लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
राजीविका ने आयोजित की निर्यात संवर्धन कार्यशाला
जयपुर। (रूपनारायण सांवरिया)
ग्रामीण महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की दिशा में राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) ने महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्य सचिव के निर्देशानुसार शुक्रवार को जयपुर स्थित कॉन्स्टिट्यूशनल क्लब में “स्वयं सहायता समूहों के लिए निर्यात संवर्धन विषयक क्षमता निर्माण कार्यशाला” का आयोजन किया गया।
कार्यशाला का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिला शिल्पकारों और ग्रामीण उद्यमियों को निर्यात की संभावनाओं, वैश्विक बाजार की मांग, उत्पाद गुणवत्ता और निर्यात प्रक्रिया की व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराना था, ताकि वे अपने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचा सकें।
गुणवत्ता और विविधता में राजस्थान के उत्पाद सक्षम: कृष्ण कुणाल
ग्रामीण विकास विभाग के शासन सचिव कृष्ण कुणाल ने कहा कि राजस्थान के स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद गुणवत्ता और विविधता के मामले में किसी से कम नहीं हैं। जरूरत है कि इन उत्पादों को सेवा और निर्यात क्षेत्र से प्रभावी रूप से जोड़ा जाए, जिससे ग्रामीण महिलाओं की आय में लगातार वृद्धि हो सके।
उन्होंने कहा कि ओएसएफ (OSF), एसवीईपी (SVEP) और एमईडी (MED) जैसी योजनाएं महिला उद्यमिता को मजबूत आधार प्रदान कर रही हैं। उन्होंने महिला उद्यमियों से मार्केटिंग, ब्रांडिंग और बाजार की मांग को समझने पर जोर देते हुए कहा कि सही मूल्य निर्धारण और उपभोक्ता की जरूरतों को पहचानना सफलता की कुंजी है।
‘राजसखी’ ब्रांड को मिलेगा बढ़ावा
शासन सचिव ने स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों के लिए ‘राजसखी’ ब्रांड को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि इस ब्रांड के तहत तैयार उत्पाद प्रीमियम बाजार के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं की जरूरतों को भी पूरा करने की क्षमता रखते हैं।
उन्होंने विशेषज्ञ संस्थाओं से आग्रह किया कि वे महिला शिल्पकारों को केवल प्रशिक्षण तक सीमित न रखें, बल्कि निरंतर मार्गदर्शन, बाजार संपर्क और तकनीकी सहयोग भी उपलब्ध कराएं। साथ ही महिला उद्यमियों को एमएसएमई की तर्ज पर प्रोत्साहन और सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास करने की आवश्यकता बताई।
निर्यात की पूरी प्रक्रिया पर दिए गए प्रशिक्षण
कार्यशाला में निर्यात मूल्य श्रृंखला पर आधारित चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए—
1. लोकल से ग्लोबल तक: ग्रामीण उद्यमों के लिए एक्सपोर्ट के अवसर
2. अपने उत्पाद को निर्यात के लिए तैयार करना
3. निर्यात कैसे करें: दस्तावेजीकरण, नियमों का पालन और लॉजिस्टिक्स
4. ग्लोबल मार्केट से जुड़ाव: खरीदार, मार्केट लिंकेज और बिजनेस विकास
इन सत्रों में विशेषज्ञों ने ग्रामीण उद्यमियों को निर्यात के अवसर, उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार करने, दस्तावेजी प्रक्रिया, लॉजिस्टिक्स, वित्तीय सहायता और वैश्विक खरीदारों से जुड़ने की जानकारी दी। प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी विशेषज्ञों द्वारा किया गया।
महिला कारीगरों के बच्चों को मिलेगी छात्रवृत्ति
कार्यशाला के दौरान जयपुर स्थित ARCH कॉलेज ऑफ डिजाइन एंड बिजनेस की फाउंडर एवं डायरेक्टर अर्चना सुराना ने महिला कारीगरों के बच्चों के लिए हर वर्ष छात्रवृत्ति देने की घोषणा की। इसके तहत प्रत्येक वर्ष पांच बच्चों का चयन किया जाएगा।
25 महिला शिल्पकारों ने प्रदर्शित किए उत्पाद
कार्यशाला में प्रदेशभर के 25 स्वयं सहायता समूहों का प्रतिनिधित्व करने वाली 25 महिला शिल्पकारों ने अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया। महिला उद्यमियों को विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने के साथ निर्यात योजनाओं, वित्तीय सहायता, बाजार संपर्क और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की संभावनाओं की जानकारी मिली।
कई संस्थाओं के विशेषज्ञों ने की सहभागिता
कार्यक्रम में निर्यात संवर्धन संस्थाओं, वित्तीय संस्थानों और उद्योग संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने भाग लिया। इनमें—
- एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स (EPCH)
- राजस्थान स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन (RAJSICO)
- एमएसएमई डेवलपमेंट एंड फैसिलिटेशन ऑफिस
- नाबार्ड
- हैंडीक्राफ्ट्स सर्विस सेंटर
- फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (FIEO)
- नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन (NSIC)
- वाणिज्य एवं उद्योग विभाग
- इंडिया पोस्ट राजस्थान सर्किल
- एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (ECGC)
- कस्टम विभाग (जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा)
- राजस्थान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (RCCI)
- क्राफ्ट्स काउंसिल ऑफ वीवर्स एंड आर्टिजन्स (CCWA)
सहित कई संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे। राज्य स्तरीय बैंकर समिति राजस्थान (SLBC) के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई।
‘वोकल फॉर लोकल’ से ‘लोकल टू ग्लोबल’ की ओर कदम
राजीविका की यह पहल ग्रामीण महिला उद्यमियों को सशक्त बनाने, स्वयं सहायता समूहों की निर्यात क्षमता विकसित करने और उनके उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
कार्यशाला के माध्यम से महिला शिल्पकारों को न केवल राष्ट्रीय बल्कि वैश्विक बाजारों में नए अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

















































