लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
पिता के नेत्रदान से पोरवाल परिवार ने पेश की मानवता की मिसाल
बारां। स्थानीय निवासी 70 वर्षीय ताराचंद पोरवाल के निधन के बाद उनके परिवार ने उनका नेत्रदान कर मानव सेवा की प्रेरणादायी मिसाल पेश की। खास बात यह रही कि पोरवाल परिवार में नेत्रदान की यह परंपरा नई नहीं है। इससे पहले ताराचंद पोरवाल की माता स्वर्गीय कैलाश बाई पोरवाल का भी नेत्रदान कराया गया था। अब उसी प्रेरणा और पारिवारिक संस्कारों को आगे बढ़ाते हुए परिवार ने उनका नेत्रदान कर समाज के सामने अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।
ताराचंद पोरवाल के पुत्र पियूष गुप्ता ने अपने बड़े भाई ऋषभ गुप्ता, जो भारतीय सेना में श्रीनगर में तैनात हैं, तथा बहन प्रतिभा पोरवाल से चर्चा की। सभी की सहमति के बाद परिवार ने नेत्रदान कराने का निर्णय लिया और बारां जिला नेत्रदान संयोजक हितेश खंडेलवाल से संपर्क किया।
हितेश खंडेलवाल ने तत्काल शाइन इंडिया फाउंडेशन, कोटा के डॉ. कुलवंत गौड़ से संपर्क कर उनकी टीम को बारां बुलवाया। चिकित्सकीय टीम ने समय पर पहुंचकर सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करते हुए सफलतापूर्वक नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न कराई।
भारत विकास परिषद, बारां के अध्यक्ष नरेश खंडेलवाल ने बताया कि परिषद लंबे समय से जिले में नेत्रदान जागरूकता अभियान चला रही है। उन्होंने कहा कि “नेत्रदान महादान” है, जिसके माध्यम से दो दृष्टिबाधित व्यक्तियों के जीवन में फिर से रोशनी लाई जा सकती है। उन्होंने आमजन से इस पुनीत कार्य के लिए आगे आने और अपने परिवारों में भी नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की अपील की।
पोरवाल परिवार की यह सेवा परंपरा समाज को यह संदेश देती है कि सच्चे संस्कार केवल विरासत नहीं होते, बल्कि वे पीढ़ी-दर-पीढ़ी मानवता की नई रोशनी भी फैलाते हैं। दादी से मिली प्रेरणा को पुत्रों ने आगे बढ़ाकर यह साबित कर दिया कि किसी व्यक्ति का जीवन समाप्त होने के बाद भी उसके नेत्र किसी और की दुनिया को रोशन कर सकते हैं।
















































