मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ली ऊर्जा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

0
26
- Advertisement -

लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

वर्ष 2027 तक राजस्थान को बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि राजस्थान को वर्ष 2027 तक बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना राज्य सरकार का प्रमुख लक्ष्य है। इसके लिए ऊर्जा विभाग को विद्युत उत्पादन, प्रसारण और वितरण व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में प्रभावी कार्य करना होगा। उन्होंने अधिकारियों को किसानों, उद्योगों और आमजन के लिए निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री बुधवार को मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित ऊर्जा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान की पहचान केवल बिजली खरीदने वाले राज्य के रूप में नहीं, बल्कि बिजली उत्पादन और बिक्री में अग्रणी प्रदेश के रूप में स्थापित होनी चाहिए। इसके लिए विभागीय अधिकारियों को निर्धारित कार्ययोजना के अनुरूप जिम्मेदारी के साथ कार्य करना होगा।

विद्युत उत्पादन और प्रसारण क्षमता बढ़ाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि थर्मल, हाइड्रो, सौर और पवन ऊर्जा सहित सभी उपलब्ध स्रोतों का अधिकतम उपयोग कर बिजली उत्पादन बढ़ाया जाए। उन्होंने विद्युत तंत्र के सुदृढ़ीकरण से जुड़े कार्यों को गति देने और उत्पादन इकाइयों की क्षमता में वृद्धि के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।

उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में 26 जिलों में किसानों को दिन के समय बिजली आपूर्ति की सुविधा मिल रही है। शेष जिलों में भी इस व्यवस्था को जल्द लागू करने के लिए प्रयास तेज किए जाएं।

पीएम कुसुम और पीएम सूर्य घर योजना पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अधिक से अधिक किसानों और उपभोक्ताओं को पीएम कुसुम योजना तथा पीएम सूर्य घर योजना से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के माध्यम से न केवल बिजली उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि उपभोक्ताओं को आर्थिक लाभ भी मिलेगा।

शिकायत निवारण तंत्र को बनाया जाए और प्रभावी

बैठक में मुख्यमंत्री ने सभी डिस्कॉम्स को समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश देते हुए कहा कि उपभोक्ताओं की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए तकनीकी रूप से मजबूत और प्रभावी शिकायत निवारण प्रणाली विकसित की जाए। उन्होंने जोधपुर डिस्कॉम में आरडीएसएस योजना के शेष कार्यों को शीघ्र पूरा करने के भी निर्देश दिए।

बिजली खरीद में आई उल्लेखनीय कमी

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। वर्ष 2024 के मई माह में प्रदेश की कुल बिजली आवश्यकता का लगभग 8 प्रतिशत हिस्सा खरीदना पड़ा था, जबकि वर्ष 2025 की समान अवधि में यह आंकड़ा घटकर 2 प्रतिशत रह गया है।

साथ ही, 2 जून को उत्पादन निगम की कोयला आधारित विद्युत इकाइयों ने सर्वाधिक क्षमता का उपयोग करते हुए 7,171 मेगावाट बिजली उत्पादन का रिकॉर्ड दर्ज किया।

ऊर्जा अवसंरचना का तेजी से विस्तार

बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य सरकार के पिछले ढाई वर्षों के कार्यकाल में प्रदेश में ऊर्जा अवसंरचना के विकास को नई गति मिली है।

  • 400 केवी, 220 केवी और 132 केवी क्षमता के 60 ग्रिड सब-स्टेशन (जीएसएस) स्थापित किए जा चुके हैं।
  • 151 जीएसएस का निर्माण कार्य प्रगति पर है।
  • इसी अवधि में 33 केवी के 444 सब-स्टेशन स्थापित किए गए हैं।
  • 211 नए सब-स्टेशन निर्माणाधीन हैं।

वरिष्ठ अधिकारी रहे उपस्थित

बैठक में ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हीरालाल नागर, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, अतिरिक्त मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री) अखिल अरोड़ा, ऊर्जा विभाग की शासन सचिव आरती डोगरा सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने बैठक के अंत में कहा कि राज्य सरकार ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक और प्रभावी सुधारों के लिए प्रतिबद्ध है तथा राजस्थान को ऊर्जा उत्पादन और आपूर्ति के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लिए सभी स्तरों पर कार्य किया जा रहा है।

- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here