लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
उनियारा। (निर्मल गुप्ता) सुखोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र सूथड़ा में श्रुत पंचमी महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जैन समाज के श्रद्धालुओं ने जिनवाणी माता की पूजा-अर्चना कर ज्ञान की आराधना की तथा धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।
प्रबंध समिति अध्यक्ष महावीर प्रसाद पराणा एवं संतू जैन ने बताया कि श्रुत पंचमी जैन समाज का अत्यंत पवित्र एवं ऐतिहासिक पर्व है, जिसे ज्ञान के जन्मदिवस के रूप में भी मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि भगवान महावीर के निर्वाण के बाद आचार्य पुष्पदंत और आचार्य भूतबलि ने गुरु आचार्य धरसेन से प्राप्त ज्ञान को लिपिबद्ध कर जैन धर्म के प्रथम ग्रंथ ‘षट्खंडागम’ की रचना की थी। जिस दिन यह कार्य पूर्ण हुआ, उसी ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी को श्रुत पंचमी के रूप में मनाया जाता है।
महोत्सव के दौरान शास्त्री हिमांशु जैन के निर्देशन में अभिषेक एवं शांतिधारा का आयोजन किया गया। वार्षिक शांतिधारा का पुण्यार्जन मंजू देवी, रमेशचंद, शिवानी एवं रौनक सर्राफ (जयपुर) परिवार द्वारा तथा पांडुशिला शांतिधारा का पुण्यार्जन धर्मचंद, आशीष कुमार, अंकित कुमार एवं आर्जव कुमार सर्राफ (उनियारा) परिवार द्वारा किया गया।
इसके पश्चात देव, शास्त्र एवं गुरु भगवान मूलनायक की विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न हुई। सायंकाल भक्तामर संयोजक हुकुमचंद जैन एवं नरेंद्र जैन बनेठा के निर्देशन में श्रेष्ठी परिवार नवीन कुमार, शिखा देवी, ऋषभ कुमार, प्रिंस, देवांश जैन तथा शुक्रवार भक्तामर मंडल उनियारा के सान्निध्य में भव्य भक्तामर दीपार्चना का आयोजन किया गया।
श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्वलित कर जिनवाणी माता के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की तथा स्वाध्याय, धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन और ज्ञान की प्रभावना का संकल्प लिया। पूरे महोत्सव के दौरान धार्मिक वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।
















































