लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
चम्बल पर 2.3 किमी लंबा एक्वाडक्ट निर्माणाधीन
2,230 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा जल आवागमन का विशाल संरचनात्मक पुल, जून 2028 तक पूरा होगा
जयपुर : मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान की महत्वाकांक्षी राम जलसेतु लिंक परियोजना (संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चम्बल लिंक परियोजना) मिशन मोड पर तेजी से आगे बढ़ रही है। जल सुरक्षा की दिशा में मील का पत्थर साबित होने वाली इस परियोजना के तहत चम्बल नदी पर 2.3 किलोमीटर लंबा एक्वाडक्ट निर्माणाधीन है, जो जून 2028 तक तैयार हो जाएगा।
एक्वाडक्ट का निर्माण और संरचना
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प्रथम चरण के पैकेज-2 के तहत 2,230 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण किया जा रहा है।
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एक्वाडक्ट कोटा जिले की दीगोद तहसील (पीपलदा समेल गांव) और बूंदी जिले की इंद्रगढ़ तहसील (गोहाटा गांव) को जोड़ता है।
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नवनेरा बैराज से पानी पम्प हाउस के माध्यम से मेज नदी में छोड़ा जाएगा। वहां से मैज बैराज → गलवा बांध → बीसलपुर और ईसरदा बांध तक जल पहुंचाया जाएगा।
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यह एक्वाडक्ट आमजन के लिए अतिरिक्त आवागमन मार्ग भी उपलब्ध कराएगा।

तकनीकी विवरण
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लंबाई: 2,280 मीटर
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आंतरिक चौड़ाई: 41.25 मीटर
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ऊंचाई: 7.7 मीटर
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निर्माण स्थल पर कैंप एवं बैचिंग प्लांट का लगभग 90% कार्य पूरा
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प्रस्तावित 15 टेस्ट पाइल में से 8 पूरी हुई
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कुल 5,060 वर्किंग पाइल में से 860 पाइल का निर्माण संपन्न
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12 रिग मशीनों की सहायता से प्रतिदिन 15-20 पाइल का निर्माण
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औसतन प्रतिदिन 500 क्यूबिक मीटर कंक्रीट कार्य
परियोजना का महत्व
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मार्गदर्शन में, यह परियोजना लगभग 90,000 करोड़ रुपये के वृहद स्वरूप में तैयार की गई है।
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प्रथम चरण में राज्य के 17 जिलों की लगभग 3.25 करोड़ आबादी को पेयजल सुविधा उपलब्ध होगी।
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सिंचाई और उद्योगों के लिए भी पर्याप्त जल उपलब्ध होगा।
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प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई दिशा मिलेगी।
परियोजना की समयरेखा और समन्वय
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मई 2025: निर्माण कार्य प्रारंभ
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जून 2028: परियोजना पूर्ण होने का लक्ष्य
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जनवरी 2024: मध्यप्रदेश सरकार से सहमति और एमओयू
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17 दिसंबर 2024: जयपुर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में राजस्थान, मध्य प्रदेश और भारत सरकार के मध्य एमओए का आदान-प्रदान
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में यह परियोजना जल आत्मनिर्भरता की दिशा में राजस्थान के लिए जीवनदायिनी साबित होगी।