लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
ट्रस्ट ने प्रशासन पर कार्रवाई में देरी के लगाए आरोप
हाईकोर्ट और जिला न्यायालय के आदेशों का हवाला देकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन, मंदिर परिसर से कथित अतिक्रमण हटाने की मांग
नागौर। प्रदीप कुमार डागा। गोठ-मांगलोद स्थित प्रसिद्ध श्री दधिमती माताजी मंदिर में नवरात्रि मेले से पहले विवाद गहरा गया है। मंदिर ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया है कि न्यायालय के आदेशों के बावजूद मंदिर परिसर में कथित अतिक्रमण और व्यवस्थाओं में हस्तक्षेप के मामले में अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
ट्रस्ट ने उठाया न्यायालय के आदेशों की पालना का मुद्दा
ट्रस्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ में दायर एसबी सिविल रिट पिटीशन संख्या 5809/2023 में 12 सितंबर 2023 को दिए गए आदेश का हवाला दिया है। ट्रस्ट के अनुसार आदेश में मंदिर परिसर से अतिक्रमण हटाने और ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही गई थी। ट्रस्ट का आरोप है कि आदेश के बावजूद परिसर की स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं हुआ है।
पुजारी वर्ग और व्यवस्थाओं को लेकर आरोप
ज्ञापन में अपर जिला न्यायाधीश, जायल की अदालत में विचाराधीन दीवानी अपील संख्या 19/2023 में 1 सितंबर 2026 को दिए गए आदेश का भी उल्लेख किया गया है। ट्रस्ट का दावा है कि न्यायालय ने गर्भगृह के भीतर पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी पुजारी वर्ग तथा गर्भगृह के बाहर की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी पंजीकृत ट्रस्ट से संबंधित मानी है।
ट्रस्ट ने मंदिर परिसर में कार्यालय, आवास, भोजनशाला और लोहे की रैलिंग सहित विभिन्न निर्माणों का आरोप लगाया है। इसके अलावा गर्भगृह के सामने रखे गए दानपात्र को लेकर भी ट्रस्ट ने आपत्ति जताई है और इसे हटाने की मांग की है। ट्रस्ट ने इन मामलों में प्रशासन से न्यायालय के आदेशों के अनुरूप कार्रवाई की मांग की है।
कई बार ज्ञापन देने का दावा
ट्रस्ट के अनुसार 5 अगस्त 2026 को कलेक्टर कार्यालय में बैठक हुई थी। इसके बाद 15 सितंबर को अतिरिक्त जिला कलेक्टर और 28 सितंबर को जिला कलेक्टर को भी ज्ञापन सौंपा गया। ट्रस्ट का आरोप है कि लगातार शिकायतों और ज्ञापनों के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
नवरात्रि मेला नजदीक, बढ़ी चिंता
अखिल भारतवर्षीय दाधीच महासभा के अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण दाधीच ने मुख्यमंत्री से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि 11 से 20 अक्टूबर तक प्रस्तावित नवरात्रि मेले से पहले न्यायालय के आदेशों की पालना सुनिश्चित की जानी चाहिए।
ट्रस्ट का कहना है कि मेले से पहले मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं और अधिकारों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई तो बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी के दौरान विवाद की स्थिति बन सकती है। ऐसे में प्रशासन से समय रहते आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की गई है।
प्रशासन की कार्रवाई पर उठे सवाल
मंदिर ट्रस्ट की ओर से न्यायालय के आदेशों और पूर्व में दिए गए ज्ञापनों का हवाला देते हुए कार्रवाई की मांग की गई है। अब सवाल यह है कि इन शिकायतों पर प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं और नवरात्रि मेले से पहले मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं को लेकर स्थिति किस तरह स्पष्ट की जाती है।





















































