एजेंडा
इस यात्रा का सबसे बड़ा केंद्र भारत-न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (FTA) रहेगा। अप्रैल 2026 में दोनों देशों ने ऐतिहासिक एफटीए पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत चरणबद्ध तरीके से न्यूज़ीलैंड के लगभग 95 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क समाप्त किया जाएगा। माना जा रहा है कि दोनों नेता इस समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन और व्यापार बढ़ाने के लिए आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे।
इन मुद्दों पर होगी उच्चस्तरीय वार्ता
प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री लक्सन के बीच कई अहम विषयों पर विस्तृत बातचीत होने की संभावना है। इनमें शामिल हैं—
- द्विपक्षीय व्यापार और निवेश
- रक्षा एवं समुद्री सुरक्षा
- शिक्षा और कौशल विकास
- विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार
- पर्यटन और खेल सहयोग
- इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से जुड़े वैश्विक एवं क्षेत्रीय मुद्दे
दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर भी विचार करेंगे।
भारतीय समुदाय से भी करेंगे संवाद
यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी न्यूज़ीलैंड में बसे भारतीय समुदाय से भी मुलाकात कर सकते हैं। न्यूज़ीलैंड में भारतीय मूल के लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है और वे देश की अर्थव्यवस्था, व्यापार, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा तकनीकी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
क्यों है यह यात्रा खास?
- 40 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली आधिकारिक न्यूज़ीलैंड यात्रा।
- भारत-न्यूज़ीलैंड संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद।
- एफटीए लागू करने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर।
- व्यापार, निवेश, शिक्षा, तकनीक और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में नए समझौतों की संभावना।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा केवल औपचारिक कूटनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक, आर्थिक और जन-से-जन संबंधों को नई गति देने वाला महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
