लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
खाद लेने को किसानों की लंबी लाइनें, सरकारी दावों की खुली पोल
रिपोर्ट : तुषार पुरोहित, सिरोही
सिरोही। रबी सीजन के बीच यूरिया की भारी कमी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सहकारी समितियों पर खाद की उपलब्धता बेहद कम होने के कारण किसानों को सुबह तड़के से लेकर देर शाम तक लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है। जमीनी स्थिति पूरी तरह से सरकारी दावों को झुठलाती नजर आ रही है।
भीमाना, रोहिड़ा, स्वरूपगंज सहित विभिन्न वितरण केंद्रों पर किसानों की भीड़ उमड़ रही है। किसानों ने बताया कि इस बार हालात पहले से कई गुना अधिक खराब हैं और समय पर खाद नहीं मिलने से फसल पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।
किसानों का आरोप है कि सहकारी समितियों पर यूरिया की सप्लाई मांग के अनुरूप नहीं पहुँच रही। कई किसानों ने रोष जताते हुए कहा कि उन्हें मजबूरी में रात से ही कतार में लगना पड़ता है, लेकिन कई बार पूरे दिन इंतजार करने के बाद भी खाली हाथ लौट आना पड़ रहा है। कुछ सोसाइटियों में सीमित मात्रा में ही खाद देने की व्यवस्था की गई है, जिससे जरूरत पूरी नहीं हो पा रही।
सरकारी अधिकारी दावा कर रहे हैं कि जिले में पर्याप्त खाद उपलब्ध है, लेकिन वास्तविक हालात इन दावों की पोल खोल रहे हैं। फसल विकास के इस महत्वपूर्ण समय में यूरिया की किल्लत किसानों के लिए बेहद बड़ी चिंता का विषय बन गई है।
पिंडवाड़ा तहसील के भीमाना, रोहिड़ा और स्वरूपगंज सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में पड़ताल करने पर हर जगह किसानों की लंबी लाइनें, खड़े ट्रैक्टर, मोटरसाइकिलें और बैलों की गाड़ियां दिखीं। किसानों ने बताया कि खाद लेने में पूरा दिन निकल जाता है और खेतों का काम ठप पड़ा है।
किसानों का कहना है कि सोसाइटियों पर बार-बार खाद आने का आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन वास्तविकता में हर बार निराशा ही हाथ लगती है। “हमें दो-दो दिन से लाइन में लगना पड़ रहा है, लेकिन खाद नहीं मिल रही,” एक किसान ने नाराज़गी जताई।
इन हालातों ने सरकार की नीतियों और खाद वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का कहना है कि सरकारी दावे सिर्फ कागजों पर हैं, जबकि जमीन पर हालात बेहद खराब हैं। जिम्मेदार अधिकारी मौन हैं और किसान लगातार परेशान हो रहे हैं।
समय पर खाद नहीं मिलने से फसल का विकास रुकने लगा है, जिससे उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका है। किसानों की पीड़ा एक वाक्य में साफ झलकती है—
“अन्नदाता परेशान है और सरकार चुप है।”
सिरोही जिले में जारी यह स्थिति साफ दिखाती है कि खाद वितरण व्यवस्था चरमरा चुकी है। जब तक प्रशासन और सरकार यूरिया की पर्याप्त एवं समय पर सप्लाई सुनिश्चित नहीं करते, तब तक किसानों की यह परेशानी कम होने वाली नहीं।
जमीनी हकीकत यही कहती है कि सिरोही का किसान आज भी यूरिया के लिए भटक रहा है—और यही तस्वीरें सरकारी दावों की सच्चाई उजागर कर रही हैं।
