लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जंतर-मंतर पर छात्रों का जश्न, राष्ट्रगान गूंजा, अब सरकार के सामने नई शर्तें
एक महीने के आंदोलन के बाद पहली बड़ी जीत का दावा, छात्रों ने कहा— “यह सिर्फ शुरुआत है, इंसाफ अभी बाकी है”
नई दिल्ली। एक महीने से देशभर के छात्रों के आंदोलन का केंद्र बने जंतर-मंतर पर शनिवार को ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने पूरे आंदोलन को नया मोड़ दे दिया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर मिलते ही हजारों छात्रों में खुशी की लहर दौड़ गई। कुछ देर पहले तक नारे लगा रहे छात्र अचानक राष्ट्रगान गाने लगे। “छात्र एकता जिंदाबाद” और “इंकलाब जिंदाबाद” के नारों से पूरा जंतर-मंतर गूंज उठा।
जश्न के बीच आंदोलनकारियों ने संवेदनशीलता का भी परिचय दिया। नीट पेपर लीक प्रकरण के बाद कथित रूप से जान गंवाने वाले छात्रों की स्मृति में सभी ने दो मिनट का मौन रखा। इसके बाद छात्रों ने एक स्वर में कहा कि यह जीत सिर्फ एक इस्तीफे की नहीं, बल्कि देशभर के लाखों युवाओं की आवाज की जीत है।

सरकार हरकत में, कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में शुरू हुई निर्णायक बातचीत
इधर, इस्तीफे के तुरंत बाद सरकार और आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता शुरू हो गई। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, जितेंद्र सिंह सहित सरकारी प्रतिनिधि कॉन्स्टिट्यूशन क्लब पहुंचे, जहां आंदोलन के प्रतिनिधियों के साथ आगे की रणनीति और मांगों पर चर्चा शुरू हुई।

“कहते थे इस्तीफा नहीं होगा… हमने कर दिखाया”
आंदोलन का चेहरा बने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मंच से कहा—
“क्या कह रहे थे… इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते। झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए। मंत्री का इस्तीफा तो हो गया, लेकिन हमारी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।”
उन्होंने समर्थकों की ओर इशारा करते हुए कहा—
“सुबह हो गई मामू… जनता जाग गई। हम ऐसे नहीं जाएंगे। कॉकरोच एक बार घुसता है तो निकलता नहीं है।”
अब सरकार के सामने रखीं तीन नई मांगें
अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार इन मांगों पर फैसला नहीं लेती—
- नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा।
- छात्रों पर कार्रवाई करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई।
- आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे तत्काल वापस लिए जाएं।
उन्होंने कहा—
“लोग कहते थे एक महीने से बैठे हो, कुछ नहीं होगा। हमने एक मंत्री का इस्तीफा लेकर दिखा दिया। अब छात्रों पर दर्ज केस भी वापस होंगे। यह लोकतंत्र है और लोकतंत्र में जनता की आवाज सबसे बड़ी होती है।”
जंतर-मंतर बना जश्न का मैदान
इस्तीफे की खबर मिलते ही छात्रों ने एक-दूसरे को गले लगाया, तिरंगा लहराया, राष्ट्रगान गाया और लगातार छात्र एकता के नारे लगाए। कई छात्रों की आंखों में खुशी के आंसू भी दिखाई दिए। पूरे परिसर में ऐसा माहौल था मानो आंदोलन ने अपनी पहली बड़ी मंजिल हासिल कर ली हो।
हालांकि आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया कि उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उनका कहना है कि जब तक छात्रों को न्याय नहीं मिलता और बाकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
राजनीतिक और सामाजिक नजरें अब अगली वार्ता पर
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद अब पूरे देश की नजर सरकार और आंदोलनकारियों के बीच चल रही बातचीत पर है। आने वाले घंटों में यह तय होगा कि यह आंदोलन यहीं समाप्त होता है या फिर छात्रों की नई मांगों के साथ एक और बड़े चरण में प्रवेश करता है।
लोक टुडे विश्लेषण
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्र आंदोलन की बड़ी राजनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन आंदोलनकारी इसे मंजिल नहीं, बल्कि संघर्ष की शुरुआत बता रहे हैं। अब सरकार के सामने चुनौती सिर्फ एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं, बल्कि छात्रों के भरोसे को फिर से कायम करने की भी है।














































